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और महंगा हुआ कर्ज! …त्योहारी सीजन से पहले ईएमआई पर झटका

• आरबीआई ने फिर बढ़ाया रेपो रेट
सामना संवाददाता / नई दिल्ली
शक्ति की उपासना का पर्व नवरात्र आधा बीत चुका है और इसी के साथ लोग दीपों के पर्व दीपावली की तैयारियों में जुट गए हैं। महंगाई लगभग ढाई वर्षों के कोरोना काल की मुश्किलों से उबर रही आम जनता का पीछा छोड़ने को तैयार नहीं है। कर्ज लेकर जरूरतों को पूरा करने की कोशिश करनेवालों पर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार और रिजर्व बैंक की गलत नीतियां कहर बनकर टूट रही हैं। आरबीआई द्वारा बार-बार रेपो रेट में वृद्धि किए जाने से कर्ज लगातार महंगा हो रहा है। ब्याज दर बढ़ रही है और लोन की किश्त भरना लोगों को भारी लगने लगा है। लगातार बढ़ती महंगाई पर काबू पाने के लिए रिजर्व बैंक ने एक बार फिर से रेपो रेट को बढ़ा दिया है। आरबीआई ने अब रेपो रेट में ५० बेसिस अंकों की बढ़ोतरी की है।
रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास की अध्यक्षता में हुई मौद्रिक नीति की समीक्षा बैठक (आरबीआई मॉनीटरी पॉलिसी) के आखिरी दिन शुक्रवार को रेपो रेट में ५० आधार अंकों की बढ़ोतरी का एलान किया गया। इस बढ़ोतरी के बाद रेपो रेट ५.४० से बढ़कर ५.९० फीसद हो गया है। रेपो रेट में आरबीआई द्वारा की गई यह लगातार चौथी बार बढ़ोतरी है।

और महंगा हो जाएगा लोन
इसका सीधा मतलब है कि ब्याज दर बढ़ेगी। होम लोन समेत सभी तरह के लोन महंगे हो जाएंगे। आरबीआई के इस एलान का अर्थ यह है कि आपकी ईएमआई इसके चलते काफी बढ़नेवाली है। इसका असर होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की किश्तों के महंगे होने के रूप में देखने को मिलेगा।

राजकोषीय घाटा ३२.६ प्रतिशत पर
केंद्र सरकार का राजकोषीय घाटा चालू वित्त वर्ष में अगस्त तक ३२.६ प्रतिशत पर पहुंच गया। एक साल पहले इसी अवधि में यह ३१.१ प्रतिशत था। सरकार की कुल आय और व्यय के बीच अंतर को बताने वाला राजकोषीय घाटा अप्रैल-अगस्त के दौरान वास्तविक रूप से ५,४१,६०१ करोड़ रुपए रहा। गौरतलब हो कि राजकोषीय घाटा सरकार द्वारा बाजार से लिए गए कर्ज की स्थिति को बताता है। महालेखा नियंत्रक (सीजीए) के आंकड़ों के अनुसार, कर समेत सरकार की कुल प्राप्तियां ८.४८ लाख करोड़ रुपए रहीं। यह २०२२-२३ के लिए बजटीय अनुमान का ३७.२ प्रतिशत है। एक साल पहले २०२१-२२ की इसी अवधि में कुल प्राप्ति बजटीय अनुमान की ४०.९ प्रतिशत थी। कर राजस्व संग्रह सात लाख करोड़ रुपए रहा। यह चालू वित्त वर्ष के बजटीय अनुमान का ३६.२ प्रतिशत रहा। केंद्र सरकार का कुल व्यय अप्रैल-अगस्त के दौरान १३.९ लाख करोड़ रुपए रहा, जो बजटीय अनुमान का ३५.२ प्रतिशत है। यह बीते वित्त वर्ष २०२१-२२ की इसी अवधि में ३६.७ प्रतिशत था। सरकार ने वित्त वर्ष २०२२-२३ में राजकोषीय घाटा १६.६१ लाख करोड़ रुपए रहने का अनुमान रखा है, जो जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) का ६.४ प्रतिशत है। आंकड़ों के अनुसार, पूंजी व्यय अप्रैल-अगस्त के दौरान २०२२-२३ के बजटीय लक्ष्य का ३३.७ प्रतिशत रहा, जबकि एक साल पहले इसी अवधि में यह ३१ प्रतिशत था।

क्या है रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट?
रेपो रेट वह दर है जिस पर आरबीआई द्वारा बैंकों को कर्ज दिया जाता है और बैंक इसी कर्ज से ग्राहकों को लोन देते हैं। रेपो रेट बढ़ने का मतलब है कि बैंक से मिलनेवाले कई तरह के लोन महंगे हो जाएंगे। रिवर्स रेपो रेट वह दर है जिस पर बैंकों की ओर से जमा राशि पर आरबीआई से उन्हें ब्याज मिलता है।

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