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भ्रष्टाचार का अड्डा बना जेएनपीटी कस्टम हाउस!… अधिकारियों की मनमानी से इम्पोर्टर हुए परेशान

सामना संवाददता / मुंबई

जहां एक ओर केंद्र सरकार इज ऑफ डूइंग व्यापार का राग अलाप रही तो वहीं दूसरी तरफ जवाहरलाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट (जेएनपीटी) कस्टम हाउस भ्रष्टाचार का अड्डा बनता जा रहा है। इसका कारण है इम्पोर्टर्स द्वारा विदेश से मंगाए जानेवाले माल पर कानूनी दांव-पेच बताकर लाखों रुपए वसूल किया जा रहा है, नहीं दिए जानेवाले व्यापारियों को कंटेनर सीफेस में फंसे होने के कारण लाखों रुपए का नुकसान सहने को मजबूर होना पड़ रहा है। इसको लेकर बृहन्मुंबई कस्टम ब्रोकर असोसिएसशन की तरफ से स्टील आयात पर अधिकारियों द्वारा होनेवाली समस्या को लेकर जेएनपीटी कस्टम आयुक्त को लेटर लिखकर समस्याओं से अवगत भी कराया था।
सूत्रों की मानें तो इम्पोर्टरों के कई कंटेनर दिवाली से पहले से ही कंटेनर प्रâेट स्टेशन (सीएफएस) यार्ड में फंसे हुए हैं, जिससे रोजाना लाखों रुपयों का नुकसान हो रहा है। इस नुकसान और देरी का कारण भ्रष्ट अधिकारियों द्वारा भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) प्रावधानों की गलत व्याख्या करना और मंजूरी के लिए भारी रिश्वत की मांग करना है। हालांकि, स्टील लॉबी ने हाल ही में दिल्ली में व्यापार और उद्योग मंत्रालय से स्पष्टीकरण प्राप्त किया है, जिससे कुछ राहत मिली है। इसके बावजूद हजारों कंटेनर अभी भी अधिकारियों के टेबल पर फाइल धूल खा रहे है और यार्ड के इम्पोर्टर उनके द्वारा की गई देरी के कारण दंड भरने को मजबूर हैं इम्पोर्टर बिना नाम न छापने की शर्त पर बता रहे हैं कि ग्रुप ५ के सहायक आयुक्त जैसे अधिकारियों के कारण सबसे अधिक परेशानी हो रही है। इस अधिकारी द्वारा प्रति शिपमेंट पर लाखों रुपए की मांग कर रहे हैं। सूत्रों का आरोप है कि इस सहायक आयुक्त के लिए सीधे धनउगाही में शामिल हैं। इस अधिकारी पर कस्टम हाउस एजेंटों से खुलेआम धनउगाही करने, धमकी और धमकी के माध्यम से भय पैदा करने, आयात प्रक्रिया में बिचौलियों पर अतिरिक्त बोझ डालने का भी आरोप है।
इस साल जुलाई महीने में सीमा शुल्क के मुख्य आयुक्त ने एक ऑनलाइन न्हावा-शेवा शिकायत निवारण पोर्टल `ई-समाधान’ शुरू किया था। हालांकि, पीड़ितों का कहना है कि इस तरह के प्लेटफॉर्म का उपयोग करने से हम सबसे इस तरह के अधिकारियों के निशाने पर आ जाएंगे, जिसके परिणामस्वरुप हम कस्टम अधिकारियों के दुश्मन बन जाएंगे। एसोसिएशन का कहना है कि जेएनपीटी कस्टम हाउस में व्याप्त भ्रष्टाचार भारत में व्यापार करने में आसानी प्रदान करने के सरकार के उद्देश्यों के विपरीत है। इम्पोर्टर खुद को असहाय और आर्थिक रूप से तनावग्रस्त पाते हैं, जबकि भ्रष्ट अधिकारी कथित तौर पर अवैध धन इकट्ठा करते हैं। ऐसे में इन आरोपों की जांच करने और अपराधियों को जवाबदेह ठहराने के लिए तत्काल कार्रवाई जरूरी है। जेएनपीटी कस्टम हाउस को आयात-निर्यात व्यापार के लिए निष्पक्ष और भ्रष्टाचार मुक्त वातावरण सुनिश्चित करने के लिए पारदर्शिता और जवाबदेही बहाल करनी चाहिए।
जेएनपीटी कस्टम हाउस में हाल की भ्रष्टाचार की घटनाएं (२०१७-२०२३)
२०१७: जेएनपीटी के सीमा शुल्क उपाधीक्षक कुलदीप सिंह को स्टील की एक खेप को मंजूरी देने के लिए एक इम्पोर्टर से २० लाख रुपए की रिश्वत मांगने के आरोप में सीबीआई ने गिरफ्तार किया।
२०१८: जेएनपीटी के अतिरिक्त सीमा शुल्क आयुक्त एसके अग्रवाल को मशीनरी की एक खेप को मंजूरी देने के लिए एक इम्पोर्टर से ३ लाख रुपए की रिश्वत मांगने के आरोप में सीबीआई का सामना करना पड़ा।
२०१९: भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (वैâग) ने खरीद में अनियमितताओं के कारण जेएनपीटी में १,२१० करोड़ रुपये के नुकसान की रिपोर्ट दी।
२०२०: सतर्कता आयोग को जेएनपीटी अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार की २५ शिकायतें मिलीं।
२०२१: जेएनपीटी के सीमा शुल्क अधीक्षक नीतीश कुमार को रसायनों की एक खेप को मंजूरी देने के लिए एक इंपोर्टर से १० लाख रुपए की रिश्वत मांगने के आरोप में सीबीआई ने गिरफ्तार किया।
२०२२: सीएजी ने कार्गो हैंडलिंग में अनियमितताओं के कारण जेएनपीटी में १,५०० करोड़ रुपए के नुकसान की रिपोर्ट दी।
२०२३: सीबीआई ने छह सीमा शुल्क अधीक्षकों के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले शुरू किए, जिसमें धोखाधड़ी वाले शुल्क-मुक्त आयात के लिए एक सरकारी योजना का फायदा उठाने के लिए एक क्लियरिंग एजेंट के साथ मिलीभगत का आरोप लगाया गया।

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