मुख्यपृष्ठनए समाचारचंद्रयान-३ की एक और उपलब्धि! ...विक्रम लैंडर ने चंद्रयान-२ के ऑर्बिटर से...

चंद्रयान-३ की एक और उपलब्धि! …विक्रम लैंडर ने चंद्रयान-२ के ऑर्बिटर से किया संपर्क

सामना संवाददाता / नई दिल्ली
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन द्वारा केंद्र श्री हरिकोटा से १४ जुलाई को चंद्रयान-३ मिशन लॉन्च किया गया। चंद्रयान-३ धीरे-धीरे अपने अंतिम गंतव्य की तरफ बढ़ रहा है, वो चंद्रमा से बस कुछ ही दिन दूर है। २३ अगस्त को चंद्रयान-३ के चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सॉफ्ट लैंडिंग करने की उम्मीद है। इस चंद्रयान ने एक और उपलब्धि हासिल की है। इसरो ने कल बताया कि उसने चंद्रयान-२ मिशन के ऑर्बिटर और चंद्रयान-३ के लैंडर के बीच संपर्क स्थापित कर दिया है। टु-वे कम्युनिकेशन के स्थापित होने के बाद ऑर्बिटर ने लैंडर से कहा- `स्वागत है दोस्त!’
चंद्रयान-१ और चंद्रयान-२ मिशन के प्रोजेक्ट डायरेक्टर रहे एम. अन्नादुरई के मुताबिक, २३ अगस्त की शाम को चंद्रयान-३ के लैंडर को २५ किमी की ऊंचाई से चांद की सतह तक पहुंचने में १५ से २० मिनट लगेंगे। यही समय सबसे क्रिटिकल होने वाला है। इसके बाद विक्रम लैंडर से रैंप के जरिए छह पहियों वाला प्रज्ञान रोवर बाहर आएगा और इसरो से कमांड मिलते ही चांद की सतह पर चलेगा। इस दौरान इसके पहिए चांद की मिट्‌टी पर भारत के राष्ट्रीय चिह्न अशोक स्तंभ और इसरो के लोगो की छाप छोड़ेंगे।
सब कुछ फेल हो जाए, तब भी विक्रम लैंड करेगा
इसरो चेयरमैन एस सोमनाथ ने ९ अगस्त को विक्रम की लैंडिंग को लेकर कहा था- `अगर सब कुछ फेल हो जाता है, अगर सभी सेंसर फेल हो जाते हैं, कुछ भी काम नहीं करता है, फिर भी यह (विक्रम) लैंडिंग करेगा बशर्ते एल्गोरिदम ठीक से काम करें। हमने यह भी सुनिश्चित किया है कि अगर इस बार विक्रम के दो इंजन काम नहीं करेंगे, तब भी यह लैंडिंग में सक्षम होगा।’

विक्रम लैंडर ने भेजे चांद के नए फोटो
इसी बीच खबर आ रही है कि चंद्रयान-३ यानी विक्रम लैंडर चांद के नए फोटो भेजे हैं। इसरो ने चंद्रमा की फार साइड यानी ऐसा इलाका जो पृथ्वी से कभी नहीं दिखता, उसकी तस्वीरें शेयर की हैं। इसे चंद्रयान-३ में लगे लैंडर हैजार्ड डिटेक्शन एंड एवॉयडेंस कैमरे से १९ अगस्त २०२३ को खींचा गया है। यह कैमरा लैंडर को सेफ लैंडिंग एरिया लोकेट करने में मदद करेगा। यानी ऐसा इलाका जहां बड़े पत्थर और गड्ढे न हो।

अन्य समाचार