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नाराजगी सिर्फ बहाना है- करोड़ों के फंड के लिए ‘गद्दार’ बने पूर्व नगरसेवक!

सामना संवाददाता / मुंबई

चुनाव के दौरान टिकट कटने के डर से पार्टी छोड़ने या टिकट पाने के लालच में दलबदल पहले भी होता रहा है लेकिन भ्रष्ट और लालची लोगों को ईडी, सीबीआई, इनकम टैक्स आदि का डर दिखाकर अपने साथ मिलाना और अपनी पार्टी को बड़ा व मजबूत बनाने का भाजपाई सियासी खेल देश की लोकतंत्र की जड़ों को खोखला कर रहा है। महाराष्ट्र में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में विधायकों, सांसदों द्वारा शिवसेना से की गई गद्दारी वाली कहानी अजीत पवार के नेतृत्व में राकांपा में भी दोहराई गई। एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले गुट ने हिंदुत्व और अजीत पवार की दादागीरी के कारण शिवसेना से गद्दारी करने की बात कही थी जबकि अजीत पवार के गुट ने विकास के नाम पर भाजपा का दामन थामा था। लेकिन बाद में उन तमाम गद्दारों की सच्चाई सामने आ गई थी। दोनों ही पार्टी के दलबदलुओं ने पार्टी नेतृत्व पर झूठे व बेबुनियाद आरोप लगाए थे, इसका खुलासा अब तक कई बार हो चुका है। लेकिन फिर शिंदे और भाजपा का जनता की आंखों में धूल झोंकने का प्रयास जारी है। ऐसा कल धारावी और वडाला के पूर्व नगरसेवकों के शिंदे गुट में शामिल होने के मामले में देखने को मिल रहा है। लेकिन सीएम शिंदे के नेतृत्ववाली घाती गुट और कांग्रेस के गद्दार नगरसेवकों के झूठ की पोल उन्हीं के एक साथी नगरसेवक ने खोल दी है।
बता दें कि वर्ष २०२४ में लोकसभा के चुनाव होने हैं। इससे पहले मुंबई मनपा के चुनाव हो सकते हैं। इन दोनों चुनावों को किसी भी कीमत पर भाजपा जीतना चाहती है। शिंदे और अजीत पवार के कारण पहले ही काफी किरकिरी झेल रही भाजपा अब शिंदे के कंधे पर बंदूक रखकर निशाना साध रही है। सीएम शिंदे का गुट अब कांग्रेस, एनसीपी एवं दूसरे दलों के नगरसेवकों को पंड का झांसा देकर डोरे डाल रहा है। जाल में फंसे धारावी व वडाला के कुछ पूर्व नगरसेवक हाल ही में शिंदे गुट में शामिल हुए। इन तमाम पूर्व कांग्रेसी नगरसेवकों ने मुंबई कांग्रेस की अध्यक्ष वर्षा गायकवाड़ पर गंभीर आरोप लगाए। हालांकि, सत्ता पक्ष से मिले ऑफर की जानकारी देते हुए वडाला स्थित वार्ड १७९ के पूर्व नगरसेवक सूफियान वनु ने बताया कि जो भी नगरसेवक गए हैं, वे अपने निजी लाभ के लालच में गए हैं। उनको उनके वार्ड में फंड देने और डीपीडीसी फंड के लिए करीब साढ़े तीन करोड़ तथा जिला नियोजन के लिए ५ करोड़ रुपए का फंड देने का वादा किया गया था। वनु का कहना है कि वडाला से जाने वाले लोगो को फंड एलॉट भी किया गया और पुलिस के दो बॉडी गार्ड मिलने जैसे कई प्रलोभन दिए गए थे। जिसमें फंसे तीन पूर्व कांग्रेसी व एक शिवसेना तथा एक राकांपाई पूर्व नगरसेवक फंस गया। कांग्रेसी पूर्व नगरसेवकों द्वारा वर्षा गायकवाड पर लगाए गए आरोपों को के संबंध में बनु का कहना है कि बागी नगर सेवकों के दावे की पोल इसी से खुल गई है कि शिंदे गुट ने करीब पंद्रह नगर सेवकों पर डोरे डाले थे लेकिन उनके जाल में कांग्रेस के सिर्फ तीन पूर्व नगरसेवक ही फंसे।
गौरतलब हो कि महाराष्ट्र में सीएम एकनाथ शिंदे के नेतृत्ववाली घाती सरकार के अस्तित्व में आने के बाद दूसरे दलों के नेताओं को लालच देने और नही मानने पर ईडी सीबीआई से परेशान करने का भय दिखाकर अपनी तरफ खींचने की सिलसिला तेज हो गया है। इन्हीं प्रयासों के तहत कई पूर्व नगरसेवकों को कांग्रेस से तोड़कर शिंदे गुट में शामिल कराने का प्रयास किया गया। लेकिन सत्ता पक्ष की साजिश पर उस वक्त पानी फिर गया जब कुछ नगर सेवकों ने दबाव में आकर पक्ष बदलने से इनकार कर दिया। शिंदे गुट में जाने वालों की संख्या से अधिक इनकार करनेवालों की संख्या है।

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