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…यह सब खेदजनक है!… शरद पवार का उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ को पत्र, सांसदों के निलंबन पर जताई नाराजगी

सामना संवाददाता / मुंबई

पिछले कुछ दिनों से दिल्ली में सियासी माहौल गरमाया हुआ देखने को मिल रहा है। लोकसभा में दर्शक दीर्घा से सीधे सांसदों के बैठने की जगह पर दो युवकों के वूâदने के मामले पर संसद के दोनों सदनों में जमकर हंगामा हुआ।
परिणामस्वरूप, दोनों सदनों में विपक्षी दलों के ९० से अधिक सांसदों को शेष सत्र के लिए निलंबित कर दिया गया है। एक तरफ विपक्षी सांसद कड़ा विरोध कर रहे हैं तो दूसरी तरफ राकांपा सांसद शरद पवार ने सीधे उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के पदेन अध्यक्ष जगदीप धनखड़ को पत्र लिखा है।

क्या लिखा है पत्र

शरद पवार ने पत्र में संसद में सुरक्षा के उल्लंघन और उसके बाद विपक्षी सांसदों के निलंबन पर नाराजगी जताई है। साथ ही उन्होंने पत्र में इस बात का भी जिक्र किया है कि १३ दिसंबर को दर्शक दीर्घा से दो युवकों के वूâदने की घटना के कारण वह संसद की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। ‘उस दिन की ये सभी घटनाएं चिंताजनक हैं। इसके साथ ही यह और भी चिंताजनक है, क्योंकि ये सभी घटनाएं उसी दिन घटी थीं जिस दिन २००१ में संसद पर हमला हुआ था।
वास्तविक स्थिति यह है कि घुसपैठिए एक सांसद द्वारा दिए गए पास को लेकर लोकसभा में दाखिल हुए और फिर दर्शक दीर्घा से धुआं वैंâडल लेकर सीधे लोकसभा हॉल में वूâद गए। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए सांसदों का सरकार से स्पष्टीकरण मांगना स्वाभाविक है। वेंâद्र सरकार को इस संबंध में अपनी भूमिका स्पष्ट करना आवश्यक है, ऐसा उल्लेख शरद पवार ने पत्र में किया है। हालांकि, वेंâद्र सरकार ने इन सभी मुद्दों पर कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया है। लेकिन इसके उलट सरकार से स्पष्टीकरण मांगनेवाले सांसदों पर ही निलंबन की कार्रवाई की गई। यह सभी खेदजनक है। सांसदों के खिलाफ कार्रवाई करना संसद की जवाबदेही और निष्पक्षता के सिद्धांत के खिलाफ है। शरद पवार ने पत्र में यह भी कहा कि सांसदों को ऐसे मामलों में स्पष्टीकरण मांगने का पूरा अधिकार है।

शरद पवार ने क्या मांग की!

इस बीच शरद पवार ने इस पत्र के जरिए उपराष्ट्रपति से इस मामले पर गौर करने का अनुरोध किया है। ‘मैं यह भी समझता हूं कि जो सदस्य इस पूरे हंगामा में शामिल नहीं थे, उन्हें भी निलंबित कर दिया गया है, इसलिए हम आपसे अनुरोध करते हैं कि संसदीय कार्य पद्धतियों और लोकतांत्रिक मूल्यों को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए इस मामले पर ध्यान दें, ऐसा शरद पवार ने पत्र में उल्लेख किया है।’

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