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वायुसेना ने बनाया ‘एडवांस लैंडिंग ग्राउंड’ … न्योमा हवाई पट्टी से चिढ़ गया चीन!

१९वें दौर की बातचीत में जाहिर की आपत्ति
सुरेश एस डुग्गर / जम्मू
हिंदुस्थान एलएसी के निकट न्योमा में हवाई पट्टी बना रहा है। यहां पर कई अत्याधुनिक हेलिकॉप्टर व फाइटर रखे जाने हैं। इस हवाई पट्टी के निर्माण से चीन चिढ़ गया है। दोनों देशों के बीच १९वें दौर की जो बातचीत हुई है, उसमें चीनी सेना ने इस पर अपत्ति प्रकट की है।
भारतीय वायुसेना पूर्वी लद्दाख के दौलत बेग ओल्डी, फुकचे व न्योमा में भावी चुनौतियों का सामना करने के लिए एडवांस लैंडिंग ग्राउंड को और बेहतर बना रही है। हिंदुस्थान की इस तैयारी से लाल सेना चिढ़ी हुई है। इस समय पूर्वी लद्दाख में अपाचे अटैक हेलिकॉप्टरों के साथ चिनूक, गरुड़ व एमआई हेलिकॉप्टर दुश्मन पर कहर बरपाने को तैयार हैं। वायुसेना के अधिकारियों का कहना है कि न्योमा इलाके में वायुसेना के लिए एडवांस लैंडिंग ग्राउंड बहुत महत्व रखती है। एलएसी के पास होने के कारण यह रणनीतिक रूप से अहम हैं। इससे लेह से एलएसी तक पहुंचने की दूरी कम हो जाती है। एलएसी तक साजो-सामान व सैनिक पहुंचाना चंद मिनटों का काम है।
हिंदुस्थान पूर्वी लद्दाख में दौलत बेग ओल्डी (डीबीओ), फुकचे और न्योमा सहित कई विकल्पों पर विचार कर रहा है, जो चीन के साथ एलएसी से कुछ ही मिनटों की दूरी पर हैं। न्योमा एएलजी से अपाचे हमले के हेलिकॉप्टरों, चिनूक हेवी-लिफ्ट हेलिकॉप्टरों और एमआई -१७ हेलिकॉप्टरों से गरुड़ स्पेशल फोर्स का संचालन भी किया जा रहा है।

न्योमा का सामरिक महत्व
एलएसी के निकट होने के कारण न्योमा एएलजी का सामरिक महत्व है। यह लेह हवाई क्षेत्र और एलएसी के बीच महत्वपूर्ण अंतर को पाटता है, जिससे पूर्वी लद्दाख में जवानों और सामग्री की त्वरित आवाजाही को सक्षम बनाता है। लद्दाख में ६४६ किमी लंबी सीमा पर चीन की ओर से लगातार बढ़ रहे सैन्य दबाव के बीच भारत ने वर्ष २००८ की ३१ मई को लद्दाख क्षेत्र में एलएसी से महज २३ किलोमीटर दूर अपनी एक और हवाई पट्टी खोली थी। इससे पहले वर्ष २००९ में मई तथा नवंबर महीने में उसने दो अन्य हवाई पट्टियों को खोल कर चीन को चिढ़ाया जरूर था।

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