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बब्बा बोलो ना… कैराना में भाजपा का विरोध

अरुण कुमार गुप्ता

गुजरात के राजकोट से क्षत्रिय समाज के विरोध की चिंगारी कैराना तक पहुंच गई है। क्षत्रिय समाज को लेकर केंद्रीय मंत्री परषोत्तम रूपाला द्वारा की गई टिप्पणी से क्षत्रिय समाज अभी भी नाराज है। इसी कड़ी में कैराना लोकसभा सीट से भाजपा उम्मीदवार प्रदीप चौधरी की पत्नी सुनीता चौधरी प्रचार के लिए जब छबीरण गांव पहुंचीं तो क्षत्रिय समाज के युवक नारा लगाने लगे। इस दौरान सुनीता चौधरी ने लोगों को शांत कराने का प्रयास किया, लेकिन लोग नहीं माने। इसके बाद सुनीता चौधरी बिना प्रचार किए वापस लौट गईं। २०१४ के लोकसभा चुनाव से ही क्षत्रिय समाज भाजपा का कैडर वोटर बना हुआ है। परषोत्तम रूपाला की टिप्पणी के बाद पूरे देश का क्षत्रिय समाज नाराज है। ऐसे में अब यही कहा जा रहा कि क्षत्रिय समाज की नाराजगी भाजपा को मुश्किल में डालने वाली है।

फतेहपुर सीकरी में भाजपा बनाम भाजपा
फतेहपुर सीकरी लोकसभा क्षेत्र में इस बार मुकाबला दिलचस्प होने जा रहा है। राजनीतिक दलों के प्रत्याशी के साथ-साथ निर्दलीय प्रत्याशी भी अब चुनौती देने को तैयार हैं। भाजपा गठबंधन और बसपा प्रत्याशी के साथ-साथ भाजपा के बगावती तेवर दिखा रहे नेता अब चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे हैं, जो भाजपा के लिए चुनौती बन सकते हैं। आगरा की फतेहपुर सीकरी लोकसभा सीट पर भाजपा नेता ही भाजपा उम्मीदवार को टक्कर देंगे। फतेहपुर सीकरी लोकसभा सीट से भाजपा ने अपने मौजूदा सांसद राजकुमार चाहर को प्रत्याशी बनाया है, वहीं सपा-कांग्रेस गठबंधन की ओर से पूर्व सैनिक रामनाथ सिकरवार चुनौती दे रहे हैं। इसके साथ ही बसपा ने ब्राह्मण-दलित गठजोड़ को एक बार फिर फतेहपुर सीकरी में आजमाया है और रामनिवास शर्मा को प्रत्याशी बनाया है। भाजपा प्रत्याशी राजकुमार चाहर के सामने फतेहपुर सीकरी विधानसभा सीट से भाजपा विधायक चौधरी बाबूलाल के बेटे रामेश्वर चौधरी निर्दलीय चुनाव लड़ने का एलान कर चुके हैं। कौन किसके लिए कितनी बड़ी चुनौती बनेगा, ये तो आने वाला समय ही बताएगा।

जातीय समीकरण में फंसे अरविंद राजभर
घोसी लोकसभा सीट पर इस बार मुकाबला काफी रोचक होने वाला है। एक तरफ जहां एनडीए में जातीय समीकरण साधते हुए बड़बोले ओमप्रकाश राजभर के पुत्र अरविंद राजभर को मैदान में उतारा है, वहीं सपा ने यहां से राजीव राय को मैदान में उतारा है। बसपा ने भी ओबीसी का समीकरण साधते हुए बालकृष्ण चौहान को चुनावी मैदान में उतार दिया है। सियासी गलियारों में ऐसी चर्चा है कि अरविंद राजभर और बालकृष्ण चौहान दोनों ओबीसी समुदाय से आते हैं। ऐसे में बालकृष्ण चौहान अब चौहान बिरादरी का वोट हासिल कर अरविंद राजभर को नुकसान पहुंचा सकते हैं। दूसरी तरफ वरिष्ठ भाजपा नेता दारा सिंह चौहान भी घोसी से ही आते हैं। कहा जा रहा है कि दारा सिंह चौहान, बालकृष्ण चौहान को ज्यादा डैमेज नहीं करने देंगे। कुल मिलाकर यह जरूर कहा जा सकता है कि बसपा ने बालकृष्ण चौहान को मैदान में उतार कर घोसी में सियासी मुकाबला रोचक कर दिया है। बता दें कि हाल ही में बालकृष्ण चौहान कांग्रेस को छोड़ बसपा में शामिल हुए थे। २०१९ में वह सपा छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए और कांग्रेस के टिकट पर घोसी सीट से चुनाव लड़े थे, मगर उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। अभी कुछ रोज पहले ही चौहान कांग्रेस से इस्तीफा देकर बसपा में शामिल हुए और पार्टी हाईकमान ने उन्हें घोसी से उम्मीदवार बना दिया।

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