" /> अंदर की बात…माकन ने लिया फीडबैक

अंदर की बात…माकन ने लिया फीडबैक

कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव व राजस्थान के प्रभारी अजय माकन ने लगातार दो दिनों तक जयपुर में रहकर कांग्रेस के सभी विधायकों व कांग्रेस को समर्थन दे रहे राष्ट्रीय लोक दल व निर्दलीय विधायकों से वन टू वन मुलाकात की है। इसे प्रदेश में मंत्रिमंडल के पुनर्गठन की कवायद के तौर पर देखा जा रहा है। माकन एक सप्ताह में लगातार दूसरी बार जयपुर आ कर कांग्रेस संगठन को नया स्वरूप देने में लगे हुए हैं। कुछ दिन पूर्व ही माकन कांग्रेस के राष्ट्रीय संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल के साथ जयपुर आए थे। जयपुर में दोनों नेताओं ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट व जयपुर में उपस्थित मंत्री, विधायकों व संगठन के पदाधिकारियों से मुलाकात की थी। जयपुर आने से पहले केसी वेणुगोपाल व माकन ने कांग्रेस की कार्यकारी अध्यक्ष सोनिया गांधी, राहुल गांधी व प्रियंका गांधी से मुलाकात की थी। जयपुर से दिल्ली जाने के तीन दिन बाद ही माकन का फिर से जयपुर आकर सभी विधायकों से व्यक्तिगत मिलना प्रदेश की राजनीति में किसी बड़े फेरबदल का संकेत है। चर्चा है कि विधायकों से वन टू वन मिलने के दौरान माकन को अधिकतर विधायकों ने मंत्रियों द्वारा उनके काम नहीं करने की शिकायतें की हैं। मुलाकात के दौरान माकन ने विधायकों से संभावित जिला व ब्लॉक अध्यक्षों के नाम भी पूछे। चर्चा है कि राजस्थान में पहले मंत्रिमंडल का पुनर्गठन होगा, उसके बाद जिला व ब्लॉक अध्यक्षों की नियुक्तियां होगी फिर राजनीतिक नियुक्तियों का दौर चलेगा। माकन द्वारा जयपुर में हर विधायक से सात मिनट तक चर्चा करना बहुत ही महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राज्य सरकार का आधा कार्यकाल पूरा हो चुका है। ऐसे में प्रदेश में चल रहे आपसी गुटबाजी को समाप्त करने के लिए ही कांग्रेस आलाकमान ने माकन को राजस्थान में सक्रिय किया है। जयपुर आने से पूर्व दिल्ली में माकन से पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट ने करीबन एक घंटा तक चर्चा कर उनसे एक वर्ष पूर्व किए गए वादे को पूरा करवाने की मांग की है। जयपुर में विधायकों से रायशुमारी करने के बाद पायलट एक बार फिर दिल्ली में माकन से मिलेंगे। विधायकों की रायशुमारी की रिपोर्ट बनाकर माकन दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को देंगे, उसके बाद राजस्थान में बदलाव का दौर शुरू होगा।
कहां गुम हो गए पाक नागरिक?
केंद्रीय गृह मंत्रालय देश में अवैध रूप से रहनेवाले विदेशी नागरिकों खासकर पाकिस्तानी नागरिकों को लेकर चिंतित है। गृह मंत्रालय ने सरहदी सीमा से सटे राजस्थान में आने के बाद ६८४ पाक नागरिक मिसिंग बताए हैं। गृहमंत्रालय ने इन पाक नागरिकों की सूची राज्य सरकार को भेजकर इन्हें ट्रेस करने के निर्देश दिए। गृह मंत्रालय ने राज्य सरकारों से ऐसे अवैध विदेशी नागरिकों के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। इधर गृह मंत्रालय के निर्देश पर राज्य सरकार ने गृह सचिव की अध्यक्षता में कमेटी का गठन किया है जो राज्य में आकर लापता होनेवाले विदेशी नागरिकों का सुराग लगाएगी। पाकिस्तान और अन्य देशों से धार्मिक वीजा या अन्य कारणों से बड़ी संख्या में लोग भारत आ रहे हैं। भारत आने के बाद इन्हें वीजा में अंकित स्थान पर रहना होता है। लेकिन इनमें बड़ी संख्या में लोग उस स्थान को छोड़कर दूसरे स्थानों पर चले गए। ऐसे में उनकी कोई खैर-खबर नहीं है। मामला गृह मंत्रालय तक पहुंचा तो हड़कंप मच गया। सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट हो गर्इं। गृह मंत्रालय ने ऐसे मिसिंग हुए विदेशी नागरिकों को सुरक्षा की दृष्टि से खतरनाक माना है। इसके लिए राज्य सरकारों को इन अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। केंद्रीय गृहमंत्रालय ने चार अलग पत्र लिखकर राजस्थान में ६८४ पाक नागरिकों की सूची बताई है। गृह मंत्रालय के निर्देश के बाद राज्य सरकार ने मिसिंग विदेशी नागरिकों को ढूंढने की कवायद शुरू की। राज्य सरकार को ५१० नागरिकों का पता चल गया, जो वीजा में अंकित स्थान के अलावा दूसरी जगह रह रहे हैं। हालांकि ११० विदेशी नागरिक अभी भी लापता हैं, जिन्हें इंटेलिजेंस जिला प्रशासन नहीं खोज पाया है। गृह मंत्रालय ने राजस्थान सहित अन्य राज्यों को दिए गए निर्देशों में कहा है कि लापता हुए पाकिस्तानी और अन्य विदेशी नागरिक प्रतिबंधित, आघोषित और संरक्षित छावनी क्षेत्रों में भी निवास करने की सूचना है। गृह मंत्रालय का मानना है कि ऐसे व्यक्तियों का बिना अनुमति प्रतिबंधित क्षेत्रों में निवास करना आंतरिक एवं बाहरी सुरक्षा की दृष्टि से खतरनाक है। गृह सचिव की अध्यक्षता में गठित कमेटी मिसिंग विदेशी नागरिकों का पता लगाने के साथ नए आनेवाले विदेशी नागरिकों पर मॉनिटरिंग करेगी।
चंबल नदी का होगा उद्धार
नमामि गंगे योजना के तहत राजस्थान की चंबल नदी में बेहद दुर्लभ गंगा डॉल्फिन, घड़ियाल, ऊदबिलाव समेत विलुप्ती के कगार पर पहुंची प्रजातियों को बचाने की कवायद की जाएगी। केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय और भारतीय वन्यजीव संस्थान की मदद से राजस्थान की सालभर बहनेवाली एक मात्र नदी चंबल को बचाने के लिए सरकार ने योजना बनाई है। किसी भी नदी को बचाने के लिए सबसे पहले उसके ईको सिस्टम को बचाया जाता है। भारतीय वन्य जीव संस्थान और राजस्थान के वन विभाग मिलकर चंबल में संकट काल से जूझ रहे गंगा डॉल्फिन, घड़ियाल और ऊदबिलाव को बचाएंगे। हालांकि यहां गंगा डॉल्फिन और ऊदबिलाव पहले एक लंबे अंतराल तक लुप्त रही हैं। इसके लिए आयोजित र्कशॉप में वन सचिव श्रेया गुहा, हेड ऑफ फॉरेस्ट फोर्सेज श्रुति शर्मा और मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक एमएल मीना मौजूद रहे। भारतीय वन्यजीव संस्थान से वैज्ञानिक डॉ. रुचि बाडोला इसमें शामिल हुए, इससे इन जीवों की चंबल में वापसी से इनके संरक्षण की कुछ उम्मीद जगी है। अवैध बजरी खनन और नदी में बढ़ती केमिकल युक्त और इंसानी गंदगी से यहां जलीय जीव लगातार संकट में हैं। मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक राजस्थान एमएल मीना ने बताया कि मछलियों की प्रजातियां और तादाद कम हो रही हैं। घड़ियाल जैसे जीव संकट के दौर से गुजर रहे हैं। जबकि इसका असर अब सरवाइवल में सबसे माहिर माने जानेवाले मगरमच्छों पर भी पड़ने लगा है। हेड ऑफ फॉरेस्ट फोर्सेज श्रुति शर्मा ने बताया कि अब तक जल में रहनेवाले इन सभी जीवों की किसी ने सुध नहीं ली थी। न कोई गिनती हुई और न ही बचाने की कोशिश। अब वन विभाग इन्हें बचाने के लिए एक विशेष अभियान चलाकर पहले इनकी संख्या का एक ऐस्टीमेशन करेगा और उसके बाद इन्हें बचाने के लिए जरूरी कदम उठाएगा। सभी विभागों को साथ जोड़ा गया है। भारतीय नमामि गंगे प्रोजेक्ट के तहत नदियों पर काम कर रहीं वन्यजीव संस्थान की वैज्ञानिक डॉ. रुचि बाडोला के मुताबिक चंबल में बहुत बेहतरीन मरीन वाइल्ड लाइफ है। अब यहां चुनिंदा स्थानों पर वन विभाग की ओर से कंजरवेशन ब्रीडिंग सेंटर बनाए जाएंगे। ताकि ऐसे संकटग्रस्त जीवों के प्रजनन को बढ़ावा देकर उनकी तादाद में इजाफा किया जा सके।
फिर से सक्रिय होगी बीएसपी
राजस्थान में बहुजन समाज पार्टी को मजबूत बनाने और पार्टी के वोट बैंक को एकजुट करने के लिए सक्रिय हो गई है। पार्टी की कार्यसमिति की बैठक में प्रदेश अध्यक्ष भगवान सिंह बाबा ने प्रदेश में चल रहे संगठनात्मक कार्यो की समीक्षा की। इसके साथ ही पार्टी संगठन को बूथ लेवल तक मजबूत करने के साथ सदस्यता अभियान की समीक्षा भी की गई। बसपा का वोट बैंक ज्यादातर पूर्वी राजस्थान के जिलों में है। प्रदेश में बसपा को दलित वोट मिलते हैं और यहीं कारण है कि पिछले विधानसभा चुनाव में बीएसपी के छह विधायक चुने गए थे। इनमें नदबई से जोगेंद्र अवाना, तिजारा से संदीप यादव, किशनगढबास से दीपचंद, करौली से लाखन मीणा, उदयपुरवाटी से राजेंद्र गुढा और नगर से वाजिब अली हैं। इनमें उदयपुरवाटी को छोड़कर बाकी सीटें पूर्वी राजस्थान खासकर भरतपुर, अलवर, करौली जिले में आती है। इनमें भी अलवर और भरतपुर जिले से बीएसपी के दो दो विधायक चुने गए थे। बाद में ये विधायक कांग्रेस में शामिल हो गए। बीएसपी ने पिछले माह भी एक बैठक की थी। इसमें तय किया गया था कि पार्टी को पूर्वी राजस्थान में ज्यादा मजबूत किया जाएगा। इसके लिए वहां जिला इकाइयों का गठनकर संगठन को गति दी जाएगी। पूर्वी राजस्थान में दलित वोट बैंक ४० से ज्यादा सीटों को प्रभावित करता है। इसीलिए ज्यादा फोकस यहीं रहेगा। पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को यहां अच्छी सफलता मिली थी। बीएसपी को एक खतरा भीम आर्मी से भी है जो पार्टी के वोटबैंक में सेंध मार सकती है। उत्तर प्रदेश में यहीं हो रहा है। इसलिए बीएसपी की ताकत घटी है और अब इसे ठीक करने के लिए पार्टी राजस्थान में सक्रिय हो रही है। ताकि विधानसभा चुनाव में वह पूरी ताकत के साथ मैदान में उतर सके। बीएसपी की ओर से आगामी दिनों में जिला सम्मेलनों की भी तैयारी की जा रही है। इन सम्मेलनों के जरिए पार्टी अपने संगठन के साथ ही अन्य कार्यक्रम भी देगी। साथ ही सरकार की नीतियों को लेकर आंदोलन भी किया जाएगा। पार्टी की ओर से जिला प्रभारी लगाकर उन्हें इस बारे में निर्देश दिए जाएंगे।
(लेखक राजस्थान सरकार से मान्यता प्राप्त स्वतंत्र पत्रकार हैं। इनके लेख देश के कई समाचार पत्रों में प्रकाशित होते रहते हैं।)