मुख्यपृष्ठनमस्ते सामनाख्वाब उजालों से रोशनी मांगे

ख्वाब उजालों से रोशनी मांगे

ख्वाब उजालों से रोशनी मांगे
नए चेहरे की ताजगी मांगे,
खुशबुओं की इक लहर मांगे
तमाम नाराजगी के जवाब मांगे
इस फुरसत वाली रातों में
इक नई जज्बातों में,
जो किस्मत के पेशानी पर हैं
जो नए मौसम के रवानी पर है
मांगे इक धूम बाजारों का
महफिल और किनारों का
इक जवाब मांगे रुमाल पे,
हर किस्से इश्क के कढ़ाई करके,
हुस्न मांगे ऐ ख्वाब मेरा
जो चेहरा दिखता है लाजवाब तेरा
मांगे मौसम तेरा सावन के
सौ दरपन के, इक दरपन से
– मनोज कुमार
गोण्डा, उत्तर प्रदेश

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