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लद्दाख में सेना की चिंता : ड़्रैगन के साथ जमा देने वाली ठंड से भी होगी जंग! …शून्य से ४० डिग्री नीचे के तापमान में भी ‘युद्ध’ रहता है जारी

सुरेश एस डुग्गर / जम्मू
लद्दाख के मोर्चे की एक चिंताजनक बात यह है कि भारतीय सेना को एलएसी पर इन सर्दियों में भी टिके रहने के साथ चीन से जंग की तैयारी भी करनी पड़ रही है। ऐसा इसलिए क्योंकि चीनी सेना द्वारा कब्जाए गए इलाकों में भूमिगत शेल्टर और बंकरों के निर्माण के बाद यह संकेत मिलने आरंभ हुए हैं कि दोनों मुल्कों की सेनाओं के बीच एलएसी के विवादित क्षेत्रों में झड़पें हो सकती हैं। चीन कई मोर्चों पर उलझे होने के कारण लद्दाख सीमा पर अपनी खुन्नस निकाल सकता है। ऐसे में भारतीय सेना की चिंता यह है कि और कितनी सर्दियां चीन सीमा पर गुजारनी होंगी।
रक्षा सूत्रों के अनुसार, पैंगांग झील, देपसांग, स्पंगुर झील, रेजांगला आदि के एलएसी के इलाकों में भारतीय सेना को युद्ध वाली स्थिति में ही रहने को कहा गया है। उसे अपने सैनिक साजो-सामान को कुछ ही मिनटों के ऑर्डर पर जवाबी हमला करने की स्थिति में भी तैयार रखने के निर्देश दिए गए हैं।
अधिकारियों ने बताया कि लद्दाख में एलएसी पर जो इंतजाम किए जा रहे हैं, उनमें लगातार चौथे साल भयानक सर्दी से बचने के उपायों के साथ युद्ध की स्थिति में बचाव और हमले करने की रणनीति अपनाने के लिए जरूरी इंतजाम भी शामिल हैं। पिछले ३९ सालों से दुनिया के सबसे ऊंचे युद्धस्थल पर सियाचिन में शून्य से ४० डिग्री नीचे के तापमान में भी ‘युद्ध’ जारी है।
सर्दियों में टिका रहना मुश्किल
अधिकारी कहते हैं कि अगले महीने से लद्दाख को मिलाने वाले राजमार्ग बर्फबारी के कारण बंद होने आरंभ हो जाएंगें और ऐसे में सारा बोझ हवाई मार्ग पर आ जाएगा। एलएसी पर हालत कितने गंभीर हैं इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि पिछले करीब तीन महीनों से सर्दियों में पुन: टिके रहने की नहीं, बल्कि चीन के साथ युद्ध होने की संभावना के मुताबिक ही तैयारियां की जा रही हैं। इसकी खातिर कई बार युद्धाभ्यास भी किए जा चुके हैं।
बम प्रूफ बंकर तैयार
बर्फ में टिके रहने वाले टेंटों और पहने जाने वाले कपड़ों से अधिक जोर भयानक सर्दी में गर्मी का अहसास देने वाले बम प्रूफ बंकर बनाए जा चुके हैं। इन बंकरों को जमीन के नीचे बनाया गया है, ताकि दुश्मन के हमलों से बचा जा सके। खासकर पिल बॉक्स और अन्य चौकिओं को दुश्मन की नजर से बचाने का प्रयास किया गया है। दरअसल, एलएसी पर कोई पेड़ पौधे न होने के कारण मोर्चाबंदी में बहुत ज्यादा कठिनाई पेश आ रही है, जबकि उस पार चीनी सैनिक सर्दी में अभी भी अपने आपको अभ्यस्त नहीं कर पाए हैं। यही कारण है कि चीनी सेना गर्मियों में भी अपने सैनिकों को प्रति सप्ताह बदलती रही है। पिछली दो सर्दियों में सैनिकों को प्रतिदिन बदलने का क्रम भी लाल सेना अपना चुकी है।

 

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