मुख्यपृष्ठविश्वबाज नहीं आए बाजवा ...जाते-जाते भी बोल गए देश से झूठ

बाज नहीं आए बाजवा …जाते-जाते भी बोल गए देश से झूठ

• विदाई भाषण में छलका भारत से हार का दर्द
एजेंसी / इस्लामाबाद
पाकिस्तान के राजनीतिज्ञ और खासकर सेना से जुड़े लोग झूठ बोलने में बिल्कुल भी नहीं हिचकिचाते। कश्मीर पर झूठ बोलकर अपनी आतंकी गतिविधियों को जायज ठहराने का बेशर्म प्रयास पाकिस्तानी हमेशा करते रहते हैं। हिंदुस्थान के खिलाफ झूठा प्रचार करके जनता की सहानुभूति बटोरना उनकी मजबूरी बन गया है। यही बेबसी पाकिस्तानी सेना के अध्यक्ष जनरल कमर जावेद बाजवा के विदाई समारोह के दौरान भी देखने को मिली। अपने पद से रिटायर होने जा रहे बाजवा ने विदाई भाषण में पाकिस्तानी सेना की पोल खोल दी। उन्होंने पाकिस्तान की राजनीति में सेना के दखल की बात को कबूल करके अपनी ही सेना की फजीहत करवाई। जाते-जाते उनके आखिरी स्पीच में सन् १९७१ की जंग को लेकर उनका दर्द छलक कर सामने आया और वे जनता से एक बड़ा झूठ बोल गए। पाकिस्तानी आर्मी चीफ जनरल कमर जावेद बाजवा के रिटायरमेंट में अभी कुछ ही दिन शेष बचे हैं। ६१ वर्षीय बाजवा २९ नवंबर को सेवानिवृत्त होनेवाले हैं। जाते-जाते अपनी आखिरी स्पीच में उन्होंने कहा- ‘१९७१ की जंग में पाकिस्तान की ओर से ९२ हजार नहीं, बल्कि सिर्फ ३४ हजार फौज थी।’ उन्होंने भारतीय फौज के सामने पाकिस्तानी फौज के समर्पण को सियासी असफलता करार दिया। बाजवा ने ये भी कहा कि ‘पाकिस्तान का टूटना और बांग्लादेश का बनना सैन्य असफलता नहीं, बल्कि एक सियासी असफलता थी।’ पाकिस्तान के सेनाध्यक्ष जनरल कमर जावेद बाजवा ने देश के नाम अपने आखिरी संबोधन में कहा कि ‘१९७१ सैन्य नहीं, बल्कि राजनीतिक नाकामी थी। हमारी सेना पूर्वी पाकिस्तान में साहस के साथ लड़ी थी।’ उन्होंने इस मौके पर पाकिस्तान की राजनीति में सैन्य दखल को स्वीकार किया है। बाजवा ने कहा, `१९७१ में लड़ने वाले फौजियों की संख्या ९२ हजार नहीं, सिर्फ ३४ हजार थी। बाकी लोग अलग-अलग सरकारी विभागों से थे।

असीम मुनीर नए सेना प्रमुख!
सेवािनवृत्त हो रहे बाजवा की जगह असीम मुनीर को पाकिस्तानी सेना का नया सेना प्रमुख बनाया जा रहा है। मुनीर को सेनाध्यक्ष बनाए जाने की घोषणा पाकिस्तान की सूचना प्रसारण मंत्री मरियम औरंगजेब ने की है। मुनीर को पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान और भारत का कट्टर विरोधी माना जाता है।

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