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ठाणे मनपा में एक और भ्रष्टाचार, प्रशासन ने किया ‘शिंदे’ विधायक को भूखंड अलॉट! … प्रताप सरनाईक का बड़ा घोटाला

सामना संवाददाता / ठाणे
ईडी की कार्रवाई झेल चुके शिंदे गुट के विधायक प्रताप सरनाईक की संस्था को अवैध रूप से शैक्षणिक भूखंड सौंपने का खुलासा हुआ है। दरअसल, ठाणे शहर में विकास योजना के अंतर्गत आरक्षित भूखंडों को शैक्षणिक नीति के तहत निजी संस्थानों को देने का निर्णय लिया गया था। लेकिन मनपा प्रशासन ने मनपा के ट्रस्टी पार्षदों की संस्थाओं को अवैध रूप से भूखंड आवंटित किया है। ऐसे में ठाणे मनपा में एक और बड़ा घोटाला किए जाने की चर्चा होने लगी है।
बता दें कि वर्ष २०१४ की महासभा में शैक्षणिक भूखंड निजी संस्थाओं को देकर शैक्षणिक संस्थाए शुरू करने का निर्णय लिया गया था। प्राप्त जानकारी के अनुसार, ‘सिद्धेश चैरिटेबल ट्रस्ट-कासरवडवली’ के अध्यक्ष विधायक प्रताप सरनाईक हैं और उनकी पत्नी परीशा सरनाईक इस संस्था की नगरसेविका और ट्रस्टी हैं। यह भूखंड २०१७ में अवैध रूप से उनकी संस्था को आवंटित किया गया है। इसी तरह से कई नगरसेवकों की संस्थाओं को शैक्षणिक भूखंड आवंटित किए गए हैं। इस मामले की गहनता से जांच की जाए तो शैक्षणिक भूखंड आवंटन में हुए बड़े घोटाले का खुलासा हो सकता है। दिलचस्प बात यह है कि भूखंड आवंटन के आठ साल बाद भी ये शिक्षा संस्थान अभी तक शुरू नहीं हुए हैं। इससे छात्रों की शैक्षणिक क्षति के साथ-साथ मनपा प्रशासन को करोड़ों का नुकसान हुआ है। ऐसे में आरक्षित भूखंड के इस ‘श्रीखंड’ को चुराने की योजना किसकी है, यह सवाल उठने लगा है।
टेंडर प्रक्रिया को किया दरकिनार!
सिद्धेश चैरिटेबल ट्रस्ट ने मनपा प्रशासन को पाचपाखड़ी क्षेत्र में ३,३०० वर्ग मीटर का प्लॉट देने का अनुरोध किया था। फिर इस संस्था को कासरवडवली में ५,६८४ वर्ग मीटर का प्लॉट देने का निर्णय मनपा ने लिया। इन भूखंडों को स्थानीय शिक्षा संस्थानों को ५० से ५५ प्रतिशत और अन्य संस्थानों को ३६ से ५० प्रतिशत की रियायती दरों पर देने की मनपा की नीति है। नेताओं की मिलीभगत से इसका उल्लंघन करते हुए पाचपाखड़ी में प्लॉट सिद्धेश चैरिटेबल ट्रस्ट को दे दिया गया। हालांकि, इस जगह पर अतिक्रमण के चलते प्रशासन ने कासरवडवली में पुन: प्लॉट दे दिया था। प्रशासन ने नियमानुसार टेंडर प्रक्रिया को दरकिनार कर यह विवादित प्रस्ताव आगे बढ़ाया था।

इन संस्थाओं को आवंटित हुआ प्लॉट
स्थानीय निजी संस्थाओं जैसे युवा कल्याण समिति, एमईएससीओ, शारदा, एक्सेलसियर एजुकेशन सोसाइटी के साथ-साथ जगदाले फाउंडेशन (पूर्व में गणेश सेवा ट्रस्ट), सिद्धेश चैरिटेबल ट्रस्ट, गोपालराव पाटील और आनंदी लाल और गणेश पोद्दार जैसे गैर-स्थानीय संस्थाओं को भूखंड वितरण किया गया है। चूंकि इनमें से अधिकांश संस्थाएं तत्कालीन नगरसेवकों की हैं, इसलिए यह सवाल उठता है कि मनपा के ट्रस्टी नगरसेवकों की संस्थाओं को शैक्षणिक भूखंड वैâसे आवंटित किए गए?

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