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उत्तर की बात :  दलित और मुस्लिम वोटरों पर कांग्रेस की खास नजर

राजेश माहेश्वरी लखनऊ

उत्तर प्रदेश में लोकसभा चुनाव को लेकर अब राजनीतिक दल चुनावी मोड में आ गया है। अब प्रदेश में चुनाव की तैयारियों की सुगबुगाहट तेज हो गई है। भाजपा अपने परंपरागत वोटरों को सहेजने के लिए लगातार अभियान चला रही है। सपा पीडीए के अपने फॉर्मूले के तहत आगे बढ़ रही है। बसपा इस समय खामोश है। कांग्रेस और राष्ट्रीय लोकदल भी अपनी तैयारियों में जुटे हैं। असल में कांग्रेस यूपी में अपनी खोई जमीन और प्रतिष्ठा को पुन: वापस पाना चाहती है। आज प्रदेश की राजनीति में भाजपा के अलावा अन्य दलों का जो वोट बैंक है, वो किसी जमाने में कांग्रेस का पक्का वोट बैंक हुआ करता था। दलित-मुस्लिम वोट बैंक को साधने में जुटी कांग्रेस खास रणनीति के तहत अपने कदम बढ़ाती नजर आ रही है।
प्रदेश के अनुसूचित जाति बाहुल्य गांवों में दलित गौरव संवाद चौपाल लगा रही है। चौपाल के जरिए जनता के बीच पहुंचने की तैयारी कांग्रेस ने कर ली है। प्रदेश की राजनीति में भाजपा के मजबूती के साथ खड़े होने में दलित वोटरों का अहम योगदान है। ऐसे में अब दलित वोटर बसपा और भाजपा दो धड़ों में बंट गए हैं। ऐसे में कांग्रेस दलित वोटरों खासकर बसपा के वोट बैंक की तरफ आशाभरी निगाहों से देख रही है।
दलित मतदाताओं के साथ ही साथ लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस प्रदेश में मुस्लिम मतदाताओं में अपनी पकड़ बढ़ाने के लिए एक माह का विशेष अभियान चलाएगी। इसके तहत मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में कांग्रेसी चाय की दुकानों पर राहुल गांधी व प्रियंका वाड्रा के पोस्टर लगाकर चौपाल भी सजाएंगे। बीते दिनों प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने पार्टी के अल्पसंख्यक विभाग के नेताओं के साथ बैठक कर विशेष अभियान का एजेंडा तय किया।
पार्टी की योजना यह है कि आगामी दिसंबर माह के अंत तक पूरे प्रदेश में मुस्लिम बहुल बूथ की कमेटियां बना ली जाएंगी। बैठक में तय हुआ कि छह से ११ नवंबर के मध्य पूरे प्रदेश में `चाय के साथ कांग्रेस की बात’ अभियान चलेगा। इसके तहत प्रतिदिन शहर कमेटी मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में १०-१० चाय की दुकानों में लोगों को जुटाकर चर्चा करेगी। बीती सात नवंबर को बहादुर शाह जफर की पुण्यतिथि पर हर जिले में उनके चित्र पर माल्यार्पण का कार्यक्रम पार्टी द्वारा आयोजित किया गया। मुस्लिम वोटरों का वोट अपने पक्ष में करने के लिए कांग्रेस पार्टी आगामी नौ नवंबर को अंतर्राष्ट्रीय उर्दू दिवस पर कांग्रेस विख्यात शायर मोहम्मद इकबाल की जयंती को मदरसों में `सारे जहां से अच्छा’ गीत का सामूहिक गायन आयोजित कर मनाएगी, वहीं ११ नवंबर को मौलाना अबुल कलाम आजाद की जयंती के अवसर पर हर जिले में २५ मदरसा शिक्षकों को कांग्रेसी उनके घर जाकर प्रशस्तिपत्र भेंट कर सम्मानित करेंगे। १४ नवंबर को `आधुनिक भारत के निर्माता पंडित नेहरू’ विषय पर भाषण प्रतियोगिता व २२ से २६ नवंबर के मध्य चाय की दुकानों पर संविधान की प्रस्तावना से समाजवादी व सेकुलर शब्द हटाए जाने के प्रयासों के विरुद्ध जागरूकता अभियान चलेगा। २४ नवंबर को असम की पूर्व मुख्यमंत्री सैयदा अनवरा तैमूर की जयंती मनाने के बाद २६ नवंबर को संविधान दिवस के अवसर पर हर जिले में १० मदरसों में संविधान की प्रस्तावना का संकल्प दिलाया जाएगा। पार्टी की ओर से कार्यकर्ताओं को यह मैसेज दिया गया है कि वे सभी ८० सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी करें। हर मुस्लिम बहुल बूथ पर कमेटी बनाकर ११ कार्यकर्ताओं की तैनाती का निर्देश भी दिया गया है। वो अलग बात है कि लोकसभा चुनाव में विपक्षी गठबंधन में सीटों का बंटवारा शीर्ष नेतृत्व तय करेगा।
बीते अक्टूबर को पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रभावशाली मुस्लिम नेता इमरान मसूद को दोबारा कांग्रेस में शामिल किया गया। २०२२ के विधानसभा चुनाव से पहले इमरान ने कांग्रेस छोड़ दी थी। इसके बाद मसूद सपा में चले गए थे, लेकिन वहां भी वे ज्यादा दिन तक नहीं रहे और फिर बसपा में चले गए थे। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी की तारीफ करने पर हाल ही में बसपा सुप्रीमो और यूपी की पूर्व सीएम मायावती ने अनुशासनहीनता के आरोप में उन्हें पार्टी से निकाल दिया था। मुस्लिम वोटों की खातिर ही इमरान को पार्टी में दोबारा शामिल किया गया है। भाजपा के विजय रथ को रोकने के लिए प्रदेश में कांग्रेस, सपा और रालोद इंडिया गठबंधन का हिस्सा हैं। बसपा अभी इस गठबंधन से बाहर है। प्रदेश में अपना वर्चस्व कायम करने के लिए सभी दल अपने-अपने तरीके से आगे बढ़ रहे हैं। अब यह देखना अहम होगा कि कांग्रेस के तमाम प्रयासों का दलित और मुस्लिम वोटरों पर कितना असर होगा।
(लेखक स्वतंत्र पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक हैं)

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