मुख्यपृष्ठस्तंभराज की बात: जो जमीन सरकारी है...मोदी सरकार का अडानी प्रेम!

राज की बात: जो जमीन सरकारी है…मोदी सरकार का अडानी प्रेम!

आचार्य विनोबा भावे ने गरीब भूमिहीनों के हक में नारा दिया था – सबै भूमि गोपाल की, नहीं किसी की मालकी। भूमिहीन अधिकार आंदोलनों में यह नारा भी काफी लोकप्रिय है- ‘जो जमीन सरकारी है, वह जमीन हमारी है।’ विडंबना यह है कि यह नारा अब अमीरों और मेगा-डेवलपर्स का हो गया है। मुंबई में तो मानो यह नारा अब अडानी के लिए हो गया है। जिस तरह से अडानी समूह ने मुंबई की धारावी बस्ती की २६० हेक्टेयर भूमि के पुनर्विकास के लिए बोली जीती, वह मोदी सरकार के अडानी प्रेम का उदाहरण है। धारावी पर अडानी का कब्जा कोई आश्चर्य की बात नहीं है। लगभग हर कोई जानता था कि मोदी सरकार किस हद तक जाकर इस इलाके को अडानी की झोली में डालना चाहती है और अब नए सरकारी आदेश से दुनिया का सबसे बड़ा टीडीआर घोटाला होने जा रहा है।
हवाई अड्डा और बंदरगाह जैसे सरकारी संस्थान अडानी की झोली में डालने के बाद अब मोदी सरकार की नजर मुंबई की सोना उगलती जमीन पर है, जिसमें बांद्रा सरकारी वसाहत, बीडीडी चॉल, मुंबई पोर्ट ट्रस्ट और धारावी शामिल है। ये मेगा शहरी परियोजनाएं ऐसी जगहें हैं, जहां रियल एस्टेट दिग्गज वह फसल काटेंगे जो उन्होंने कभी बोई ही नहीं थी। संभावना यह है कि इनमें से ज्यादातर अडानी की झोली में डालने की कोशिश होगी।
एक सदी से भी अधिक समय से धारावी की जमीन लोगों को लुभाती रही है। पहला प्रयास १९१९ में किया गया था, जब बॉम्बे सिटी इंप्रूवमेंट ट्रस्ट ने दादर और सायन में अपनी उपनगरीय आवासीय परियोजनाओं के लिए क्षेत्र को अधिसूचित किया था। योजना धारावी में टेनरियों को अन्यत्र स्थानांतरित करने की थी। लेकिन टेनरी मालिकों और धारावी के मछुआरों ने विस्थापन का विरोध किया इसलिए इस योजना को अंतत: छोड़ दिया गया। फिर भी इंप्रूवमेंट ट्रस्ट के खत्म होने के बाद इस योजना के तहत अधिग्रहीत भूमि महानगरपालिका को दे दी गई। दूसरा बड़ा प्रयास ७५ साल बाद १९८५ में हुआ, जो अधूरा रहा। दोनों ही बार सरकारें फेल हुईं। इसी की नजीर देकर यह स्थापित करने की कोशिश हुई कि धारावी का पुनर्विकास किसी सरकार द्वारा संभव नहीं है। यह भ्रामक प्रचार इसलिए भी किया जाता रहा है, ताकि बिल्डरों को यह इलाका सौंप दिया जाए। उस समय की सरकारें इस मुद्दे पर बहुत गंभीर भी नहीं थीं। पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए धारावी को विकसित किया जाना चाहिए। यह किसी लाभ कमाने वाली कंपनी का उद्देश्य कभी होता नहीं और यह उम्मीद भी नहीं रखनी चाहिए।
अडानी के लिए यह परियोजना बहुत सोच-समझ कर तैयार की गई है और यह सुनिश्चित किया गया है कि धारावी के पुनर्विकास के नाम पर अडानी को जबरदस्त आर्थिक फायदा हो। इसके लिए तमाम ऐसे नियम बनाए गए हैं, जो सामान्य तौर पर किसी भी एसआरए प्रोजेक्ट करनेवाले बिल्डर को हासिल नहीं होते। एसपीवी (स्पेशल पर्पज वीहिकल) अर्थात विशेष प्रायोजन वाहन असाधारण शक्तियों से लैस है। विवरण निविदा दस्तावेज में संलग्न हैं जो निजी तौर पर प्रसारित हो रहे हैं, लेकिन जनता के लिए उपलब्ध नहीं हैं। विशेष प्रायोजन वाहन अपना स्वयं का सर्वेक्षण करेगा और पात्र व अपात्र तय करेगा।
यह एक पूरी तरह से नया मास्टर प्लान तैयार करेगा और निविदा दस्तावेज में ऐसा कुछ भी नहीं है जो यह बताता हो कि यह योजना सार्वजनिक जांच के लिए खुली होगी। यह धारावी के लिए एक पूरी तरह से नई झोपड़पट्टी पुनर्वास योजना तैयार करेगा। पुनर्विकास में स्लम और गैर-स्लम क्षेत्रों के साथ-साथ ऑन-साइट और ऑफ-साइट बुनियादी ढांचे को शामिल किया जाएगा। सबसे बढ़कर इसे ‘सार्वजनिक कानून और व्यवस्था, सुरक्षा बनाए रखने एवं अवैध निर्माण को खाली कराने तथा कब्जाधारियों को हटाने’ के लिए पुलिस दी जाएगी। इसका फायदा उठाकर एक तरफ तो गुंडों और एनकाउंटर स्पेशलिस्ट से धारावी के रहिवासियों को डराने-धमकाने और कोरे कागज पर दस्तखत कराने की खबरें आ रही हैं, तो दूसरी तरफ कंपनी को पुलिस का संरक्षण दे दिया गया है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस तरह के विशाल भूभाग को मुनाफा कमाने की दृष्टि से क्यों देखना? क्या यह सरकारों का कर्तव्य नहीं है कि कोई अविकसित क्षेत्र हो तो उसे विकसित किया जाए। इसके लिए किसी बिल्डर को देने और उसे प्रॉफिट कमाने का मौका देने की क्या जरूरत है? यह नहीं भूलना चाहिए कि धारावी के निवासियों ने अपने परिश्रम से एक दलदल को रहने योग्य भूमि में बदल दिया और एक औद्योगिक व आवासीय अर्थव्यवस्था का निर्माण किया, जो लाखों लोगों को घर और नौकरियां प्रदान करती है। इसे उस कंपनी द्वारा क्यों छीना जाना चाहिए, जिसने इसे इसके लायक बनाने के लिए कुछ भी नहीं किया है? धारावी की सारी भूमि का उपयोग केवल उन लोगों के घरों, कार्यस्थलों और सुविधाओं के लिए किया जाना चाहिए, जिन्होंने इसे मुंबई के केंद्र में एक संपन्न बस्ती बनाया है।
धारावी के लिए योजना बनाने के इस लंबे इतिहास में बहुत कम लोगों ने पूछा है कि धारावी क्या है, शहर के इस हिस्स्ो में रहने वाले लोग किस बारे में चिंता करते हैं और क्या चाहते हैं और वे स्वयं इस क्षेत्र को वैâसे बदलना चाहेंगे। किसी एजेंसी ने यह जानने की कोशिश नहीं की। जितनी भी सर्वे एजेंसियां आईं, किसी ने धारावी के रहिवासियों की बात सुनने और उनकी भावनाएं समझने की कोशिश नहीं की। धारावी में रहने का सबसे मूल्यवान पहलू ‘समुदाय’ की भावना है। यह मुख्य शहर का हिस्सा है और इसका ‘लाभदायक स्थान’ है। सभी निवासी मानते हैं कि उनके पड़ोस का सबसे नकारात्मक पहलू खराब अपशिष्ट प्रबंधन और सीवरेज नेटवर्क का अभाव है। धारावी रहने के लिए एक जगह होने के साथ-साथ उत्पादन और रोजगार का प्रमुख केंद्र है। २००९ में विशेषज्ञों की एक समिति ने तत्कालीन सरकार को लिखा था कि धारावी पुनर्विकास परियोजना ‘एक सुनियोजित भूमि हड़पने की कोशिश है, जो धारावी के निवासियों के कल्याण के बजाय व्यक्तिगत लालच से प्रेरित है’। क्या आज अडानी के माध्यम से यह कटु सत्य साबित होने की ओर नहीं बढ़ रहा है?

द्विजेंद्र तिवार्री
(लेखक कई पत्र-पत्रिकाओं के संपादक रहे हैं और वर्तमान में राजनीतिक क्षेत्र में सक्रिय हैं।)

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