मुख्यपृष्ठअपराधअंतर्वेग : कोठी बनी काल!

अंतर्वेग : कोठी बनी काल!

जितेंद्र मल्लाह

फसाद की जड़ करार दिए गए जर यानी पैसा, जोरू यानी महिला/ पत्नी और जायदाद यानी संपत्ति अपनों को भी दुश्मन बना देता है। ऐसा ही एक सनसनीखेज मामला देश की राजधानी दिल्ली से सटे नोएडा से सामने आया है, जहां सुप्रीम कोर्ट की एक ६१ वर्षीया वरिष्ठ अधिवक्ता रेनू सिन्हा की उन्हीं के घर में हत्या कर दी गई। हैरानी की बात यह है कि कातिल कोई गैर नहीं बल्कि मृत रेनू सिन्हा का वो पति ही निकला, जिसने अधिवक्ता के साथ सात फेरे लेते समय जन्म-जन्मांतर का साथ देने की कसमें खाई होंगी। नोएडा के पॉश इलाके में घटी उक्त हत्या की वारदात को सेक्टर ३० स्थित एक आलीशान कोठी के लिए अंजाम दिए जाने का खुलासा पुलिस की प्राथमिक जांच में हुआ है। बताया जा रहा है कि रेनू के बच्चे अमेरिका में रह रहे थे और उनके पति उक्त कोठी नंबर डी-४० को बेचना चाहते थे, जिसके लिए रेनू तैयार नहीं थीं। इसी बात पर पति-पत्नी के बीच विवाद चल रहा था और इस विवाद की परिणति रेनू की हत्या के रूप में सामने आई। इसका खुलासा तब हुआ जब रेनू के भाई का दो दिनों तक बहन (रेनू) से संपर्क नहीं हो पाया। अनिष्ट की आशंका से ग्रस्त रेनू के भाई की सूचना पर मौके पर पहुंची पुलिस किसी तरह कोठी में दाखिल हुई तो बाथरूम में रेनू मृत अवस्था में मिली। जबकि उनके पति मौके से नदारद थे। मजेदार बात यह भी है कि पुलिस कातिल मानकर रेनू के पति को शहरभर में ढूंढ़ रही थी और वह घर के स्टोर रूम में छिपा मिला।
आत्मघात!
नाजायज संबंधों का अंत हमेशा बुरा ही होता है। इसे प्रमाणित करनेवाली घटनाएं देश और दुनियाभर में हर रोज कहीं न कहीं घटती हैं और इनके बारे में हमें पढ़ने व सुनने को मिल जाता है। फिर भी जिस्मानी जरूरत और क्षणिक आकर्षण के कारण मन में उपजी वासना की संतुष्टि के लिए लोग पतंगे की तरह आग में जलने को स्वयं तत्पर रहते हैं। ऐसी ही एक घटना उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले में घटित हुई है। यहां बरेसर थाना क्षेत्र अंतर्गत एक गांव में रहनेवाला ओमप्रकाश मध्य प्रदेश पुलिस में कांस्टेबल के पद पर कार्यरत है। गांव में दो बच्चों के साथ रह रही उसकी ३५ वर्षीया पत्नी सरिता के करीब दो साल पहले गांव के ही २६ वर्षीय युवक मनोज (तीनों पात्रों के काल्पनिक नाम) से प्रेम संबंध स्थापित हो गए। कई महीनों तक दोनों की `प्रेम लीला’ चोरी-छिपे चलती रही, लेकिन बाद में परिजनों एवं पड़ोसियों को दोनों के बीच पक रही खिचड़ी की भनक लग गई। नतीजतन सरिता, मनोज से छुटकारा पाने का प्रयास करने लगी थी, लेकिन वह सरिता को छोड़ने को तैयार नहीं था। इसको लेकर गांव में कई बार पंचायत हुई और मामला थाने तक भी पहुंचा। अंतत: शनिवार की रात सरिता ने फोन करके मनोज को घर बुलाया लेकिन उसके बेडरूम में पहुंचकर बिस्तर पर बैठते ही सरिता ने उस पर चाकू से ताबड़तो़ड़ हमला कर दिया। अचानक हुए इस हमले में गंभीर रूप से घायल हुए मनोज ने वहीं तड़प-तड़पकर दम तोड़ दिया। वारदात के बाद अपनी गलतियों पर पछताती सरिता प्रेमी मनोज के शव के पास बैठी रही।

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