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एकदंत संकष्टी चतुर्थी आज…. एक साधे सब सधे! ….गणेश के साथ श्री हरि भी बरसाएंगे कृपा

मान्यता है कि शुभता के प्रतीक भगवान गणेश जी सभी देवताओं में प्रथम पूज्य हैं। भगवान गणेश भक्तों के लिए विघ्नहर्ता माने जाते हैं। विघ्नहर्ता की पूजा करने से भक्तों के सारे कष्ट दूर होते हैं। विशेष तिथियों पर भगवान गणेश के पूजन से लंबोदर की विशेष कृपा प्राप्त होती है। हिंदू पंचांग के अनुसार प्रत्येक माह में पड़ने वाली कृष्ण पक्ष की चतुर्थी यानी संकष्टी चतुर्थी और शुक्ल पक्ष की चतुर्थी यानी विनायक चतुर्थी भगवान प्रथमेश के पूजन के लिए ऐसे ही विशेष अवसर होते हैं। आज (१९ मई, २०२२) ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि है। इसे एकदंत संकष्टी चतुर्थी भी कहा जाता है। इस दिन भक्तगण सुख, शांति और समृद्धि के लिए एकदंत, दयावंत, चार भुजाधारी भगवान श्री गणेश की विधि-विधान से पूजा-आराधना करते हैं। मान्यता है कि इस दिन गणपति की पूजा तथा व्रत रखने से ज्ञान और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है। इस एकदंत चतुर्थी के गुरुवार को पड़ने से इसका महत्व और भी बढ़ गया है। क्योंकि गुरुवार का दिन भगवान श्रीहरि विष्णु के साथ साथ भगवान शिव और मां दुर्गा व लक्ष्मी के पूजन के लिए भी शुभ माना जाता है। अर्थात भगवान गणेश के साथ विष्णु, शिव, मां दुर्गा और लक्ष्मी जी को प्रसन्न करने का सुनहरा मौका है। आज सत्यनारायण कथा करने का बहुत सुंदर अवसर है।
आज के दिन मंदिर में विष्णु जी का दर्शन करें व श्री विष्णुसहस्रनाम का पाठ करें। हनुमानबाहुक व गणेश स्तोत्र के पाठ का आज बहुत महत्व है। आज शिव मंदिर में भगवान शिव को दुग्ध, गंगाजल व शहद से रुद्राभिषेक करें व उनको बेल पत्र अर्पित करें। दुर्गा जी की स्तुति करें। आज दान का बहुत महत्व व पुण्य है। आज पुण्य संचय करने का महान दिवस है। गुरुवार को विष्णु उपासना व व्रत का पुण्य भी है। प्रात:काल पंचांग का दर्शन, अध्ययन व मनन आवश्यक है। शुभ व अशुभ समय का ज्ञान भी इसी से होता है। अभिजीत मुहूर्त का समय सबसे बेहतर होता है। इस शुभ समय में कोई भी कार्य प्रारंभ कर सकते हैं। विजय व गोधूलि मुहूर्त भी बहुत ही सुंदर होता है। राहुकाल में कोई भी कार्य या यात्रा आरंभ नहीं करना चाहिए। राहुकाल का समय दोपहर ०१:३० बजे से ०३ बजे तक है। इस दौरान शुभ काम को करने से परहेज करें।
एकदंत संकष्टी चतुर्थी तिथि
ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि १८ मई दिन बुधवार की रात ११ बजकर ३६ मिनट से शुरू हो रही है, वहीं इस तिथि का समापन अगले दिन १९ मई गुरुवार को रात ०८ बजकर २३ मिनट पर हो रहा है। ऐसे में उदयातिथि के आधार पर एकदंत संकष्टी चतुर्थी व्रत एवं पूजा १९ मई को की जाएगी।
• पूजा मुहूर्त- एकदंत संकष्टी चतुर्थी वाले दिन सुबह से साध्य योग है, जो दोपहर ०२ बजकर ५८ मिनट तक रहेगा। इसके बाद शुभ योग शुरू हो जाएगा। पंचांग के अनुसार ये दोनों ही योग पूजा-पाठ के लिए शुभ फलदायी हैं। ऐसे में आप आप प्रात:काल से पूजा-पाठ कर सकते हैं।
• चंद्रोदय समय- चतुर्थी तिथि चंद्रमा की पूजा के बिना अधूरी मानी जाती है। इस दिन चंद्रमा देर से उगता है। एकदंत संकष्टी चतुर्थी की रात चंद्रमा का उदय १० बजकर ५६ मिनट पर होगा। चंद्रमा को जल अर्पित करने के बाद ही व्रत का पारण करते हैं।
• मोदक अर्पित करें- यदि आपकी कोई विशेष मनोकामना है, तो उसके लिए एकदंत संकष्टी चतुर्थी के दिन भगवान गणेश की विधिपूर्वक पूजा कर उनको मोदक का भोग लगाएं। मोदक नहीं हैं तो लड्डू भी अर्पित कर सकते हैं। इसके बाद गणेश चालीसा का पाठ करें। मनोकामना जरूर पूरी होगी।
• दूर्वा अर्पित करें- एकदंत संकष्टी चतुर्थी को पूजा के समय गणेश जी को ५ दूर्वा या दूर्वा की २१ गांठें ‘इदं दुर्वादलं ॐ गं गणपतये नम:’ मंत्र के साथ उनके सिर पर अर्पित करें। इससे गणेश जी प्रसन्न होकर अपने भक्त की मनोकामनाएं पूरी करेंगे।

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