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बकलोली : गधा कहीं का…

श्रीकिशोर शाही

बोलचाल में हम किसी की हल्की-फुल्की बेवकूफी पर तुरंत झिड़कते हुए कहते हैं कि गधा कहीं का…। असल में गधा को बेवकूफी का प्रतीक माना जाता है। इसीलिए ऐसा कहा जाता है। मगर जरा ठहरिए। गधों के भी दिन फिरते हैं। खासकर दिवाली के अवसर पर राजस्थान के एक गांव में तो नजारा ही एकदम अलग होता है। वहां गधों की पूजा की जाती है। दिवाली के बाद विशेष रूप से गधों की पूजा अर्चना कर उन्हें भड़काया (दौड़ाया) जाता है। इससे पहले गधों को दुल्हन की तरह सजाया जाता है। गोवर्धन पूजा के दिन किसान अपने साधन के रूप में बैलों की पूजा करते हैं, वहीं आधुनिक युग में अब किसान और व्यापारी अपने साधनों जैसे कार, ट्रक, ट्रैक्टर सहित विभिन्न साधनों की पूजा करते हैं। मांडल कस्बे के कुम्हार जाति के लोग अनोखे अंदाज में गधे की पूजा कर इस पर्व को बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाते हैं। इस वैशाखनंदन पूजा को देखने दूर-दूर से लोग पहुंचते हैं और इसका आनंद लेते हैं। स्थानीय लोग बताते हैं कि पुराने जमाने में जब आवागमन और माल परिवहन का कोई जरिया नहीं था, तब गधों के माध्यम से ही सामान का परिवहन किया जाता था। तभी यह परंपरा शुरू हुई बताई जाती है।
बेटी से प्यारा मैराथन
अपने परिवार के लिए आदमी क्या कुछ नहीं करता, पर यदि किसी पर सनक सवार हो जाए तो बात अलग है। चीन में एक आदमी को मैराथन दौड़ने की सनक है। इस चक्कर में इस शख्स ने एक बार भारी बकलोली कर दी। अपनी छोटी-सी बेटी को गाड़ी में घंटों तक सिर्फ इसलिए लॉक कर दिया, क्योंकि वो मैराथन में दौड़ना चाहता था। दक्षिणी चीन के हुनान प्रांत में जाओ नाम की महिला ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपने पूर्व पति की पोल खोली है। महिला ने बताया कि उसके पूर्व पति को दौड़ने की प्रतियोगिताओं में भाग लेने की ऐसी सनक थी कि वो कुछ भी कर गुजरता था। एक बार उसने बेटी को कार में ५ घंटे तक बंद कर दिया, जिससे वो मैराथन दौड़ सके। पति-पत्नी के बीच दौड़ने की इस आदत को लेकर इतने झगड़े होने लगे कि यही उनकी तलाक का कारण बन गया। जब चीनी सोशल मीडिया पर ये खबर चर्चा में आ गई, तब बच्ची के पिता पेंग ने कहा कि उसकी पत्नी ने ये सिर्फ उसके खिलाफ झूठ पैâलाया है। सोशल मीडिया पर अब पति-पत्नी के झगड़े के खूब चर्चे हैं।

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