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बीच सड़क पर वार, आरोपी फरार, हॉस्पिटल ने शुरुआत में किया इलाज से इंकार…

नईं मुंबई / गोविंद पाल

नईं मुंबई के सानपाड़ा में बुधवार दोपहर करीब साढ़े 11 बजे बीच सड़क पर एक युवक पर स्कूटी से आए दूसरे युवक ने चाकू से हमला कर लहुलुहान कर दिया। घायल युवक को बाद में रिक्शे में डालकर जब सानपाड़ा स्थित एमपीसीटी अस्पताल लेकर गए तो शुरुआत में अस्पताल के कर्मचारियों ने कहा कि पहले एक लाख रुपए जमा करो तब हम इलाज करेंगे। उस वक्त उन लोगों के पास देने के लिए पैसे नहीं थे तो कुछ देर तक इलाज भी नहीं शुरू किया गया, लेकिन जब अस्पताल के आसपास पुलिस की गाड़ियां पहुंचने लगी तो चिकित्सकों ने इलाज शुरू कर दिया। पीड़ित व्यक्ति के शरीर में कई जगहों पर चोटें आई हैं और वह अभी भी काफी गंभीर हालत में इलाज करवा रहा है।
गौरतलब है कि पीड़ित व्यक्ति तुर्भे एमआईडीसी स्थित एक कंपनी में डिलीवरी मैन के रूप में काम करता है। वह कंपनी से सामान लेकर नई मुंबई की विभिन्न दुकानों में जाकर सामान की आपूर्ति करता है। बुधवार को भी वह सानपाड़ा में सामान की डिलीवरी लेकर आया था। उसके अन्य साथी सामान दुकानों में ले जा रहे थे और वह गाड़ी के पास खड़ा था। दो अन्य साथी पीछे गाड़ी से सामान निकाल रहे थे कि इतने में तीन लोग एक स्कूटी से आए और उस पर हमला कर दिया, जिससे पीड़ित व्यक्ति चिल्लाकर बोलने लगा कि मुझे मत मारो-मुझे मत मार! उसकी आवाज सुनकर जो दो साथी गाड़ी से सामान निकाल रहे थे वह बाहर आ गए। उसमें से जब एक ने बचाने की कोशिश की तो आरोपी ने चाकू दिखाकर कहा कि अगर आगे आया तो तुझे जान से मार दूंगा। जिससे घबरा कर वह वहीं रुक गया। आरोपी ने फिर से पीड़ित पर चाकू से कई हमले किए और जब उसे लगा कि अब ये नहीं बचेगा तो वहां से भाग गया।

नईं मुंबई के सानपाड़ा में अक्सर इस तरह की घटनाएं होती रहती हैं। जिन घटनाओं पर नागरिकों की नजर चली जाती है वो खुल जाती हैं, लेकिन जो आम नागरिकों की नजर से बच जाती हैं, उन घटनाओं को स्थानीय पुलिस दबा देते हैं। सानपाड़ा पुलिस स्टेशन के अधिकारी पत्रकारों को जानकारी भी नहीं देते हैं। कुछ महीने पहले शिवसेना के एक निवर्तमान नगरसेवक ने सानपाड़ा पुलिस स्टेशन के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक की शिकायत कमिश्नर से की थी, लेकिन उसका कुछ भी असर नहीं हुआ है। पुलिस अपनी मनमर्जी से काम कर रही है। रात के समय पुलिस स्टेशन में रहने वाले पुलिस कर्मी बैच लगाकर भी नहीं बैठते हैं ताकि उनके द्वारा अगर कोई गलत काम किया जाए तो उनका नाम पढ़कर कोई उनकी शिकायत न कर सके।

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