मुख्यपृष्ठस्तंभअवधी व्यंग्य: फूफाजी कै पीड़ा!

अवधी व्यंग्य: फूफाजी कै पीड़ा!

एड. राजीव मिश्र, मुंबई
जोखन के जेठ लरिका सुक्खू के आज बरात जाई। सुबहिये से जोखन के छोटकना दुक्खुआ स्पीकर पे ‘तू लगावै लू जब लिपिस्टिक’ गाना से पूरा गांव झकझोरी दिहे बा। सुक्खू के फूफा अउर जोखन के बड़का जीजा बवंडर सुफेद कुर्ता-धोती के ऊपर जाकिट पहिन खटिया पर बैठि पान गुलगुलात रहें तब तक जोखन के छोट बहिन परमीला छम-छम छागल छनकावति लपक के बवंडर के गोड़ धईके मुस्कियात बोली ‘का हो जीजा तोहार त उमिर लागत बा कमै होति जाति अहइ, एकदम अक्षय कुमार लागत अहा। एतना सुनतै बवंडर के गाल लुकान आम से ताजा हापुस होइ गवा। बहुत दिन भवा सढ़ुआईन के याद नाही आवै का, आवा कभौ हमरी ओर…जीजा सढ़ुआईन के नोक-झोंक के बीच दुआरे पे बोलेरो रुकी ओहमा से जोखन के दामाद बियाहे वाला कोट पहिनि के निकरे। अंदर से बहिरे तक मानो भूकंप आइ गवा हो। जोखन, ओनकी मेहरिया, जोखन के बहिन, दुलहा-बलहा सब बोलेरो की ओर दौरि परे। पाहुन बालीवुड के राजकुमार स्टाइल मा घर मा घुसि गए अउर जोखन फिरि से बवंडर की ओर कूच किहिन। जीजा ई हमरे पाहुन हैं सुलतापुर नजारत मा चपरासी हैं पूरी कचहरी मा इनका डंका बाजति है। तब तक बवंडर गुस्सा के गुड़गांव होय चुका रहें। जोखन इ कउनउ तरीका अहइ हम इहां बैठी रहे अउर तोहार पूरा खानदान उ लौंडा के पीछे मन का मनमाड हुआ जाइ रहा है। एतना घनघोर बेज्जती हमके बरदास न होइ। इहै इज्जति अहै अरे हमहुं कभौ जीजा रहे इतना पियार के पीलीभीत कबहुं न देखे जवन आज देखत अही…अरे उ का है जीजा अब पहिली बार आयें है बियाह के बाद तो तनिका स्वागत त बनतय हय। गुस्सा मा खुद से बड़बड़ात बवंडर के करेजा में मानो बसंत आइ गवा जब उ अपनी ओर परमीला के आवत देखिन। का जीजा नराज होइ गयें, सुनो जीजा तोहरे खातिर भैया एटलस के सायकिल लावा हैं जब तू सूक्खुआ के टीका लगईबा तब मिली अउर हम तोहरे साइकिल के कैरियर पे बैठी के घूमब। ई बात सुनतै बवंडर के गुस्सा के बवंडर पल भर मा दूरि होई गवा अउर उ जाकिट से कंघी निकारि के अपने मुड़े पर बचा दुई चार बाल फेरय लागे।

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