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समुद्र किनारे सावधान रहना प्यारे, काटेगी जेली फिश और स्टिंग रे!

मत्स्य विभाग ने जारी किया अलर्ट
रामदिनेश यादव / मुंबई
इन दिनों मुंबई के आसपास समुद्री किनारों पर दहशत का माहौल बना हुआ है। यह किसी गुंडे या बदमाश से नहीं बल्कि खतरनाक मछलियों के चलते बना है। यहां तक कि घायलों को अस्पताल ले जाने के लिए मनपा ने एंबुलेंस भी तैनात किया है। खासकर, जुहू बीच के पास डॉक्टरों की एक टीम भी एंबुलेंस के साथ तैनात है। जहरीली मछली जेली फिश और स्टिंग रे दोनों का आवागमन इन दिनों मुंबई के समुद्री किनारों पर बढ़ गया है। इन मछलियों के काटने से पर्यटकों की हालात खराब हो जा रही है। कुछ तो बेहोश तक हो जा रहे हैं तो कुछ को दर्द इतना कि बर्दाश्त करना मुश्किल हो जाता है। मनपा के अनुसार, ये दोनों प्रजाति की मछलियां अब तक दर्जनों लोगों को शिकार बना चुकी हैं।
मत्स्य विभाग ने इन दोनों मछलियों के संबंध में सूचना जारी कर लोगों से समुद्री किनारों पर पानी में न जाने की अपील की है। साथ ही मनपा से पीड़ितों के इलाज के लिए सुविधा उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। मत्स्य विभाग के अनुसार, मानसून में समुद्र किनारे पानी में जाने से लोग बचें और यदि किसी मछली ने काट लिया तो उसका तुरंत इलाज कराएं। मनपा के १०८ एंबुलेंस को संपर्क कर मदद पा सकते हैं।
अधिकारियों के अनुसार, अगस्त से अक्टूबर की अवधि के दौरान मुंबई तट पर ‘ब्लू बटन जेली फिश’ और ‘स्टिंग रे’ की अधिक प्रजातिया आती हैं। कुछ दिन पहले मत्स्य विभाग के अधिकारियों ने जुहू चौपाटी का दौरा किया था। मत्स्य पालन विभाग ने नागरिकों को जेली फिश के काटने के मद्देनजर आवश्यक उपाय करने का अनुरोध किया है। लोगों को समुद्र में जाने से रोकते हुए आवश्यक सुरक्षा उपाय करने की पहल की है।
गणपति विसर्जन तक जेली फिश समुद्र में मौजूद रहती हैं। हर शनिवार और रविवार को लगभग २५ हजार पर्यटक जुहू बीच पर आते हैं। लाइफगार्ड मनोहर शेट्टी और सोहेल मुलानी ने पर्यटकों से निर्देशों की अनदेखी न करने और गहरे समुद्र में न जाने की अपील की है।
ऐसी होती हैं जेली फिश व स्टिंग रे
बरसात के मौसम में समुद्र से जमीन की ओर तेज हवाएं चलती हैं। ज्वार के दौरान हल्के वजन वाली जेली फिश समुद्र तटों के करीब आ जाती हैं। नीली बोतल के आकार की जेली मछलियां जहरीली होती हैं और आमतौर पर हवा से भरे नीले थैले जैसी दिखती हैं। उनके तंतुओं में एक विष होता है, जो काटने पर असहनीय दर्द का कारण बनता है। जेली फिश के इंसान के संपर्क में आने के बाद ये जोर से काटती हैं। इनका दर्द असहनीय होता है। ऐसे में जिस जगह पर इन्होंने काटा है, उस जगह पर गाय का गोबर, कोलगेट का पेस्ट लगाएं और बर्फ रगड़ें और नींबू लगाएं। महाराष्ट्र ‘मछुआरा एक्शन कमेटी’ के महासचिव किरण कोली ने बताया कि अगर चोट ज्यादा गंभीर है तो नजदीकी अस्पताल में जाकर दवा और दर्द निवारक इंजेक्शन लें।

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