मुख्यपृष्ठनए समाचारकूनो में एक और चीते की सजी चिता! ... अब तक नौ की...

कूनो में एक और चीते की सजी चिता! … अब तक नौ की हो चुकी है मौत

• बेशर्म सरकार कोर्ट में बोली, स्थिति चिंताजनक नहीं

सामना संवाददाता / नई दिल्ली
कूनो नेशनल पार्क में कल एक और चीते की ‘चिता’ सज गई। इस तरह अब तक ९ चीतों की मौत हो चुकी है। इनमें तीन शावक भी शामिल हैं। कल एक मादा चीते की मौत हुई है, जबकि इस मामले में बेशर्म केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा पेश कर कहा है कि कूनो में स्थिति चिंताजनक नहीं है।
बता दें कि मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में बुधवार सुबह मादा चीता ‘धात्री’ मृत पाई गई। अधिकारी मौत का कारण निर्धारित करने के लिए शव परीक्षण कर रहे हैं। कूनो नेशनल पार्क में चीतों की मौत का सिलसिला जारी है, जहां प्रोजेक्ट चीता नामक एक महत्वाकांक्षी पहल के हिस्से के रूप में दक्षिण अप्रâीका और नामीबिया से २० चीतों को आयात किया गया था। इस परियोजना का लक्ष्य देश में लगभग सात दशक पहले विलुप्त हो चुके चीतों को फिर से जीवित करना है।
बिना तैयारी लाए गए चीते
कूनो नेशनल पार्क में चीतों की मौत पर केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपना जवाब दाखिल कर दिया है। केंद्र ने अपने हलफनामे में दावा किया है कि चीतों की मौत चिंता का विषय नहीं है। २०२२ में प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर चीतों को दक्षिण अप्रâीका के नामीबिया से मध्य प्रदेश के कूनो लाया गया था। इस पार्क में २० चीतों को लाया गया था। हालांकि, शुरुआत में इन चीतों को घूमते हुए देखा गया था, लेकिन पिछले पांच महीनों में इनमें से ९ चीतों की मौत हो चुकी है। इस मौत से वन विभाग सदमे में है और इसे लेकर केंद्र सरकार की आलोचना भी हो रही है। जानकारों का कहना है कि सरकार ने बिना पर्याप्त तैयारी के चीतों को लाने की योजना बनाई, जिससे चीतों की मौत हो रही है।

घायल मिला था ‘तेजस’
श्योपुर स्थित कूनो नेशनल पार्क में २६ जून को ‘सूरज’ चीता को देर शाम बड़े बाड़े से खुले जंगल में आजाद कर दिया गया था। सूरज १०वां चीता था, जो कूनो नेशनल पार्क के खुले जंगल में छोड़ा गया था। साउथ अप्रâीका से लाए गए और बाड़े नंबर ६ में रखे गए नर चीता ‘तेजस’ की मौत भी मौत ११ जुलाई को हो गई थी। यह चीता कूनो पार्क प्रबंधन की मॉनिटरिंग के दौरान घायल अवस्था में मिला था। तेजस की गर्दन के ऊपरी हिस्से में चोट के निशान देखे गए थे। कूनो नेशनल पार्क में अब तक ६ चीतों और ३ शावकों की मौत हो चुकी है।

ये हैं चीतों की मौत के कारण
विशेषज्ञों ने कूनो में चीतों की मौतों के पीछे कई कारण बताए गए हैं। कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि जानवरों की लड़ाई, बीमारी, दुर्घटनाएं और शिकार में चोटें संभावित कारण हैं। अन्य जानवरों द्वारा हिंसक हमले और हीटस्ट्रोक को भी संभावित कारणों के रूप में बताया गया है। चीतों पर रेडियो कॉलर लगाने पर भी विवाद है। इस बीच कूनो नेशनल पार्क में चीतों की मौत पर केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपना जवाब दाखिल कर दिया है। केंद्र ने अपने हलफनामे में दावा किया है कि चीतों की मौत चिंता का विषय नहीं है।

अन्य समाचार