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मंदी के बीच अरब देशों का गेम! ओपेक प्लस के फैसले से कई देशों की बढ़ी परेशानी

एजेंसी / फ्रैंकफर्ट
पहले कोविड संकट और फिर यूक्रेन यु्द्ध, इन दो घटनाओं ने पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर गंभीर प्रभाव डाला है और इस वजह से कई देश दिवालिएपन के कगार पर आ चुके हैं। दुनिया के ज्यादातर तेल खरीददार देशों के विदेशी मुद्रा भंडार पर काफी गंभीर प्रभाव पड़ा है और निम्न अर्थव्यवस्था वाले देशों में तो त्राहिमाम मच गई है, जिनमें श्रीलंका, पाकिस्तान और बांग्लादेश, चेक रिपब्लिक, केन्या समेत कई और दक्षिण अफ्रीकी देश शामिल हैं। लेकिन इन सबके बीच तेल उत्पादन को नियंत्रित करने वाले संगठन ओपेक प्लस ने एक बार फिर से तेल का प्रोडक्शन घटाने का फैसला किया है। वैश्विक अर्थव्यवस्था में चल रही मंदी के बीच ओपेक प्लस देशों ने सोमवार को तेल प्रोडक्शन में कटौती करने का फैसला किया है। ओपेक प्लस के इस फैसले में रूस भी शामिल है, जिसने तेल प्रोडक्शन कम करने में हामी भरी है। ओपेक प्लस ने तेल प्रोडक्शन कम करने का एलान करते हुए कहा कि ये फैसला करने में उन्हें नाखुशी हो रही है लेकिन वैश्विक आर्थिक मंदी का खतरा मंडरा रहा है।
रूसी तेल पर आशंका बरकरार
रूसी तेल आपूर्ति के नुकसान के बारे में चिंताएं अभी भी बनी हुई हैं, क्योंकि ज्यादातर अमेरिकी और यूरोपीय प्रतिबंध इस साल के अंत तक प्रभावी नहीं होंगे और इस साल के अंत तक प्रतिबंध प्रभावी होने के बाद रूसी तेल के प्रोडक्शन पर भी असर पड़ेगा। जी-७ देशों के समूह ने भी इस साल तेल की ऊंची कीमत को कम करने के लिए और रूसी तेल मुनाफे को कम करने के उद्येश्य से रूसी तेल मूल्य पर एक कैंप लगाने की योजना बना रहा ह।

 

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