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बब्बा बोलो ना…ओमप्रकाश राजभर की सलाह

अरुण कुमार गुप्ता 

बड़बोले सुभासपा अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर का एक और विवादित बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। राजभर की कार्यकर्ताओं को अनोखी सलाह सुर्खियों में है। यूपी सरकार के वैâबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने एनडीए गठबंधन के प्रत्याशी अरविंद राजभर के नामांकन के पूर्व सोनी धाप मैदान में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि एक विरोधी है, वह कह रहा है हम रुपए बांटकर चुनाव जीत जाएंगे। यदि रुपए कहीं गाड़ी में दिखे तो लपककर छीन लो और मुझे बताओ मैं भी आ जाऊंगा। मान लो १० लाख रुपए लिए हैं तो थाने को फोन करो और थानाध्यक्ष को १ लाख रुपए ही बताना तथा ९ लाख रुपए अपने पास रख लो और मौज-मस्ती करो। उन्होंने कहा कि आप लोगों के सम्मान में इस्तीफा भी दे सकता हूं। ओमप्रकाश राजभर ने अपने बयान में कहा कि बीजेपी से हमने गठबंधन किया है। आप लोगों के सम्मान में इस्तीफा भी दे सकता हूं। जिस दिन आप पर आंच आएगी इस्तीफा दे दूंगा। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि कार्यकर्ता उनकी कितनी सलाह मानते हैं।
पत्रकार के साथ मारपीट
उत्तर प्रदेश में पत्रकारों के साथ मारपीट कोई नई बात नहीं है। इस बार रायबरेली लोकसभा में गृहमंत्री अमित शाह की रैली के दौरान एक पत्रकार के साथ मारपीट का मामला सामने आया है। एक वेब पोर्टल से जुड़े हुए पत्रकार राघव त्रिवेदी गृहमंत्री की रैली को कवर करने रायबरेली पहुंचे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि रैली के दौरान कुछ बीजेपी कार्यकर्ताओं ने उनके साथ मारपीट की है। फिलहाल, उन्हें एक स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया है। कांग्रेस ने भी एक ट्वीट के जरिए इस मामले को उठाया है। कांग्रेस के आधिकारिक एक्स हैंडल से लिखा गया, यूपी के रायबरेली में अमित शाह की रैली थी। यहां महिलाओं ने एक पत्रकार को बताया कि उन्हें पैसे देकर रैली में लाया गया है। पत्रकार ने यह बात रिकॉर्ड कर ली। इसके बाद बीजेपी के गुंडों ने पत्रकार को पकड़ लिया और उससे वीडियो डिलीट करने को कहा। जब पत्रकार ने मना किया तो बीजेपी के गुंडों ने अगवा कर लिया, फिर मंच के पीछे एक कमरे में ले जाकर बुरी तरह पीटा। पत्रकार से रुपए भी छीन लिए। राघव त्रिवेदी से स्थानीय मीडिया ने बात की है। उन्होंने कहा कि मैं पुलिस से कहता रहा कि मुझे बचाइए, मेरे पेट पर बहुत मारा गया है। मुझे वह लोग मुल्ला कह रहे थे क्योंकि मैंने दाढ़ी रखी हुई है। अब यह देखने वाली बात होगी कि पुलिस बीजेपी के इन गुंडों पर क्या कार्रवाई करती है।
विरासत को आगे बढ़ाने की चुनौती
महिला पहलवानों के यौन शोषण मामले में बृजभूषण शरण सिंह पर आरोप तय होने के बाद हाई प्रोफाइल सीटों में शामिल कैसरगंज की सियासी जमीन तपने लगी है। पहले उम्मीदवारी को लेकर चर्चित रही इस सीट पर अब जीत को लेकर नफा-नुकसान का अंदाजा लगाया जा रहा है। भाजपा ने बृजभूषण शरण सिंह की जगह उनके बेटे करण भूषण पर दांव लगाया है, वहीं सपा ने भी ब्राह्मण बहुल सीट पर राम भगत मिश्रा जैसे वरिष्ठ अधिवक्ता को मैदान में उतार कर अपने मंसूबों को साफ कर दिया है। बसपा ने भी इसी जाति के वोट बैंक को साधने के लिए नरेंद्र पांडेय को मैदान में उतारकर लड़ाई को रोचक बना दिया है। ऐसे में करण भूषण के सामने पिता बृजभूषण की सियासी विरासत को आगे बढ़ाने की चुनौती है। जातीय समीकरण के लिहाज से यहां ब्राह्मण मतदाताओं की संख्या सबसे अधिक है। करीब साढ़े चार लाख ब्राह्मण वोटर हैं। सभी दलों की निगाहें ब्राह्मणों पर ही रहती हैं। नामांकन खत्म होने से एक दिन पहले प्रत्याशियों की तस्वीर साफ होने के बाद से ही सभी दल जातीय समीकरण साधने में जुटे हैं। तकरीबन सभी दलों ने प्रत्याशी अंतिम समय में घोषित किया इसलिए सभी को प्रचार का समय कम ही मिला। ऐसे में मतदाताओं की चुप्पी से सभी प्रत्याशी चकरघिन्नी बने हुए हैं।

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