मुख्यपृष्ठस्तंभअंदर की बात : निशाने पर गहलोत समर्थक

अंदर की बात : निशाने पर गहलोत समर्थक

रमेश सर्राफ धमोरा / झुंझुनू । राजस्थान कांग्रेस में चले घटनाक्रम पर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कड़ा रुख अपना लिया है। पर्यवेक्षक के रूप में जयपुर आए वरिष्ठ नेता मलिकार्जुन खड़गे व अजय माकन के सामने जिस तरह की अनुशासनहीनता का परिचय मुख्यमंत्री गहलोत खेमे के विधायकों द्वारा दिया गया, उससे कांग्रेस आलाकमान बहुत नाराज हैं। दोनों पर्यवेक्षकों की रिपोर्ट के बाद कांग्रेस अनुशासन समिति के सचिव तारिक अनवर ने राजस्थान के वरिष्ठ मंत्री शांति धारीवाल, महेश जोशी व पर्यटन विकास निगम के अध्यक्ष धर्मेंद्र राठौड़ को कारण बताओ नोटिस देकर दस दिन में जवाब मांगा है। नोटिस मिलते ही प्रदर्शन कर रहे नेताओं की भाषा बदल गई है और वह कांग्रेस आलाकमान में अपनी प्रतिबद्धता जाहिर करने लगे हैं। धारीवाल व जोशी ने अपने घर पर प्रेस कॉन्प्रâेंस कर आलाकमान में निष्ठा व्यक्त की है। गहलोत के समर्थन में त्याग पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले विधायकों ने भी पलटी मारना शुरू कर दिया है। कई विधायकों ने मीडिया के सामने आकर इस्तीफा देने की घटना पर अनभिज्ञता जाहिर करते हुए कहा है कि उनको पहले बताया नहीं गया था कि किस कागज पर साइन करवा रहे हैं। विधायकों के बदलते रंग को देखकर धारीवाल व जोशी सदमे में नजर आ रहे हैं।
इंतजार में भाजपा
राजस्थान में कांग्रेस की उठापटक को भाजपा दूर से देख रही है। घटनाक्रम पर नजर तो रखेगी लेकिन जोड़-तोड़ से दूर रहेगी। भाजपा पिछले चार सालों से राजस्थान में कांग्रेस की नीतियों के खिलाफ लड़ाई लड़ रही है। अब इस सरकार के कार्यकाल में तकरीबन एक साल का वक्त बचा है। ऐसे में एक साल के लिए सरकार में आकर भाजपा एंटी-इनकम्बेसी अपने सिर नहीं लेना चाहती है। कांग्रेस की खींचतान पर भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व नजर बनाए हुए है। भाजपा के शीर्ष नेतृत्व का कहना है कि पार्टी चुनाव के लिए हमेशा तैयार रहती है। पार्टी का दावा है कि राजस्थान में जब-जब कांग्रेस की ये हालत हुई है। तब-तब विधानसभा चुनाव में पार्टी को दो तिहाई सीटों से जीत मिली है। भाजपा फिलहाल ‘वेट एंड वॉच’ की स्थिति में है। कांग्रेस की इस आपसी लड़ाई ने भाजपा को सरकार पर हमला करने का मौका दे दिया है। राजस्थान में चुनाव के लिए भाजपा ने पहले ही तैयारी शुरू कर दी है। कुछ दिन पहले ही गृहमंत्री अमित शाह ने जोधपुर में भाजपा की एक बैठक कर जनसभा को संबोधित किया था। भाजपा ने इसी साल अपने बड़े पदाधिकारियों की बैठक भी जयपुर में की थी।

पायलट खेमे में गुढ़ा
राजस्थान के सैनिक कल्याण राज्यमंत्री राजेंद्र सिंह गुढ़ा सचिन पायलट के खेमे में शामिल होकर गहलोत खेमे के मंत्रियों पर लगातार बयानबाजी कर रहे हैं। उन्होंने गहलोत सरकार में संसदीय कार्य मंत्री शांति धारीवाल पर तो उनकी बुद्धि खराब होने तक का आरोप लगा दिया है। गुढ़ा जिस खेमे में रहते हैं, वहां प्रâंट फुट पर खेलते हैं। इससे पहले वो गहलोत खेमे में थे। जब सचिन पायलट ने पार्टी से बगावत की थी तो उनका सबसे अधिक मुखरता से विरोध करने वालों में गुढ़ा अग्रणी थे। मगर पार्टी आलाकमान का रुख भांपकर समय रहते गुढ़ा ने पायलट खेमे में एंट्री कर वहां भी मुख्य भूमिका निभा रहे हैं। गुढ़ा स्वयं दो बार बसपा से विधायक बनकर कांग्रेस में शामिल हुए व दोनों ही बार मंत्री भी बने हैं। राजस्थान में गुढ़ा को भी राजनीति का मौसम वैज्ञानिक कहा जाने लगा है, जो हवा का रुख भांपकर पावर सेंटर की तरफ चला जाता है। कुछ दिनों पूर्व ही गुढ़ा ने अपने गांव में अपने बेटे का जन्मदिन मनाया था। उस कार्यक्रम में दर्जनों विधायकों व मंत्रियों के साथ मुख्यमंत्री अशोक गहलोत स्वयं शामिल होने गुढ़ा के गांव पहुंचकर उनको अपनी सरकार बचाने वाला संकटमोचक बताया था।

महापौर गुर्जर बर्खास्त
राजस्थान सरकार ने जयपुर ग्रेटर मेयर सौम्या गुर्जर को पद से बर्खास्त कर दिया है। इसको लेकर स्वायत्त शासन विभाग ने आदेश जारी कर दिया है। साथ ही उनको ६ साल तक चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य करार भी दिया है। २३ सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होने के बाद सरकार को कोर्ट ने दो दिन तक कार्रवाई नहीं करने का समय दिया था। सौम्या गुर्जर पर तत्कालीन निगम आयुक्त यज्ञमित्र देव के साथ मारपीट करने का आरोप था। अदालत ने राज्य सरकार को कहा है कि वो न्याय की रिपोर्ट के आधार पर दो दिन बाद गुर्जर के खिलाफ कार्रवाई करने को स्वतंत्र है। जस्टिस अजय ओक और जस्टिस संजय किशन कौल की खंडपीठ ने यह आदेश गुर्जर की विशेष अनुमति याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए थे। दो दिन बाद राज्य के स्वायत्त शासन विभाग ने मेयर सौम्या गुर्जर की बर्खास्तगी के आदेश जारी कर दिए। मेयर सौम्या गुर्जर के पास अब केवल हाईकोर्ट जाने का विकल्प बचा है। विधि विशेषज्ञों की मानें तो सुप्रीम कोर्ट ने जो आदेश जारी किए हैं, उसके तहत मेयर सौम्या गुर्जर न्यायिक जांच की रिपोर्ट को हाईकोर्ट में चुनौति दे सकती है। उनके पास अब यही एक विकल्प है।

(लेखक राजस्थान सरकार से मान्यता प्राप्त स्वतंत्र पत्रकार हैं। इनके लेख देश के कई समाचार पत्रों में प्रकाशित होते रहते हैं।)

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