मुख्यपृष्ठस्तंभअवधी व्यंग्य : कलेट्टर साहब

अवधी व्यंग्य : कलेट्टर साहब

एड. राजीव मिश्र मुंबई

जब से स्वारथ के लड़िका बीए मा ५२ प्रतिशत लइके आवा है पूरे गाँव मा अंहोर होय गवा है। स्वारथ के गोड़ मानो जमीन पर नही होय, जे भी आवत अहइ एक्के बात कहि रहा है, कई जनम के पुन्य परताप से लड़िका पास होइ गवा, अब ऐहिका का करइहौ स्वारथ? का करइहौ के का मतलब है? कलेट्टर बनी हमार लड़िका। स्वारथ के बात सुनिके जहाँ स्वारथबो मुस्कियाय रही हैं उहीं मोहना के लगि रहा है कि केउ ओकरे छाती में से करेजा नोचि रहा होय। जइसे तइसे जुगाड़ कइके पास हुइ गएन अब कलेट्टर कहाँ से बनि जाई। खैर आनन-फानन मा चउरा माई से लइके बरम बाबा तक के परिकरमा कइके स्वारथ मोहना के तैयारी करे प्रयागराज पार्सल कइ दिहिन। प्रयाग पहुँचि के मोहना के सिट्टी-पिट्टी गुम हुइ गवा, जिनगी में कबहूँ कलेट्टर लिखि नहीं पाइस अउर बप्पा ओहिका कलेट्टर बनय बिना भेजि दिहिन। आखिर मा जइसे मोहना के नीयत रही वइसे ओहिका संगत मिलि गय। एक लड़िका मोहना के परम ज्ञान देइके ओहिके आँख खोलि दिहिस। देखो भईया इहाँ दुइ तरह के लोग आवत हैं एक जेहिके सच्ची मा कलेट्टर बनय के अहइ अउर दूसर जेहिका बस कलेट्टर के तैयारी करय के है। अब हमिहीं के देखो पिछले दस बरिस से हम बस तैयारी कइ रहें हैं हमरे साथ के केतना लड़िका कलेट्टर होय गएन। बस यहि साल बियाह होइ जाइ समझ लौ हम कलेट्टर होइ गए, तुमहूँ दिमाक पे जियादा लोड न लो। बस तैयारी करत रहो गाँव गिरांव में पोज बना रही अउर बढ़िया मेहरारू मिल जाई समझो जिनगी सफल हुइ गई। इतना ज्ञान बघार के दोस्त मोहना से पूछिस, सिगरेट पियत हौ? नाही भैया। तबै एतना बौखलान हय।इतना कहिके उ मायाधारी दोस्त एक दुइ तीन होइ गवा अउर मोहना के आँख पे पड़ा परदा अब धीरे धीरे हटि गवा। अब मोहना तैयारी के गुन सीखि गवा, हर बार बस चार नंबर से चूकि गवा के पुड़िया स्वारथ के तब तक थमाइस जब तक तीस पार नही होय गवा। गाँव लौटि के तैयारी के नाम पर बोलेरो के साथ मेहरिया मिली अब दुइ ठो लड़िका होय गयें, मोहना पूरा कलेट्टर होय गवा।

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