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छिंदवाड़ा के महाराजा का आगमन; आंध्र के विनायक मंदिर की झांकी में विराजे बाप्पा

इमरान खान / छिंदवा़ड़ा

मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा में दस दिवसीय गणेश उत्सव बुधवार से शुरू हुआ। महाराष्ट्र की सीमा से लगे होने की वजह से यहां मराठी भाषा का खासा प्रभाव है। साथ ही महाराष्ट्र की परंपराओं को भी भरपूर उत्साह से मनाया जाता है। यही वजह है कि नागपुर की तर्ज पर यहां भी `छिंदवाड़ा के महाराजा’ की स्थापना की जाती है और दस दिन तक पूजा-अर्चना तथा विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से बड़ी संख्या में लोग जुटते हैं। बुधवार को कलेक्टर बंगले के पास धूमधाम से छिंदवाड़ा के महाराजा की स्थापना की गई। दक्षिण मुखी छिंदवाड़ा के महाराजा को मनोकामना पूर्ण करने वाले रिद्धि–सिद्धि के दाता कहा जाता है। पिछले दो साल कोविड के चलते परंपरा तो निभाई गई थी लेकिन इस साल छिंदवाड़ा वालों का जोश ही कुछ अलग है। गणराज वेलफेयर सोसायटी द्वारा इस बार छिंदवाड़ा के महाराजा को आंध्र प्रदेश के विनायक मंदिर की झांकी में स्थापित किया गया है, जो आकर्षण का केंद्र है। छिंदवाड़ा के महाराजा के आयोजक समिति गणराज वेलफेयर सोसायटी दस दिवसीय आयोजन तो करती ही है साथ ही ब्लड डोनेशन कैंप फ्री नेत्र शिविर जैसे काम भी इस दौरान किए जाते हैं। छिंदवाड़ा के महाराजा के मंच पर कई स्थानीय और देश-प्रदेश स्तर के कलाकार अपनी प्रस्तुति भी देंगे। गौरतलब है कि छिंदवाड़ा का गणेश उत्सव मध्य प्रदेश में एक अलग पहचान रखता है। १९०१ में शहर के छोटी बाजार इलाके से सार्वजनिक गणेश उत्सव की शुरुआत हुई थी। १२२ वर्षों से ये सिलसिला जारी है।

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