मुख्यपृष्ठस्तंभबब्बा बोलो ना...अनुप्रिया पटेल से नाराजगी

बब्बा बोलो ना…अनुप्रिया पटेल से नाराजगी

अरुण कुमार गुप्ता

भाजपा की सहयोगी अपना दल (एस) की अध्‍यक्ष अनुप्रिया पटेल मिर्जापुर से एक बार फिर चुनाव प्रचार में जुटी हैं। चर्चा है कि मिर्जापुर के तीन भाजपा विधायक अनुप्रिया पटेल से नाराज चल रहे हैं। यही वजह है कि ये लोग अनुप्रिया पटेल के चुनाव प्रचार से दूरी बनाए हुए हैं। इस बीच अनुप्रिया के साथ भाजपा विधायकों के न दिखने की वजह राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। लोगों का कहना है कि भाजपा के विधायक मौजूदा सांसद अनुप्रिया पटेल से नाराज हैं। बता दें कि लोकसभा चुनाव पास आने पर मिर्जापुर के भाजपा विधायकों के नाराज होने की बात सामने आई थी। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के मिर्जापुर आगमन पर कार्ड पर अपना नाम न होने पर विधायकों ने नाराजगी जताई थी। चुनाव प्रचार से विधायकों की दूरी की वजह से चर्चा तेज हो गई है। ऐसे में पूरे क्षेत्र में इस बात की चर्चा हो रही है कि भाजपा विधायकों की नाराजगी कहीं अनुप्रिया पटेल के लिए भारी न पड़ जाए तो फिर प्रधानमंत्री मोदी के ४०० पार के सपने का क्या होगा।

कैसरगंज में सन्नाटा
गोंडा संसदीय सीट एक तरफ पूरी तरह चुनावी मोड में आ चुकी है, वहीं जिले की कैसरगंज संसदीय सीट पर सन्नाटा पसरा है। माना जा रहा था कि दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट से फैसला आने के बाद सांसद बृजभूषण शरण सिंह के चुनावी सफर की तस्वीर साफ हो जाएगी, मगर अगली सुनवाई २६ अप्रैल को होने के चलते कैसरगंज संसदीय क्षेत्र में सन्नाटा पसरा है। जिला प्रशासन से अब तक चुनावी सभाओं व वाहनों के लिए ५० अनुमतियां जारी की गईं। इसमें सबसे अधिक अनुमतियां गोंडा संसदीय सीट के लिए ली गई हैं। २६ अप्रैल से जिले में नामांकन प्रक्रिया शुरू होनी है, मगर अभी तक किसी दल ने वैâसरगंज से अपने प्रत्याशियों का एलान नहीं किया है। इस सीट से लगातार दो बार जीत दर्ज कर बृजभूषण शरण सिंह लोकसभा पहुंच चुके हैं। वहीं पहलवानों के यौन शोषण के आरोपों के बाद बृजभूषण शरण सिंह की कैसरगंज संसदीय सीट चर्चा में आ गई है। कैसरगंज सीट पर किसी भी दल ने अब तक प्रत्याशी नहीं उतारे हैं। ऐसे में मतदाताओं में भी बेचैनी है।

चुनावी ड्यूटी से चाहिए मुक्ति
लोकसभा चुनाव की ड्यूटी करने से कतरा रहे कर्मचारी कोई न कोई बहाना बनाकर अधिकारियों के पास पहुंच रहे हैं। इसी बीच बाराबंकी में लोकसभा चुनाव में ड्यूटी से नाम कटवाने के लिए ४५० से अधिक कर्मचारी डीआरडीए सभागार पहुंचे। स्वास्थ्य कारणों का हवाला देने वालों का डॉक्टरों की टीम ने चेकअप किया। इसके साथ ही कई महिलाओं ने बच्चा छोटा होने तो कई पति और पत्नी ने दोनों की ड्यूटी लगाए जाने का हवाला दिया। सुबह से देर रात तक लोग ड्यूटी से नाम कटवाने के लिए डटे रहे। इस बीच अधिकारियों ने जांचने-परखने के बाद कुल आवेदनों में महज एक चौथाई को ही स्वीकार किया। देवा के सैहारा जूनियर हाईस्कूल में तैनात अध्यापक शबाना को व्हीलचेयर पर लाया गया था। बताया गया कि कुछ समय पहले ही ब्रेन हैमरेज हुआ है। ऐसे ही सूरतगंज के भिटौली के कम्पोजिट स्कूल के अध्यापक विनय वर्मा ने २६ जून २०२१ को गले व जीभ के वैंâसर का ऑपरेशन होने के बाद इलाज चलने का हवाला दिया। प्राइमरी स्कूल औरंगाबाद की पूजारानी गोद में डेढ़ साल के बच्चे को लेकर आई थीं। उन्होंने बताया कि पति की भी ड्यूटी लगी है। ऐसे में बच्चे की देखभाल के लिए किसी एक को ड्यूटी से राहत दी जाए। हैदरगढ़ स्कूल की नम्रता सिंह ने भी बच्चा छोटा होने और पति की भी ड्यूटी लगने का हवाला दिया। अधिकारियों के अनुसार देर रात तक आवेदकों की भीड़ लगी रही। प्रभारी अधिकारी मनीष कुमार के अनुसार कुल आवेदनों में महज २५ प्रतिशत ही सही पाए गए हैं। यह बात सोचने को मजबूर करती है कि कर्मचारी चुनावी ड्यूटी क्यों नहीं करना चाहते हैं, इस पर चुनाव आयोग को भी ध्यान देना पड़ेगा।

अन्य समाचार