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स्वतंत्रता का अमृत महोत्सव : सर आप ही बताएं, हम झंडा कहां लगाएं?…. १२ हजार आदिवासी परिवारों का मार्मिक सवाल

योगेंद्र सिंह ठाकुर / पालघर
देश को आजादी मिले ७५ साल हो चुके हैं। देश में स्वतंत्रता के ७५वें वर्ष को अमृत महोत्सव वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। लेकिन पालघर जिले के आदिवासी इलाकों में अभी भी सड़क, बिजली, पानी, स्वास्थ्य, रोजगार और आश्रय जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं हैं इसलिए यहां के आदिवासी आज भी बदहाल जिंदगी जी रहे हैं। अमृत ​​महोत्सव को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने `हर घर तिरंगा, घर घर तिरंगा’ अभियान के तहत झंडा फहराने की अपील की है। हालांकि सरकारी आंकड़ों के मुताबिक पालघर जिले में अब भी करीब १२ हजार परिवार बेघर हैं। इन बेघर परिवारों ने `हर घर तिरंगा’ को लागू करनेवाले प्रशासन पर सवाल उठाया है कि `सर, आप बताएं कि हम झंडा कहां लगाएंगे?’

सैकड़ों की जा चुकी है जान
पालघर जिले के आदिवासी तालुकाओं में सड़क, बिजली, पानी और स्वास्थ्य सुविधाएं अभी भी उपलब्ध नहीं हैं। सड़क नहीं होने से कई इलाकों में मरीजों को डोली में लेकर अस्पताल जाना पड़ता है और समय पर इलाज न मिलने से सैकड़ों मरीजों की मौत हो चुकी है। गर्मी में नागरिकों को पानी के लिए भटकना पड़ता है। हर साल रोजगार के अभाव में शहर की ओर पलायन करना पड़ता है। आज भी हजारों नागरिक बेघर हैं।

पीएम के खोखले वादे
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने २०१९ के चुनाव में एलान किया था कि २०२२ तक कोई भी परिवार बेघर नहीं होगा, हर परिवार को पक्का घर मिलेगा। इसे कई बार दोहराया भी गया है लेकिन पीएम के वादे खोखले साबित हुए हैं। बता दें कि पालघर जिले में करीब ११ हजार ७७५ परिवार बेघर हैं। इनके लिए मकान तो स्वीकृत हो गए हैं लेकिन उनका निर्माण नहीं हुआ है।

हजारों आदिवासी बेघर
प्रधानमंत्री आवास, शबरी आवास, रमई आवास और आदिम आवास योजनाओं के तहत बेघर परिवारों के लिए घरकुल योजना लागू की गई है। हर जिले के लिए सरकार द्वारा घरकुल दिए जाते हैं। उसी के अनुसार सर्वे किया जाता है। पालघर जिले में इन स्वीकृत और अधूरे मकानों के अलावा यह एक कड़वी सच्चाई है कि आज भी आदिम जनजातियों सहित हजारों आदिवासी परिवार बेघर हैं इसलिए हर बेघर परिवार को पक्का घर देने का प्रधानमंत्री का वादा हवा में उड़ गया।

मूलरूप से स्वतंत्रता के अमृत महोत्सव के दौरान पालघर जिले में हजारों परिवार बेघर हैं। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि वे अपने देश का तिरंगा झंडा कहां लगाएं? तिरंगे झंडे पर सभी को गर्व है। हमारे आदिवासी भाइयों को दोष मत दो, अगर तिरंगे को घास की झोपड़ी पर प्रदर्शित किया जाता है और उसका अपमान किया जाता है। सरकार के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं और कंक्रीट के घरों का निर्माण करना आवश्यक है।
-वैदेही वाढ़न, पालघर जिला परिषद अध्यक्ष

तालुका वार पालघर जिले में बेघर परिवारों के अनुमोदित व अपूर्ण आवास की संख्या…
• प्रधानमंत्री आवास योजना
डहाणू – २,१४८
जव्हार – १,५५६
मोखाडा – ८८९
पालघर – ८७२
तलासरी – ८४८
वसई – २३५
विक्रमगढ़ – १,४१३
कैसल – १,३००
रमई आवास योजना
डहाणू – ९
जव्हार – ३
मोखाडा – २५
पालघर – ३२
तलासरी – ८
वसई – ११
विक्रमगढ़ – ०
वैâसल – २१
कुल – १०९
सबरी आवास घरकुल योजना
डहाणू – ४९५
जव्हार- २३४
मोखाडा – १२१
पालघर – २४४
तलासरी – २७८
वसई – १४५
विक्रमगढ़ – २२५
वैâसल – १२९
कुल – १,८७१
• आदिम आवास घरकुल योजना
डहाणू – ७९
जव्हार – ८३
मोखाडा – ११६
पालघर – ४९
तलासरी – ३५
वसई – ४५
विक्रमगढ़ – ६०
वैâसल – ६७
कुल – ५३४

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