मुख्यपृष्ठस्तंभअंदर की बात :  चौटाला की चौपाल

अंदर की बात :  चौटाला की चौपाल

रमेश सर्राफ धमोरो।  राजस्थान की सियासी फिजा में अब हरियाणवी रंग घुलने को तैयार है। पूर्व उपप्रधानमंत्री चौधरी देवीलाल के प्रपौत्र और पांच बार हरियाणा के मुख्यमंत्री रहे ओम प्रकाश चौटाला के पौत्र दुष्यंत चौटाला हरियाणा से बाहर अपनी मौजूदगी दर्ज कराना चाहते हैं इसीलिए वह राजस्थान में सियासी जमीन तलाश रहे हैं। इसके लिए जयपुर में जननायक जनता पार्टी युवाओं का बड़ा सम्मेलन आयोजित कर चुनावी अभियान का आगाज कर चुकी है। दुष्यंत चौटाला के पिता अजय चौटाला राजस्थान से दो बार विधायक रह चुके हैं। चौधरी देवीलाल राजस्थान के सीकर से चुनाव जीतकर देश के उपप्रधानमंत्री बने थे। अब उनके प्रपौत्र दुष्यंत और दिग्विजय पुरानी सियासी जड़ों को जिंदा करने के लिए राजस्थान का रुख कर रहे हैं। जननायक जनता पार्टी ने पिछले विधानसभा चुनाव में हरियाणा में दस सीटें जीती। बाद में बीजेपी के साथ गठबंधन कर सरकार में अजय चौटाला के बेटे दुष्यंत उप मुख्यमंत्री बन गए। अब दुष्यंत अपने छोटे भाई दिग्विजय को राजस्थान में सक्रिय कर अपनी पार्टी का संगठन खड़ा करना चाहते हैं।
बालिका हितैषी गणितज्ञ
राजस्थान में झुंझुनू जिले के डॉ. घासीराम वर्मा का नाम पूरे राजस्थान में प्रसिद्ध है। हर कोई जानता है कि वो अब तक बेटियों की शिक्षा पर करोड़ों रुपए खर्च कर चुके हैं। जाने-माने गणितज्ञ डॉ. घासीराम वर्मा ९५ साल में से ६४ साल अमेरिका में नौकरी करते रहे। अब स्थायी रूप से झुंझुनू में रहने लगे हैं। उन्हें पेंशन डॉलर में मिलती है, जिसे वो बेटियों की शिक्षा पर खर्च करते हैं। डॉ. वर्मा कहते हैं कि उन्हें अपनी पत्नी रुक्मिणी देवी के साथ रहने पर सुख की उतनी ही अनुभूति होती है, जो अमेरिका में अपने बेटे-बहू और पोते-पोतियों के साथ थी। उनकी याददाश्त आज भी पहले जैसी ही है। उनका कहना है कि व्यक्ति ने जीवन में देना सीख लिया तो उसे लेने की आवश्यकता नहीं रहती। इसी का जीता जागता उदाहरण है कि वे न तो अपने बेटों को रुपए देते हैं और न ही उनसे लेते हैं। उन्हें हर साल पेंशन व नियमित निवेश से करीब ६८ लाख रुपए मिलते हैं। इनमें से ५० लाख रुपए वे हर साल बालिका शिक्षा पर खर्च करते हैं। खास बात ये है कि वे किसी की कोई व्यक्तिगत मदद नहीं करते हैं, बल्कि बालिका शिक्षा के लिए ही राशि खर्च करते हैं।

हाईटेक बनेगा स्टेशन
रेलवे अब बढ़ते यात्री भार को ध्यान में रखते हुए पांच सौ करोड़ रुपए की लागत से जोधपुर में नया रेलवे स्टेशन बनवाने जा रही है। जहां पहुंचकर रेल यात्रियों को न सिर्फ एयरपोर्ट जैसी फीलिंग होगी, बल्कि वहां सभी अत्याधुनिक सुविधाएं मिलेंगी, जिससे उन्हें अपनी यात्रा का सुखद अहसास होगा। उत्तर-पश्चिम रेलवे के सिटी स्टेशन की सूरत पूरी तरह से बदलने के लिए रेलवे की पूरी तैयारी है। खुद रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव यह चाहते हैं कि उनके गृहनगर जोधपुर सिटी रेलवे स्टेशन की बहुद्देश्यीय, बहुमंजिला और अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस नई इमारत का जल्द से जल्द निर्माण हो। इस संबंध में जोधपुर डीआरएम गीतिका पांडेय का कहना है कि सिटी रेलवे स्टेशन के पुनर्विकास का कार्य स्वीकृत हो चुका है। इसकी टेंडर प्रक्रिया भी प्रारंभ हो रही है। स्टेशन को ग्रीन बिल्डिंग का रूप दिया जाएगा, जहां वेंटिलेशन आदि की पर्याप्त व्यवस्था होगी। स्टेशन पर एक्सेस कंट्रोल गेट तथा बाहर निकलने और भीतर प्रवेश करने के लिए अलग-अलग गेट बनाए जाएंगे, जिससे सैकड़ों यात्री एक साथ आवागमन कर सकेंगे।

अनोखा रक्षाबंधन
राजसमंद जिले के निर्मल ग्राम पंचायत पिपलांत्री में बेटियां पेड़ पौधों को राखी बांधकर अनोखा रक्षाबंधन पर्व मनाती हैं और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देती हैं। पिपलांत्री पंचायत में बेटी के जन्म होने पर १११ पौधे लगाए जाते हैं, जिनका बेटी और उसका परिवार न सिर्फ देखभाल करता है, बल्कि अपने परिवार का सदस्य मानकर राखी बांधकर दुनिया को बेटी जल जंगल और पर्यावरण बचाने का संदेश देती हैं। पिपलांत्री पंचायत की ओर से पंचायत में बेटी का जन्म होने पर उसके नाम से एफडी की जाती है, जो १८ साल बाद परिपक्व होने पर उसे दी जाती है। इस कार्यक्रम में शिरकत करने के लिए यूनाइटेड नेशंस के कंट्री कोऑर्डिनेटर शोंबी शार्प भी पहुंचे और उन्होंने अपनी विशिष्ट टीम के साथ इको प्रâेंडली रक्षाबंधन में भागीदारी निभाई।

(लेखक राजस्थान सरकार से मान्यता प्राप्त स्वतंत्र पत्रकार हैं। इनके लेख देश के कई समाचार पत्रों में प्रकाशित होते रहते हैं।)

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