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बाप्पा रे बाप्पा… गणपति हुए महंगे!

महंगी मूर्ति, महंगे पकवान और कमरतोड़ महंगाई का `विघ्न’ बरकरार

धीरेंद्र उपाध्याय / मुंबई
गणेशोत्सव के आने में करीबन एक महीने का ही समय शेष रह गया है। ऐसे में भक्त अभी से गणेश की मूर्तियों की खरीदारी से लेकर उनके आगमन और विसर्जन तक की तैयारी में जुट गए हैं। हालांकि, आम जनता महंगाई की मार से वैसे ही परेशान है, उस पर इस वर्ष बाप्पा का आगमन भी महंगा हो गया है। इतना ही नहीं मूर्ति से लेकर पकवान तक सभी वस्तुएं महंगी हो गई हैं। इस कमरतोड़ महंगाई का विघ्न बरकरार होने के बाद भी भक्तों के हौसले बुलंद हैं।
उल्लेखनीय है कि महाराष्ट्र में रायगड जिले का पेण और बुलढाणा जिले का साव गांव मूर्ति निर्माताओं के लिए प्रसिद्ध है। इसलिए इन गांवों से प्रदेश के सभी जिलों के साथ ही विदेशों तक मूर्तियां भेजी जाती हैं। लेकिन इस साल मूर्तियां बनाने के लिए जरूरी कच्चे माल की कीमत काफी बढ़ गई है। ऐसे में लोगों को एक फीट की गणेश मूर्ति के लिए कम से कम तीन से चार हजार रुपए चुकाने पड़ेंगे। फिलहाल, गणेशोत्सव को आने में अभी एक माह का समय है। ऐसे में अभी से भक्तों ने बाप्पा की मूर्तियों की बुकिंग भी कर ली है।
२५ फीसदी बढ़े मूर्तियों के दाम
पेण में स्थित सपना मूर्ति कारखाने के मालिक पांडुरंग गायकवाड ने बताया कि मुंबई समेत देश के कई राज्यों से मूर्तियों को खरीदने के लिए लोग यहां आते हैं। इस साल मूर्तियां तो बना ली गई थीं लेकिन जुलाई महीने में हुई जोरदार बारिश के चलते चिकनी मिट्टी की सभी मूर्तियां गल गई। ऐसे में मूर्तिकारों को फिर से मूर्तियां बनानी पड़ीं। चिकनी मिट्टी के दाम २ फीसदी बढ़ गए हैं। गणपति की मूर्तियां बनाने में लगनेवाले कच्चे माल की कीमतों में वृद्धि के कारण मूर्तियों की कीमत में कम से कम २५ फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। गणेशोत्सव में बाप्पा की मूर्ति के दाम बढ़ने से भक्त भी बेजार दिखाई दे रहे हैं।
महामारी ने की थी किरकिरी
कोरोना महामारी के कारण साल २०२० से लेकर २०२२ तक कई सार्वजनिक उत्सवों पर रोक लगा दी गई थी। ऐसे में पिछले तीन-चार वर्षों से जनता अपनी इच्छानुसार बिना रोक-टोक के त्यौहार नहीं मना पा रहे थे। हालांकि, पिछले साल से त्योहारों पर लगी पाबंदियों में ढील देने के बाद से ही महंगाई की मार पड़ी है।
उत्साह नहीं हुआ है कम
महंगाई के बावजूद, बड़ी मूर्तियों को खरीदकर पंडाल तक ले जाना शुरू हो गया है। मुंबई में कई सार्वजनिक गणेश मंडल एक महीने पहले ही गणेश प्रतिमा को पंडाल में ले जाते हैं। इसलिए अब मूर्तिकारों द्वारा मूर्तियों पर रंग का अंतिम काम किया जा रहा है। मूर्तियों की कीमत तो बढ़ी है लेकिन लोगों का उत्साह कम नहीं हुआ है।

महंगे हुए मोदक और पूजन सामग्री
इस साल मिठाई की दुकानों पर मोदक ७०० से १,३५० रुपए प्रति किलो की दर से बिकेंगे, वहीं बूंदी के लड्डू की कीमत ७८० रुपए प्रति किलो और मोतीचूर के लड्डू की कीमत ६८० रुपए प्रति किलो है। इसी तरह अन्य मिठाइयों की कीमत भी पिछली गणेश चतुर्थी के मुकाबले काफी बढ़ गई है। इस बारे में एक मिठाई डीलर ने कहा कि पिछले एक साल में दूध और चीनी के दाम बढ़े हैं। इस वजह से मोदक, बूंदी के लड्डू समेत मिठाइयों में पिछले साल के मुकाबले इजाफा हुआ है। इसी तरह पूजन सामग्री और पंडालों की साज सज्जा भी महंगी हो गई है।

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