मुख्यपृष्ठनए समाचारहाय रे मोदी सरकार... गरीबों के पास न नौकरी है न निवाला!...

हाय रे मोदी सरकार… गरीबों के पास न नौकरी है न निवाला! …सीएसडीएस रिपोर्ट में हुआ चौंकानेवाला खुलासा

महंगाई, बेरोजगारी से लोगों में बढ़ा असंतोष
रिपोर्ट से बढ़ा भाजपा का टेंशन

सामना संवाददाता / नई दिल्ली
लोकसभा चुनाव में ४०० पार के सपने में रमी हुई भारतीय जनता पार्टी एक सर्वे से टेंशन में आ गई है। सेंटर फॉर स्टडी ऑफ डेवलपिंग सोसाइटीज (सीएसडीएस) द्वारा किए गए एक सर्वेक्षण में नरेंद्र मोदी शासन में बढ़ती महंगाई और बेरोजगारी पर अंगुली उठाई गई है। मोदी राज में बढ़ती महंगाई ने गरीबों के लिए पेट भरना भी मुश्किल कर दिया है, उनमें सरकार के प्रति आक्रोश पैदा कर दिया है। दूसरी तरफ इस सर्वेक्षण से यह भी सिद्ध हो गया है कि नौकरियों की कमी के कारण युवाओं में सरकार के प्रति काफी गुस्सा है। यह सर्वेक्षण देश के १९ राज्यों के १०० लोकसभा क्षेत्रों में किया गया।
गौरतलब है कि `सीएसडीएस’ संस्था पिछले पांच दशकों से सामाजिक विज्ञान अनुसंधान के क्षेत्र में काम कर रही है। इस संस्था ने हाल ही में लोकसभा चुनाव के मद्देनजर देश में चुनाव पूर्व सर्वेक्षण किया था। इसमें यह जानने की कोशिश की गई कि आखिर आम मतदाता क्या चाहते हैं और चुनाव में किन मुद्दों का असर दिखेगा। चुनाव में सत्ताधारी भाजपा की ओर से हिंदुत्व, अयोध्या में राम मंदिर, कश्मीर में धारा ३७० पर चर्चा की जा रही है। लेकिन आम मतदाता बढ़ती महंगाई और बेरोजगारी से परेशान हैं। इस सर्वे में लोगों ने राय व्यक्त की है कि मोदी सरकार के कार्यकाल में इन समस्याओं ने गंभीर रूप ले लिया है। जहां एक ओर सरकार का दावा है कि देश की अर्थव्यवस्था सही रास्ते पर है, वहीं दूसरी ओर सर्वे की रिपोर्ट कहती है कि देश की जनता खासकर गरीब, मध्यम वर्ग महंगाई और बेरोजगारी से सचमुच सदमे में है। महंगाई और बेरोजगारी ने आम मतदाताओं को चिंता में डाल दिया है कि वह अपना गुजारा कैसे करें।

बेरोजगारी चरम पर, नौकरियां मिलना मुश्किल
इस सर्वे में शामिल देश के करीब दो-तिहाई यानी ६२ फीसदी लोगों का मानना है कि मोदी राज में नौकरियां मिलनी मुश्किल हो गई हैं। इसमें ५९ फीसदी शहरी आबादी और ६२ फीसदी ग्रामीण आबादी शामिल है। सिर्फ १२ फीसदी लोगों ने राय जताई कि भाजपा के सत्ता में आने के बाद नौकरी पाना आसान हो गया है।

सभी वर्ग के बेरोजगारों में आक्रोश
जो लोग कहते हैं कि उन्हें नौकरियां नहीं मिल रही हैं, उनमें हर वर्ग के लोग शामिल हैं। सर्वे में ६७ प्रतिशत मुसलमानों, ६३ प्रतिशत अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) और ५९ प्रतिशत अनुसूचित जनजाति (एसटी) ने सार्वजनिक रूप से कहा कि उन्हें नौकरी पाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। २१ फीसदी ने नौकरी के अवसरों में गिरावट के लिए केंद्र सरकार, जबकि १७ फीसदी ने राज्य सरकारों को जिम्मेदार ठहराया है। इसी तरह ५७ फीसदी ने इस बेरोजगारी के लिए केंद्र और राज्य दोनों सरकारों को जिम्मेदार ठहराया है।

सर्वे में लोगों से यह भी पूछा गया कि देश में सबसे बड़ी समस्या क्या है। उस समय कितने प्रतिशत लोगों ने कौन-सी समस्या उठाई, वह इस प्रकार है…
बेरोजगारी – २७ प्रतिशत
महंगाई – २३ प्रतिशत
विकास – १३ प्रतिशत
भ्रष्टाचार – ८ प्रतिशत
राम मंदिर- ८ फीसदी
हिंदू धर्म – २ प्रतिशत
अंतर्राष्ट्रीय छवि – २ प्रतिशत
आरक्षण – २ प्रतिशत

अन्य समाचार