मुख्यपृष्ठग्लैमर‘मेरे पास अनिल शर्मा आए ही नहीं!’ -उत्तम सिंह

‘मेरे पास अनिल शर्मा आए ही नहीं!’ -उत्तम सिंह

संगीतकार उत्तम सिंह का काम और नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं है। ‘गदर एक प्रेम कहानी’, ‘बागबान’, ‘पिंजर’, ‘दुश्मन’, ‘दिल तो पागल है’ जैसी कई फिल्मों में उन्होंने बेहतरीन संगीत दिया है। ‘गदर एक प्रेम कहानी’ में बेहतरीन संगीत देनेवाले उत्तम सिंह के दिए गए संगीत को अनिल शर्मा ने ‘गदर-२’ के लिए संगीतकार मिथुन से रिक्रिएट करवाया है। अपनी नाराजगी को शालीनता से प्रकट करनेवाले उत्तम सिंह ‘गदर-२’ की सफलता से बेहद खुश हैं। पेश है, उत्तम सिंह से पूजा सामंत की हुई बातचीत के प्रमुख अंश-

• इन दिनों फिल्म ‘गदर-२’ की सफलता ने धूम मचाई है। क्या आपको ‘गदर’ पार्ट-१ की तरह पार्ट-२ के सफल होने का अंदाजा था?
मैं ‘गदर-२’ को मिली अच्छी कामयाबी से प्रसन्न हूं। आखिर, ‘गदर-१’ का मैं म्यूजिक डायरेक्टर रहा हूं। जब आपके किसी म्यूजिक क्रिएशन पर लोग खुशी से झूम उठते हैं तो संगीतकार का अपनी सफलता पर खुश होना लाजिमी है। यह अलग बात है कि फिल्म ‘गदर-२’ में मेरा म्यूजिक नहीं था। इसके बावजूद मुझे फिल्म की सफलता पर बेहद खुशी है, क्योंकि फिल्म ‘गदर-१’ की सफलता में उसके सभी गीत ‘मैं निकला गड्डी लेके…’ और ‘उड़ जा काले कावां…’ या फिर ‘मुसाफिर जाने वाले…’ गीत हो, इन सभी गीतों को लोग आज २३ वर्षों बाद भी नहीं भूले। नई पीढ़ी भी इन गीतों को आज पसंद कर रही है। ये सभी गीत लोगों की जुबां पर कुछ ऐसे चढ़े कि फिल्म ‘गदर-१’ की सफलता में इन गीतों का बहुत बड़ा योगदान रहा। इसके बावजूद जब फिल्म ‘गदर-२’ बनी तो मैं इस फिल्म का संगीतकार नहीं था, जिसका मुझे दुख होना स्वाभाविक सी बात है।

• अनिल शर्मा ने जब दूसरी बार ‘गदर’ बनाने की प्लानिंग की तो म्यूजिक के लिए आपको क्यों नहीं बुलाया?
अनिल शर्मा ने ‘गदर-२’ की प्लानिंग २०१९ में की होगी। उस समय उन्होंने मुझे फिल्म का म्यूजिक देने के लिए क्यों आमंत्रित नहीं किया, इसका मुझे कोई इल्म नहीं है। हम दोनों के बीच कोई मनमुटाव या कोई अनबन कभी नहीं थी और न है। मेरी जानकारी में यह बात जरूर थी कि अनिल शर्मा ‘गदर-२’ बना रहे हैं, उन्होंने अपने किसी इवेंट में मुझे बुलाया भी लेकिन फिल्म ‘गदर-२’ का संगीत मैं दूं, ऐसा कभी कोई ऑफर उन्होंने मुझे नहीं दिया। मेरे लिए यह ताज्जुब की बात है। खैर, यह उनकी इच्छा, उनकी मर्जी!

• हो सकता है उन्हें आपका पारिश्रमिक ज्यादा लगा हो?
सवाल ही नहीं उठता। जो बंदा क्वॉलिटी काम, क्रिएटिव रचनाएं देता है और अनुभव के मामले में भी सीनियर हो तो उसे अपना पारिश्रमिक मांगने का हक है, जो वो डिजर्व करता है। फिर निर्माता और संगीतकार में पारिश्रमिक को लेकर आपसी सामंजस्य, कुछ समझौते हो सकते हैं, ऐसी गुंजाइश अवश्य बनती है। सिर्फ अपने पारिश्रमिक को लेकर अपने काम से कोई हाथ नहीं धोना चाहता। खैर, लेकिन काम हो या पारिश्रमिक मेरी कोई बातचीत किसी से किसी भी संदर्भ में नहीं हुई। अफसोस है कि ‘गदर-१’ का संगीत मेरा क्रिएशन है, जिसे लोगों ने काफी सराहा। ‘गदर-२’ में भी उन रचनाओं को दोहराया गया लेकिन ‘गदर-२’ के संगीत के लिए मुझे नहीं कहा गया। यकीनन मैं ‘गदर-२’ के लिए भी अच्छे से अच्छी रचनाओं और खूबसूरत धुनों को बनाता। लेकिन मेरे पास अनिल शर्मा आए ही नहीं। मेरे मन में कोई गिला शिकवा नहीं। हां, फिल्म ‘गदर-२’ को आम लोगों ने काफी प्यार दिया, यह उपलब्धि ज्यादा मायने रखती है।

• ८ सितंबर को आशा भोसले अपनी उम्र के ९० पड़ाव पूरा करेंगी। उनके बारे में आप क्या कहना चाहेंगे?
आशा जी के साथ काम करना यह खुशकिस्मती की बात है। संगीत का आरंभ और संगीत के अंत की बात करें तो लता-आशा यह साक्षात दो सरस्वती की बेटियों के गले से निकले स्वर ही संगीत हैं। संगीत की परिभाषा ही लता-आशा के स्वर हैं, आशा जी का साथ पिछले कई वर्षों से मिलता रहा। उनके जैसी वर्सेटाइल गायिका मैंने अपनी जिंदगी में कभी नहीं देखी, न आगे कभी देखने की उम्मीद है। बड़ी जद्दोजहद, काफी संघर्ष के बाद उन्होंने निरंतर प्रगति की है। आशा जी यानी साक्षात् चैतन्य, उत्साह, निर्मलता और संगीत का झरना। जन्मदिन पर उन्हें मेरी लख लख बधाइयां!

• आपके फिल्मी करियर को भी ६० वर्ष हो पूरे हो चुके हैं। वैâसा रहा आपका सफर?
मैंने जिन फिल्मों का म्यूजिक दिया, उन सभी फिल्मों का संगीत काफी हिट रहा। फिर चाहे वो ‘यशराज फिल्मस’ की ‘दिल तो पागल है’ हो या ‘गदर-१’ हो या ‘हम तुम पे मरते हैं’ जैसी फिल्में हों। मैंने अपने दौर में काफी सिस्टमैटिक काम किया है। मुझे अपने फिल्म संगीत पर संतुष्टि है।

• आपके द्वारा काम कम करने की क्या वजह रही?
मैं फिल्म का संगीत ऑर्केस्ट्रा के साथ करता आया हूं। की-बोर्ड पियानो पर काम करने का आदी नहीं हूं। मैं अपने काम में गुणवत्ता चाहता हूं और मैंने अपने उसूलों पर काम किया है। दो वक्त की रोटी वाहे गुरु की कृपा से मिल रही है, लेकिन अपने उसूलों से मैं समझौता नहीं करना चाहता। आज तक मैंने काम पाने के लिए किसी निर्माता-निर्देशक, प्रोडक्शन हाउस को कभी फोन नहीं किया और न आगे करूंगा। मेरे पास टैलेंट है। मैं हां जी, हां जी नहीं कर सकता।

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