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बारिश ने बढ़ाए बाप्पा के दाम! …नहीं सूख पा रहीं मूर्तियां

•दोगुनी से भी अधिक हुई कीमतें
गोपाल गुप्ता / मुंबई
पिछले कुछ दिनों से हो रही लगातार बारिश का असर मूर्तियों के निर्माण पर होने लगा है। बारिश ने बाप्पा की मूर्तियों के दाम बढ़ा दिए हैं। मिट्‌टी की मूर्तियां बनाने व सुखाने में मुश्किलें आ रही हैं। प्रतिवर्ष मुंबई, पालघर ठाणे में करीब तीन लाख मूर्तियों की मांग होती है, मगर मूर्तियों के नहीं सूखने से करीब दो लाख मूर्तियों का निर्माण होगा। हालांकि मूर्तिकार मौसम के आधार पर मूर्तियों की बिक्री बढ़ने और घटने की आशंका जता रहे हैं। अधिकतर मूर्ति विक्रेता पहले से बाहर से मूर्तियां लाकर संग्रहित करने लगे हैं। मुंबई सहित आस-पास के मूर्ति विक्रेता दूसरे शहरों में जाकर ऑर्डर देने लगे हैं। वे जिन शहरों में जा रहे हैं, वहां भी मूर्तियों की कमी बताई गई है। मूर्तियों की कमी और महंगाई के चलते मूर्तियों की कीमतें दोगुनी से भी अधिक हो गई हैं।

मूर्तियां बननी हुई बंद
मूर्तिकार बालचंद्र होलम ने बताया कि लगातार बारिश होने से जमीन में नमी आ जाती है, वहीं मूर्तियां सुखाने में भी परेशानी होती है। मूर्तियों को आग दिखाकर सुखाया जाता है। बारिश होने के कारण मिट्‌टी की मूर्तियां पूरी तरह नहीं सूख पाती हैं। गणेशोत्सव के समय को देखते हुए अधिकतर मूर्तिकारों ने ऑर्डर लेना बंद कर दिया है, साथ ही घरेलू मूर्तियों का हाल और खराब हो चुका है। १५ दिन पहले तक जितनी मूर्तियां बन सकी हैं, उतनी को ही अंतिम स्वरूप देने का काम किया जा रहा है। नई मूर्तियां बनाने का काम लगातार बारिश के चलते बंद किया गया है। इन मूर्तियों के सूखने के बाद इनकी फिर से मरम्मत करनी पड़ती है यानी दो बार काम करना पड़ता है। मौसम को देखते हुए अब जोखिम उठाने का समय बचा नहीं है। यदि मूर्तियां पूरी तरह सूख नहीं पार्इं तो उन पर रंग चढ़ाना मुश्किल होता है, यानी कामचलाऊ काम किया जाता है।

दूसरे व्यवसाय से जुड़े मूर्तिकार
मुंबई के मूर्तिकार आदित्य तिवारी ने बताया कि मुंबई में करीब ४५० से ५०० लोग व्यवसाय से जुड़े हैं। इनमें से कोई २ महीने, कोई ४ महीने, कोई ६ महीने और कोई सालभर काम करता है। जो कलाकार मूर्तिकला को कम समय देते हैं, वे दूसरे व्यवसाय करते हैं। उनके लिए गणेश मूर्तियों का निर्माण केवल सीजनेबल होता है। प्रतिबंध हटाने के बाद से काम तेजी से शुरू हुआ है। समय कम मिलने से गणेश मूर्तियों के निर्माण का सालाना औसत प्रमाण पूरा हो पाना मुश्किल है। कच्चे मकानों में मूर्तियां बनाने वालों के यहां तैयार मूर्तियां पानी के कारण खराब हो गई हैं। अधिकतर मूर्तियां मिट्‌टी बन गई हैं। मुंबई, ठाणे, पालघर सहित अन्य जिले में गणेशोत्सव को लेकर चार गुना जोश है।

लगातार दूसरे वर्ष हुई मूल्य वृद्धि
शहर के मूर्तिकार गणेश मूर्ति के लिए सफेद, लाल व पीली मिट्टी का उपयोग करते हैं। यह मिट्टी नागपुर से लाई जाती है। उसी प्रकार रंग अमरावती से मंगवाया जाता है। डीजल की दर बढ़ने से ट्रांसपोर्टेशन महंगा हो गया है। लगातार दूसरे वर्ष गणेश मूर्तियों की दरों में वृद्धि हुई है। मूर्तिकारों के यहां ५०० से लेकर २० हजार रुपए तक की मूर्तियां बेची जा रही हैं।

प्रतिबंध हटाने में हुआ विलंब
सरकार ने कोरोनाकाल के दौरान गणेशोत्सव पर लगाए प्रतिबंध को हटाया है। यह प्रतिबंध मात्र गणेशोत्सव से डेढ़ महीना पहले हटाए जाने से मूर्तियों के निर्माण के लिए काफी कम समय मिला है। कम समय में अधिकाधिक मूर्तियां बनाने के लिए मूर्तिकार दिन-रात एक कर रहे हैं। इसके बावजूद मूर्तिकार अपने सालाना लक्ष्य को पूरा नहीं कर पा रहे हैं। इसके पीछे सबसे बड़ी बाधा लगातार हो रही बारिश बताई जा रही है। मूर्तियों के निर्माण के लिए अधिकतर मूर्तिकारों के पास सुविधाजनक स्थायी जगह भी नहीं है। १५ फीसदी को छोड़ दिया जाए तो बाकी मूर्तिकार किराए की जगह पर काम करते हैं। किसी का खुला प्लॉट या मैदान लेकर वहां पंडाल डालकर मूर्तियों का निर्माण किया जाता है।

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