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तापमान में गिरावट, टेंशन में सेना! …कश्मीर में घुसपैठ के प्रयासों का ग्राफ बढ़ा

• सैन्य अधिकारी ने कबूली सच्चाई
सुरेश एस. डुग्गर / जम्मू
जम्मू-कश्मीर में तापमान में गिरावट के साथ ही एलओसी पार से होने वाली आतंकवादियों की घुसपैठ के प्रयासों का ग्राफ बढ़ने लगा है। एलओसी पर आतंकियों को रोकने की कवायद और कोशिशों में कामयाबी के लिए सेना को जीतोड़ मेहनत करनी पड़ रही है। ऐसी जानकारी सैन्य सूत्रों के हवाले से मिली है।
तापमान में गिरावट के साथ ही घुसपैठ के प्रयासों के ग्राफ के बढ़ने के कारणों को स्पष्ट करते हुए सेना के अधिकारी कहते हैं कि पाकिस्तान की कोशिश बर्फ के गिरने से पहले अधिक से अधिक आतंकियों को इस ओर धकेलने की होती है। ‘ऐसे में एलओसी पर माहौल गर्म हो जाता है। लेकिन इस बार सुखद बात यह है कि पाकिस्तानी सेना के साथ चल रहे सीजफायर के कारण भारतीय सैनिकों को मात्र एक ही मोर्चे पर जूझना पड़ रहा है।’
एक सेनाधिकारी ने इस साल के आंकड़े देते हुए कहा कि २५ आतंकवादियों की घुसपैठ की कोशिशों के दौरान करीब १५ को मार गिराया गया। हालांकि सेनाधिकारी वही आंकड़े देते हैं, जिनमें उन्होंने आतंकियों को मार गिराने में सफलता हासिल की ही जबकि घुसपैठ में कामयाब होनेवालों पर वे चुप्पी साध लेते हैं, लेकिन वे दबे स्वर में इसे अक्सर स्वीकार कर लेते हैं कि जितने आतंकी घुसपैठ के दौरान मारे जाते हैं, उनसे कई गुना अधिक घुसने में कामयाब रहते हैं। इसका स्पष्ट कारण यही था कि घुसपैठ की कोशिश करने हैे आतंकियों द्वारा अब ध्यान बंटाने वाली रणनीति अपनाई जा रही है। एक दल अगर थोड़ी सी गोलीबारी कर छुप जाता है तो दूसरा मुकाबले की कोशिश में जुट जाता है और तीसरा दल घुसने के प्रयास करने लगता है। यही पहले भी हुआ करता था। तब पाक सेना कवरिंग फायर का सहारा लेते हुए आतंकियों को धकेलती थी। हालांकि, पिछले महीने पाक सेना ने एक आतंकी दल को कवर फायर देकर भारताऔrय सेना की चिंता को जरूर बढ़ा दिया था।

सरहद पर सेना परेशान है
नतीजतन स्थिति यह है कि एलओसी पर आतंकियों को रोकने की खातिर लगाए गए तमाम तामझाम के बावजूद सेना परेशान है क्योंकि आतंकियों द्वारा अक्सर तारबंदी की धज्जियां उड़ाकर घुसपैठ करने में कथित तौर पर कामयाबी हासिल की जाती रही है और सेना के तारबंदी के प्रति किए जाने वाले दावे धूल चाटते रह जाते हैं।
ऐसे में तापमान में आती गिरावट सेना की मुश्किलों का ग्राफ बढ़ा रही है क्योंकि गुरेज और पुंछ के इलाकों में अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती के बावजूद आतंकी हैं कि घुसे ही चले आते हैं। उन पर रोक वैâसे लगाई जाए के सवाल से जूझ रही सेना को एक ही रास्ता नजर आता है और वह यह है कि एक बार फिर सीमा पार आतंकी प्रशिक्षण केंद्रों पर इजरायल की तरह हमला बोल दिया जाए।

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