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मणिपुर में एक और घृणित गैंगरेप!, जान बचाकर भागती महिला हैवानों ने नोचा, ३७ वर्षीया पीडिता ने कराया मामला दर्ज

सामना संवाददाता / नई दिल्ली
मणिपुर में अभी दो महिलाओं के गैंगरेप और निर्वस्त्र घुमाने का मामला शांत भी नहीं हुआ है कि एक और घृणित गैंगरेप का मामला सामने आया है। अब एक और महिला ने सामने आकर अपने साथ हुए गैंगरेप की शिकायत दर्ज कराई है। गत मई महीने की शुरुआत में जब मणिपुर में सांप्रदायिक झड़प शुरू हुई थी, उसी दौरान यह गैंगरेप हुआ था। यह घटना ३ मई की है। उसी दिन मैतेयी लोगों ने अनुसूचित जनजाति श्रेणी में शामिल करने की मांग को लेकर मार्च निकाला था, जिसके बाद जिले में हिंसा भड़क गई।

पीड़िता ने बताया, ‘मैंने अपनी और अपने परिवार की प्रतिष्ठा बचाने और सामाजिक अपमान से बचने के लिए घटना का खुलासा नहीं किया। इस घटना के बाद मैं अक्सर सोचती थी कि मुझे आत्महत्या कर लेनी चाहिए।’ उसका बयान बुधवार को विष्णुपुर पुलिस स्टेशन में दर्ज ‘एफआईआर’ के साथ संलग्न है। एफआईआर के मुताबिक, ३ मई की शाम ६.३० बजे बदमाशों ने महिला और उसके पड़ोसियों के घरों को जलाना शुरू कर दिया, जिसके बाद वह, उसके दो बेटे, भतीजी और भाभी अपनी जान बचाकर भागी। महिला ने कहा, ‘मैंने अपनी भतीजी को अपनी पीठ पर बिठाया, अपने दोनों बच्चों को उठाया और अपनी भाभी के साथ भागी। वह भी अपनी पीठ पर एक बच्चे को लेकर मेरे आगे-आगे दौड़ रही थी। फिर मैं लड़खड़ा कर गिर पड़ी। सड़क पर थी और उठ नहीं पा रही थी। मेरी भाभी दौड़ती हुई मेरे पास आई और उसने मेरी भतीजी को मेरी पीठ से उठा लिया और मेरी मिन्नतों के बाद मेरे आग्रह करने पर वह मेरे दोनों बच्चों के साथ आगे बढ़ी। तभी कुछ पांच-छह बदमाशों ने मुझे पकड़ लिया, गाली-गलौज और पिटाई शुरू कर दी। इसके बाद पुरुषों ने उसका यौन उत्पीड़न करना शुरू कर दिया।’ महिला ने बताया कि उसकी तबीयत पूरी तरह से खराब हो गई थी और उसने आत्महत्या करने की भी सोची थी। वह राज्य की राजधानी इंफाल में क्षेत्रीय आयुर्विज्ञान संस्थान गई थी, लेकिन बिना डॉक्टर को दिखाए लौट आई क्योंकि वह खुद को ‘बता’ भी नहीं पा रही थी। उन्होंने बताया कि इसके बाद तबीयत बिगड़ने पर वह मंगलवार को इंफाल के जेएनआईएमएस अस्पताल गई। वहां डॉक्टरों ने उसका इलाज और परामर्श दिया और उसे पुलिस को सूचित करने को कहा।

बलात्कारियों को कड़ी सजा मिले
पीड़ित महिला ने कहा, , ‘मुझे प्रताड़ित करने, यौन और शारीरिक उत्पीड़न करनेवाले अपराधियों के गिरोह को कड़ी सजा दी जानी चाहिए।’

भविष्य के लिए संघर्ष कर रहे हैं छात्र
हिंसा प्रभावि‍त मणि‍पुर के छात्र अपने भविष्य के लिए कड़ा संघर्ष कर रहे हैं। मणिपुर विश्वविद्यालय की सेमेस्टर परीक्षाओं में शामिल कई छात्रों ने कहा कि बम धमाकों, इंटरनेट बैन और राहत शिविर में डर के साये में परीक्षा की तैयारी करना बड़ी कठिन चुनौती है। मगर उनके पास कोई दूसरा विकल्प नहीं है।

 

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