मुख्यपृष्ठस्तंभबकलोली : तमाचे से रोग गायब

बकलोली : तमाचे से रोग गायब

श्रीकिशोर शाही

हिंदुस्थान एक आस्थावान देश है। यहां के लोग धर्म-कर्म में बहुत ज्यादा आस्था रखते हैं। यही कारण है कि कई बार कुछ लोग उनकी आस्था के साथ खिलवाड़ भी करते नजर आते हैं। हालांकि, अंधविश्वास को बढ़ावा देना और किसी नागरिक की आस्था के साथ खिलवाड़ करना कानूनी जुर्म है। आए दिन ऐसे ढोंगी पकड़े जाते हैं। इसके बावजूद आस्था के साथ खिलवाड़ करनेवाले बाज नहीं आते और रोजाना ऐसी खबरें आती रहती हैं। अब एक खबर राजस्थान से आई है। वहां एक बाबा जी अवतरित हुए हैं। इनकी खासियत यह है कि ये तमाचा मारते हैं। इस तमाचे से बड़े-बड़े रोग पल भर में गायब हो जाते हैं। ऐसा ही एक वीडियो नजर आता है जिसमें एक गूंगे को बाबा ने एक तमाचा लगाया और वह गूंगा बोलने लगा। अब यह बात सुनकर आपको यकीन नहीं होगा पर वीडियो में तो इसकी ही चर्चा है। लोग इन्हें कंबल वाले बाबा और चांटे वाले बाबा के नाम से पुकारने लगे हैं। ये बाबा शिविर लगाकर लोगों को अपने पास बुलाते हैं। वैसे बाबा का गेटअप आधुनिक है। वे किसी सामान्य आदमी की तरह पैंट शर्ट पहनते हैं। कोई दाढ़ी या लंबे बाल नजर नहीं आते। और सबसे खास बात यह है कि बाबा अपने तमाचे वाले इलाज के लिए कोई फीस नहीं लेते। अब देखना है आनेवाले दिनों में इस बाबा की और क्या खबरें आती हैं।
दूल्हा है या गुलदस्ता
शादियों का मौसम है और हर दूल्हा या दुल्हन कुछ अलग दिखना चाहते हैं। इसके लिए वे अपने गेटअप पर खासा ध्यान देते हैं। अब एक दूल्हा महाशय का गेटअप सामने आया है जिसमें वह पूरी तरह से गुलाबों में डूबा नजर आ रहा है। असल में कई बार सेहरा में गुलाब के फूल वगैरह नजर आते हैं। पर ऐसा भी क्या कि शेरवानी की जगह भी गुलाब ले लें। बहरहाल, सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ है, जिसमें दूल्हा काफी लंबा सेहरा पहने नजर आ रहा है। वीडियो उत्तर प्रदेश का बताया जा रहा है। इसमें जब एक दूल्हा सफेद रंग के कपड़ों में सेहरा पहनकर बाहर निकला तो लोगों की हंसी छूट गई। दूल्हे ने गुलाब से बना सेहरा पहना हुआ था, लेकिन उसके सेहरे ने ना सिर्फ दूल्हे का चेहरा ढंका था, बल्कि उसकी पूरी बॉडी भी फूलों से ढंक गई थी। सोशल मीडिया पर शेयर किए गए इस वीडियो के कैप्शन में लिखा था कि इसे दूल्हा नहीं, गुलदस्ता कहिए। कई लोगों ने इस पर कमेंट किया। एक शख्स ने लिखा कि ये तो गुलदस्ते में थोड़ा सा दूल्हा है, जबकि एक ने कहा कि इसे कहते हैं फूल बन्ना तो एक अन्य ने दूल्हे को चलती-फिरती फूलों की दूकान ही कह डाला।

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