मुख्यपृष्ठसमाचारहम तो चले परदेस! ...गणेशोत्सव से ५ महीने पहले बाप्पा विदेश रवाना

हम तो चले परदेस! …गणेशोत्सव से ५ महीने पहले बाप्पा विदेश रवाना

• कोरोना के साथ ही रूस-यूक्रेन युद्ध का साया
• पानी के जहाज से गंतव्य पर पहुंचने में लगते हैं ८० दिन
• ५ सार्वजनिक व २० घरेलू मूर्तियां पहुंची बंदरगाह
उदयभान पांडेय / ठाणे । कोरोना संक्रमण तथा रूस-यूक्रेन युद्ध से विश्व में भय का वातावरण है। इसका प्रभाव आगामी गणेशोत्सव पर पड़े, उससे पहले ही बाप्पा की मूर्तियों को विदेश भेजने का काम शुरू कर दिया गया है। प्रथमेश इकोफ्रेंडली संस्था द्वारा बनाई गई ५ सार्वजनिक तथा २० घरेलू मूर्तियों को अमेरिका के टेक्सास, न्यूयॉर्क, ब्रिटेन तथा मॉरीशस भेजने के लिए न्हावाशेवा बंदरगाह पहुंचा दी गई हैं। मूर्तियों को शिप से मौके पर पहुंचने में ७० से ८० दिन लग जाते हैं।
नौकरी तथा व्यवसाय के सिलसिले में अनेक हिंदुस्थानी विदेशों में बसे हुए हैं। विदेशी संस्कृति तथा परंपराओं का आदर करते हुए भी वे अपना हर उत्सव विशेषकर गणेशोत्सव बड़े ही धूमधाम से मनाते हैं। कोरोना काल के दौरान लगाए गए कड़े प्रतिबंधों के चलते पिछले वर्ष गणेशोत्सव नहीं मना पाए थे। इस समय कोरोना कंट्रोल में है बावजूद इसके फिर से पैâलने का खतरा बना हुआ है। इसके अलावा भविष्य में रूस-यूक्रेन युद्ध से आयात-निर्यात पर प्रभाव पड़ने की संभावना जताई जा रही है। भक्तों को बाप्पा की मूर्ति समय से पूर्व ही उपलब्ध हो जाए, इसके लिए अप्रैल महीने में ही मूर्तियों को विदेश भेजने का काम शुरू कर दिया गया है। यह जानकारी प्रथमेश इकोफ्रेंडली संस्था के संदीप गजाकोश ने दी है। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष कोरोना की वजह से शिपिंग कंपनियों में कई तरह की समस्याएं पैदा हो गई थीं। तैयार मूर्तियों को विदेश नहीं भेजा जा सका था। अभी युद्ध की वजह से किसी तरह की समस्या पैदा हो, उससे पहले मूर्तियों को भेजा जा रहा है। विदेश भेजी जानेवाली सभी मूर्तियां कागज की बनी व इकोप्रâेंडली हैं। इनमें ६० प्रतिशत कागज, ३० प्रतिशत गोंद तथा १० प्रतिशत गुजरात की सफेद मिट्टी का उपयोग किया जाता है। बेहद हल्का होने की वजह से विदेशों में इसकी जबरदस्त मांग है। अमेरिका के टेक्सास शहर में हिंदुस्थानी समूह के डी.एफ. संधू टेंपल सोसायटी के एकता मंदिर में पिछले १० वर्षों से कागज की इकोफ्रेंडली मूर्ति स्थापित की जाती रही है। इस वर्ष पेशवाई ठाठ-बाट वाली साढ़े ७ फुट ऊंची मूर्ति टेक्सास के लिए भेजी गई है। इसके अलावा न्यूयॉर्क, मॉरीशस तथा ब्रिटेन के लिए पांच सार्वजनिक तथा २० घरेलू मूर्तियों को रवाना कर दिया गया है।
टेक्सास शहर में डी.एफ. संधू टेंपल सोसायटी का एकता मंदिर है। मराठी गुजराती, पंजाबी, तमिल जैसे अनेक भाषा-भाषी हिंदुस्थानी नागरिक वहां रहते हैं। पूरे साल अलग- अलग उत्सवों की धूम मची रहती है। गणेशोत्सव का विशेष महत्व है। पिछले वर्ष कोरोना की वजह से मूर्ति नहीं मिल पाई थी। कोरोना या युद्ध का असर इस वर्ष पड़ा तो फिर से मूर्ति नहीं मिल पाएगी, इसी के मद्देनजर मूर्ति को ५ महीने पूर्व मंगाने का निर्णय लिया गया है।
-दीपेश शाह, टेक्सास (यूएस)

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