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अजीत पवार ने दबा दी थी भाजपा नेताओं की आर्थिक नब्ज … फडणवीस ने निर्णय पलटकर दादा को दे दिया बड़ा झटका!

सामना संवाददाता / मुंबई
राष्ट्रीय सहकार विकास निगम ने (एनसीडीसी) द्वारा स्वीकृत कर्ज के लिए उपमुख्यमंत्री अजीत पवार ने शर्तें लगाकर भाजपा नेताओं की नब्ज दबा थी। लेकिन उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने अजीत दादा के पैâसले को पलटकर पहला झटका दे दिया है, ऐसा कहा जा रहा है।
कारखानों के निदेशकों को व्यक्तिगत और सामूहिक दायित्व का शपथ पत्र देने, कारखाना की जगह का कब्जा देने, सात बारा, कर्ज का बोझ सहित अन्य दस्तावेज को सरकार के पास गिरवी रखने और हस्ताक्षर का अधिकार सरकार को देने की शर्तें अजीत पवार ने लगा दी थीं। लेकिन मात्र सप्ताह भर के अंदर संबंधित निर्णय को वापस लेने का समय महायुति सरकार में आ गया। कारखानों से जुड़े निर्णय लेकर अजीत पवार ने भाजपा नेताओं का गला दबा दिया था। लेकिन उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने अजीत दादा के पैâसले को पलटकर पहला झटका दिया है, ऐसा कहा जा रहा है।
केंद्रीय मंत्री रावसाहेब दानवे के नेतृत्व में भाजपा नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और अजीत पवार से मुलाकात की। उक्त नेताओं ने चीनी मिलों के मुद्दों पर चर्चा की और सरकार ने अपना निर्णय वापस ले लिया है, यह अजीत पवार के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।

भाजपा के किन नेताओं की दबी थी नब्ज?
राष्ट्रीय सहकार विकास निगम ने वित्तीय संकट में फंसी छह चीनी मिलों को राज्य सरकार की गारंटी के तहत ५४९.५४ करोड़ रुपए का मार्जिन मनी ऋण स्वीकृत किया है। सोलापुर के मालशिरस में विजयसिंह मोहिते-पाटील की शंकर सहकारी चीनी फैक्ट्री को ११३.४२ करोड़, पुणे के इंदापुर में हर्षवर्द्धन पाटील की कर्मयोगी शंकररावजी पाटील सहकारी चीनी फैक्ट्री को १५० करोड़, नीरा-भीमा सहकारी चीनी फैक्ट्री को ७५ करोड़, लातूर के किलारी औसा के भाजपा विधायक अभिमन्यु पाटील की किसान सहकारी चीनी फैक्ट्री को ५० करोड़, जालाना के भोकरदन में रावसाहेब दानवे पाटील की रामेश्वर सहकारी साखर कारखाना को ३४.७४ करोड़, सोलापुर मोहोल में सांसद धनंजय महाडिक का भीमा सहकारी साखर कारखाना को १२६.३८ करोड़ रुपए का समावेश है।

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