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‘रविवार तक हर हाल में सरेंडर करें सभी दोषी’ … बिलकिस बानो के गुनहगारों को एससी ने नहीं दी मोहलत

सामना संवाददाता / नई दिल्ली 
गुजरात के बहुचर्चित बिलकिस बानो रेप केस के दोषियों को सुप्रीम कोर्ट की तरफ से कोई मोहलत नहीं मिली है। कोर्ट ने सभी दोषियों को हर हाल में रविवार यानी २१ जनवरी तक सरेंडर करने का आदेश दिया है।
बता दें कि दोषियों ने मांग की थी कि आत्मसमर्पण के लिए उनको ४ हफ्ते का समय दिया जाए लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उनकी मोहलत वाली याचिका खारिज कर दी है। दरअसल, जस्टिस बीवी नागरत्ना ने कहा कि याचिका सुनवाई योग्य नहीं है। गुजरात सरकार द्वारा दोषियों की रिहाई के पैâसले को निरस्त करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने इन्हें आत्मसमर्पण करने को कहा था। सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस बीवी नागरत्ना की अध्यक्षता वाली बेंच ने याचिका को सुनवाई योग्य नहीं बताते हुए कहा कि रविवार तक सभी दोषी जेल अधिकारियों को रिपोर्ट करें। दरअसल, दोषियों ने रिहाई रद्द होने के बाद सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर कई मांगें रखी थींr। मामले में सजायाफ्ता गोविंदभाई नाई ने कोर्ट को बताया कि उनके पिता की उम्र ८८ साल, जबकि मां ७५ साल की हैं। परिवार में केवल वही देखभाल करने वाले व्यक्ति हैं, इसलिए उनको समय दिया जाएगा। वहीं रूपाभाई चंदना ने कहा कि उनको बेटे की शादी में शामिल होना है, इसलिए आत्मसमर्पण की मोहलत दी जाए। मितेश चिमनाल भट्ट ने कहा कि उनकी सर्दियों वाली फसल कटने को तैयार है। उनको यह काम पूरा करने का समय दिया जाए। प्रदीप रमणलाल मोढिया ने तर्क दिया कि उनके फेफड़े की सर्जरी हुई है। उनको आराम की जरूरत है। गौरतलब है कि गुजरात सरकार ने सभी ११ दोषियों को १५ अगस्त २०२२ को माफी नीति के तहत गोधरा उपजेल से रिहा कर दिया था। गुजरात सरकार का कहना था कि दोषियों के अच्छे व्यवहार की वजह से यह पैâसला लिया गया है। हालांकि, इस आदेश के खिलाफ पीड़िता बिलकिस बानो ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था।

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