मुख्यपृष्ठस्तंभअंदर की बात: निशाने पर गजेंद्र सिंह

अंदर की बात: निशाने पर गजेंद्र सिंह

रमेश सर्ऱाफ धमोरा / झुंझुनू। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत पर लगातार हमलावर हैं। गहलोत ने शेखावत को निशाने पर लेते हुए ट्वीट कर लिखा कि हमारी मंशा है कि पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना का काम शीघ्र पूरा हो, जिससे पूर्वी राजस्थान के १३ जिलों को पेयजल व सिंचाई का पानी मिल सके। प्रदेश सरकार ने इस पर अभी तक करीब १,००० करोड़ रुपए व्यय किए हैं एवं इस बजट में ९,६०० करोड़ रुपए प्रस्तावित किए हैं। गहलोत ने कहा राज्य सरकार के सीमित संसाधनों से इस परियोजना को पूरा होने में १५ साल लग जाएंगे एवं परियोजना की लागत भी बढ़ती जाएगी। केंद्र सरकार यदि इसे राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा देती है तो वहां से ग्रांट मिलने पर काम भी तेजी से पूरा होगा एवं कम लागत में काम हो सकेगा। मुख्यमंत्री ने कहा यह समझ से परे है कि राजस्थान जैसे रेगिस्तानी एवं जल अभावग्रस्त राज्य को पानी की परियोजना को नेशनल प्रोजेक्ट का दर्जा नहीं मिलेगा तो किस राज्य को मिलेगा? यह स्थिति तो तब है जब यहां के सांसद गजेंद्र सिंह शेखावत ही जलशक्ति मंत्री हैं, पर वो प्रदेश के लिए कुछ नहीं कर रहे हैं। उनकी राजस्थान की अन्य परियोजनाओं में तो कोई रुचि नहीं है।
पायलट का कद बढ़ेगा
पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट की राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के साथ लंबी मंत्रणा के बाद सियासी हल्कों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। हाल ही में सचिन पायलट ने राहुल गांधी के आवास पर राहुल और प्रियंका गांधी से मुलाकात की। करीब एक घंटे तक पायलट ने राजस्थान और देश के सियासी मुद्दों पर चर्चा की थी। इस मुलाकात को पायलट को संगठन में बड़ी जिम्मेदारी देने से जोड़कर देखा जा रहा है। पायलट की राहुल से मुलाकात में संगठन चुनाव, गुजरात, हिमाचल चुनाव, राजस्थान में सत्ता और संगठन के हालात पर चर्चा हुई है। पार्टी संगठन को मजबूत करके नए वर्कर्स और यूथ को पार्टी से जोड़ने के रोडमैप पर भी बात हुई है। पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में पायलट ने स्टार प्रचारक के तौर पर पार्टी का प्रचार किया था। कांग्रेस की लगातार हार और कई नेताओं के पार्टी छोड़कर जाने के बाद सेकंड लेवल पर जनाधार वाले तेज-तर्रार नेताओं की किल्लत है। सचिन पायलट की यूथ के अलावा हर एज ग्रुप में अच्छी पैâन फॉलोइंग है। पब्लिक पर्सेप्शन को कांग्रेस के पक्ष में करने के लिए सचिन पायलट एक बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। इसलिए हाईकमान पायलट को बड़ी जिम्मेदारी दे सकता है।
दोष मुक्त हुईं मेयर
सुप्रीम कोर्ट से राहत मिलने के बाद जयपुर के अधीनस्थ कोर्ट से भी महापौर सौम्या गुर्जर को बड़ी राहत मिल गई है। कोर्ट ने मेयर सौम्या गुर्जर को दोषमुक्त करार दिया है। पिछले साल ६ जून को ग्रेटर नगर निगम के कमिश्नर यज्ञमित्र सिंह देव के साथ मारपीट और दुर्व्यवहार मामले में ज्योति नगर थाने में चार पार्षदों अजय सिंह, पारस जैन, शंकर शर्मा और रामकिशोर के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई थी। पुलिस ने इस मामले में महापौर सौम्या गुर्जर को भी दोषी मानते हुए चालान पेश कर दिया था। इसी प्रकरण में सौम्या गुर्जर को उनके आचरण के आधार पर दोषी मानते हुए राज्य सरकार ने उन्हें महापौर पद से निलंबित कर दिया था और शीलधाभाई को कार्यवाहक महापौर नियुक्त कर दिया था। १ फरवरी, २०२२ को सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार के निलंबन के पैâसले पर रोक लगा दी थी। इस कारण २ फरवरी को सौम्या गुर्जर ने एक बार फिर से महापौर का पदभार ग्रहण कर लिया था। २ अप्रैल को करौली में हुई हिंसा मामले में जयपुर ग्रेटर महापौर सौम्या गुर्जर के पति राजाराम गुर्जर को पुलिस ने आरोपी माना है। दंगों में नाम सामने आने के बाद से वे फरार हैं।
जयपुर में बनेगा कोचिंग हब
राजस्थान के युवाओं के लिए बड़ी खुशखबरी है। राजस्थान के अलग-अलग इलाकों से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने के लिए जयपुर आनेवाले युवाओं के लिए अशोक गहलोत सरकार प्रतापनगर में प्रदेश का सबसे बड़ा कोचिंग हब बना रही है, इससे जयपुर के सभी कोचिंग संस्थान एक ही जगह आ जाएंगे और युवाओं को जगह-जगह नहीं भटकना पड़ेगा। उम्मीद जताई जा रही है कि अगले साल दिसंबर तक यह हब पूरा बनकर तैयार हो जाएगा। अगले दो महीनों बाद यहां ऑक्शन और आंवटन की प्रक्रिया पूरी की जा सकती है। बोर्ड की ओर से तैयार कराए जा रहे इस कोचिंग हब टॉवर में ५०० वर्गफीट से ६,२०० वर्ग फीट के स्पेस डिजाइन के टॉवर्स का निर्माण किया जाएगा। यहां ९० शोरूम भी बनकर तैयार हो गए हैं। हाउसिंग बोर्ड कमीश्नर पवन अरोड़ा का कहना है कि आगामी डेढ़ महीने में कोचिंग संस्थानों को जगह आवंटन की प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद है। हाउसिंग बोर्ड के इस प्रोजेक्ट में करीब तीन सौ करोड़ रुपए का खर्च किया जाना प्रस्तावित है। इससे बोर्ड को ४५० करोड़ रुपए मिलने का अनुमान है। कोचिंग संचालक अपनी सुविधा के अनुसार स्पेस को उपयोग में ले सकते हैं।

(लेखक राजस्थान सरकार से मान्यता प्राप्त स्वतंत्र पत्रकार हैं। इनके लेख देश के कई समाचार पत्रों में प्रकाशित होते रहते हैं।)

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