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बब्बा बोलो ना…: गड़बड़ा गया है बीजेपी का गणित

अरुण कुमार गुप्ता

सियासत में एक कहावत है कि दिल्ली की सत्ता का रास्ता उत्तर प्रदेश से होकर गुजरता है। यह बात कहने के पीछे मजबूत तर्क है कि देश की सबसे ज्यादा ८० सीटें यहीं हैं। पंडित जवाहर लाल नेहरू से इंदिरा गांधी, अटल बिहारी वाजपेयी, चंद्रशेखर सिंह और नरेंद्र मोदी तक यूपी से ही जीतकर प्रधानमंत्री बने। यही वजह है कि लोकसभा चुनाव में बीजेपी नेतृत्व वाले एनडीए और कांग्रेस की अगुवाई वाले इंडिया गठबंधन दोनों ने ही उत्तर प्रदेश में पूरी ताकत झोंक रखी है। यूपी में इस बार कांटे का मुकाबला माना जा रहा है। सूबे में ढाई दर्जन लोकसभा सीटें ऐसी हैं, जिस पर देश की सत्ता टिकी हुई है। इन सीटों पर कुछ वोटों के उलटफेर से २०२४ के चुनाव का सियासी गणित बीजेपी का गड़बड़ा सकता है। सपा ने इस बार के चुनाव में गैर-यादव ओबीसी पर सबसे ज्यादा दांव खेला है, जिसके चलते माना जा रहा है कि बीजेपी के कोर वोट बैंक में सेंधमारी की रणनीति है। राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो यूपी की लोकसभा सीटें ही इस बार सत्ता का मिजाज तय करनेवाली हैं, क्योंकि बीजेपी ने पिछले दो बार से सूबे की ज्यादा से ज्यादा सीटें जीतकर अपने नाम किया है। ऐसे में एक लाख से कम मार्जिन वाली ३१ सीटें राजनीतिक दलों की धड़कने बढ़ाए हुए हैं, जिससे ज्यादा चिंता बीजेपी को है। २२ सीटें बीजेपी के पास है। ऐसे में इन सीटों पर कुछ वोट अगर इधर से उधर हुए या फिर किसी अन्य के खाते में गए तो बीजेपी के लिए अपनी सीटों को बचाना मुश्किल हो जाएगा। कम मार्जिन वाली सीटों पर सपा-कांग्रेस पूरा दम लगाए हुए हैं। ऐसे में देखना है कि बीजेपी वैâसे इन सीटों को बचाए रखने में सफल होती है?

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