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अंतर्वेग : हिट एंड रन मामला: बेटे की मौत का सबूत ढूंढ़ रहा है बाप

जितेंद्र मल्लाह

सड़क पर चलनेवालों की सुरक्षा का ख्याल रखना वाहन चालकों की प्रमुख जिम्मेदारी होती है। दुर्भाग्य से कोई हादसा हो भी जाता है तो हादसे में घायल व्यक्ति को जल्द से जल्द इलाज उपलब्ध हो यह सुनिश्चित कराना हादसे के जिम्मेदार वाहन चालक का पहला कर्तव्य होता है लेकिन प्राय: वाहन चालक हादसे के बाद हादसाग्रस्त व्यक्ति को दुर्घटनास्थल पर तड़पता छोड़कर मौके से भागने का प्रयास करते हैं। नतीजतन, समय पर इलाज न मिलने से घायल व्यक्ति की मौत हो जाती है। ऐसे ज्यादातर मामलों में पुलिस आरोपी वाहन चालक को ढूंढ़ने के बजाय हाथ पर हाथ धरे बैठी रहती है। ऐसी ही एक घटना ४ अक्टूबर को बोरिवली-पूर्व स्थित मागाठणे सिग्नल के पास घटी थी, जहां अंधेरी से बोरिवली स्थित घर की ओर जा रहे २६ वर्षीय हरनेक सिंह सैनी की स्कूटर को पीछे से किसी अज्ञात वाहन ने जोरदार ठोकर मार दी। बताया जा रहा है कि हादसे के बाद हरनेक सिंह मौके पर ही जख्मी अवस्था में छटपटाता रहा, लेकिन हादसे के जिम्मेदार वाहन चालक वाहन सहित मौके से फरार हो गया। इस मामले में कस्तूरबा मार्ग पुलिस ने एफआईआर तो दर्ज की है लेकिन आरोपी वाहन चालक को ढूंढ़ने में पुलिस कोई खास दिलचस्पी नहीं दिखा रही है, ऐसा आरोप मृतक हरनेक सिंह के परिजन लगा रहे हैं। ऐसे में हरनेक सिंह के परिजन दोषी वाहन चालक को खुद ही ढूंढ़ने का प्रयास कर रहे हैं। वे कस्तूरबा मार्ग पुलिस थाने व ट्रैफिक पुलिस के अधिकारियों से लगातार गुहार लगा रहे हैं लेकिन उन्हें पुलिस अधिकारियों से सीसीटीवी फुटेज या अन्य किसी भी तरह का सहयोग अब नहीं मिल सका है, ऐसी जानकारी पीड़ित परिवार ने दोपहर का सामना संवाददाता को दी।
बीमे के लिए भिखारी का शिकार!
लालच अक्सर इंसान को हैवान बना देता है। कई बार पैसों के लिए कुछ भी करने को तैयार हो जाते हैं, ऐसी ही एक घटना करीब १७ साल पहले उत्तर प्रदेश के आगरा जिले में घटित हुई थी। जिले में एक भिखारी एक शख्स के लालच का शिकार बन गया था। बताया जा रहा है कि मूल रूप से उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर जिले का रहनेवाले अनिल विजयपाल सिंह ने अमीर बनने के लिए मौत को हथियार बनाया था। उसने तय साजिश के तहत वर्ष २००४ में अपना ८० लाख रुपए का जीवन बीमा कराया था। बीमे की रकम हासिल करने के लिए उसने वर्ष २००६ में एक भिखारी की हत्या कर दी थी। अनिल ने आगरा टोल-टैक्स के पास से एक भिखारी को खाना खिलाने के बहाने अपनी कार में बैठाया और खाने में नींद की गोली मिलाकर बेहोश कर दिया। बाद में उसे अपने कपड़े पहनाकर ड्राइवर की सीट पर बैठा दिया और कार में आग लगा दी। इस साजिश में अनिल के पिता और भाई ने भी अनिल का साथ दिया था। परिजनों ने भिखारी की लाश को अनिल की लाश बता कर बीमे की रकम हासिल कर ली थी। बाद में अनिल ने अपना नाम बदल लिया और अमदाबाद में रहने लगा था। अनिल सिंह ने नए नाम से आधार, पैन सहित तमाम दस्तावेज भी बनवा लिए, लेकिन १७ साल बाद कहीं से अमदाबाद क्राइम ब्रांच को अनिल की टिप लग गई और उसकी जांच में अनिल का राजफाश हो गया।

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