मुख्यपृष्ठनए समाचारसफल हो रही है ‘बैंड-बाजा’थेरेपी: ढोल-ताशे बजाओ;ब्रेस्ट कैंसर भगाओ!!

सफल हो रही है ‘बैंड-बाजा’थेरेपी: ढोल-ताशे बजाओ;ब्रेस्ट कैंसर भगाओ!!

सामना संवाददाता / मुंबई
ब्रेस्ट कैंसर होने पर सर्जरी की समस्या को दूर करने के लिए डॉक्टरों के कहे अनुसार महिलाएं ढोल-ताशा बजाने का मंत्र अपना रही हैं। इस मंत्र का अनुसरण करनेवाली महिलाओं ने दावा किया है कि इससे उन्हें लाभ होता हुआ भी दिखाई दिया है। इतना ही नहीं उनके रोजमर्रा भरे जीवन में आत्मविश्वास के साथ ही उत्साह का संचार होने लगा है। चिकित्सक भी कह रहे हैं कि पुणे में ढोल-ताशा बजाओ, ब्रेस्ट कैंसर को भगाओ थेरेपी सफल हो रही है।
ब्रेस्ट कैंसर  का पता शुरुआती स्टेज में ही चल जाए, तो इसका इलाज बहुत आसान होता है। हालांकि देर होने पर यह बीमारी गंभीर हो जाती है। हिंदुस्थान की बात करें, तो अब यहां महिलाओं में यह सबसे आम और सभी कैंसर  का लगभग २७ प्रतिशत है। हाल के तथ्यों पर नजर डालें, तो देश के शहरी क्षेत्रों में २९ में से एक और ग्रामीण में हर ६० में से एक महिला को स्तन कैंसर होने का खतरा है। वहीं वैश्विक स्तर पर बात करें, तो हर साल करीब १७ लाख नए ब्रेस्ट कैंसर के मामले सामने आते हैं। हिंदुस्थान में ऐसे मामलों की संख्या दो लाख है। इनमें से लगभग एक लाख महिलाओं की इस कैंसर की वजह से मौत हो जाती है। केंद्र सरकार के नेशनल कैंसर रजिस्ट्री प्रोग्राम की एक रिपोर्ट के मुताबिक साल २०२० में ७,१२,७५८ महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर की बीमारी पाई गई है।
ढोल-ताशे बजाने से कम हो रही समस्या
वरिष्ठ कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. शेखर कुलकर्णी के मुताबिक ब्रेस्ट कैंसर  की सर्जरी होने के बाद मरीजों की दैनिक गतिविधियां सीमित हो जाती हैं। हालांकि ढोल-ताशा बजाने पर परेशानी कम होती दिखाई देने के बाद डॉ. कुलकर्णी ने ढोल-ताशा महासंघ से ऐसे मरीजों को प्रशिक्षण देने का आग्रह किया। इसके बाद से ही प्रशिक्षण देना शुरू कर दिया गया है। इस प्रशिक्षण में ४० से ७० साल की महिलाएं भी शामिल हो रही हैं। इस प्रशिक्षण का लाभ भी होता हुआ दिखाई दे रहा है। डॉ. कुलकर्णी के मुताबिक इससे हाथ में दर्द कम होना, तरोताजा महसूस करना, रक्तचाप पर नियंत्रण, किसी भी कार्य को करने का उत्साह, अवसाद से बाहर निकलने में मदद मिलने जैसे कई अच्छे परिणाम दिखे हैं।
देश में ब्रेस्ट कैंसर  के इलाज पर यह विकल्प हैं उपलब्ध
देश में ब्रेस्ट कैंसर  का संभावित इलाज और समाधान सर्जिकल इलाज है। हालांकि व्यक्तिगत रोगी की स्थिति के आधार पर शल्य चिकित्सा उपचार के बाद कीमोथेरेपी, हार्माेन थेरेपी, रेडिएशन थेरेपी या टार्गेटेड थेरेपी का उपयोग किया जा सकता है। इसके लक्षणों में ब्रेस्ट में दर्द, स्किन लाल होना या रंग में बदलाव, निप्पल से खून आना, ब्रेस्ट के आसपास सूजन होना, ब्रेस्ट का साइज बढ़ना, ब्रेस्ट में गांठ होना आदि शामिल है।

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