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बुलेट ट्रेन परियोजना के लिए हो रहे बेलगाम खनन से गांवों में रह रहे ग्रामीणों को खतरा!

भविष्य में भूस्खलन होने की संभावना
जलसार को तीर्थस्थल का मिला है दर्जा
योगेंद्र सिंह ठाकुर / पालघर
रायगढ़ जिले के इर्शालवाड़ी में हुए भयंकर जान माल के नुकसान के बाद भी सरकार की लापरवाही जारी है। पालघर के बुलेट ट्रेन परियोजना के लिए जारी खनन से कुछ गांवों के अस्तित्व के लिए ही खतरा बन गया है। बुलेट ट्रेन परियोजना के ठेकेदारों ने राजस्व विभाग की अनुमति के बिना ही पालघर तालुका के जलसार में पहाड़ी की तलहटी में लगभग २५ मीटर लंबे क्षेत्र की खुदाई की है। इससे जलसार गांव के एक हिस्से को खतरा पैदा हो गया है। आदिवासी समाजोन्नति सेवा संघ (पालघर) नामक संगठन ने जिलाधिकारी को ज्ञापन देकर मामले की शिकायत कर कार्रवाई की मांग की है।
काम तुरंत रोकने की मांग
जलसार ग्राम पंचायत में पत्थर उत्खनन के लिए समतलीकरण का काम चल रहा है। इस संगठन के कार्यकर्ताओं ने जिलाधिकारी से मुलाकात कर कहा है कि जलसार में पहाड़ी के एक बड़े हिस्से में बिना अनुमति मशीनों से खुदाई की जा रही है। इससे पहाड़ी की तलहटी में रहने वाले निवासियों को भूस्खलन का डर सताने लगा है। इसलिए काम तुरंत रोकने की मांग की गई है।
दिलचस्प बात यह है कि बुलेट ट्रेन परियोजना के लिए निजी स्वामित्व वाले भूखंडों की खुदाई चल रही है, जबकि ग्रामीणों का आरोप है कि खनन की अनुमति नहीं ली गई है। इस मामले में अनुमति के लिए आवेदन करने से पहले जब संबंधित राजस्व अधिकारियों ने स्थल का निरीक्षण किया तो बताया गया कि उस स्थान पर कोई खुदाई नहीं की गई है।
योजना के बिना हो रहा काम
ग्रामीणों ने बताया कि अनुमति के लिए आवेदन अनुविभागीय कार्यालय में दिया गया है और आवेदन का निरीक्षण करने अभी तक वरीय पदाधिकारी मौके पर नहीं पहुंचे हैं। हालांकि, खोदी गई मिट्टी को उसी क्षेत्र में पैâलाया जा रहा है, लेकिन ग्रामीणों ने इसका कड़ा विरोध किया है क्योंकि पहाड़ी की तलहटी में आबादी को ध्यान में रखे बिना और किसी भी निवारक उपाय की योजना के बिना काम किया जा रहा है।
बारूदी सुरंग विस्फोट से घरों का खतरा
जलसार के साथ ही कांद्रेभुरे, सरावली और सफाले पश्चिम के कुछ हिस्सों के निवासियों का आरोप है कि राष्ट्रीय परियोजनाओं के नाम पर बड़ी मात्रा में गौण खनिज की निकासी हो रही है और इसका इस्तेमाल निजी उद्देश्यों के लिए किया जा रहा है। आदिवासी सेवा संगठन के पदाधिकारियों ने इसका एक हिस्सा वन विभाग के अधिकार क्षेत्र में बताते हुए कलेक्टर से कहा कि खाड़ी में बारूदी सुरंग विस्फोट से आसपास के घरों को खतरा पैदा हो गया है।

जलस्रोत खत्म हो जाने की आशंका
जलसार गांव को तीर्थस्थल का दर्जा प्राप्त है और इस पर्वत पर मेघदेव का मंदिर और पास में ही जलस्तोत्र है। ग्रामीणों ने विस्फोट के कारण भूजल पर असर पड़ने से झरने जैसे जल स्रोत खत्म हो जाने की आशंका जताई है और बिना अनुमति मिट्टी उत्खनन व समतलीकरण करने वाली संस्थाओं पर कार्रवाई की मांग की है।

की जाएगी कार्रवाई
शिकायत मिली है कि जलसार क्षेत्र में पहाड़ी की तलहटी में बिना अनुमति के मिट्टी की खुदाई चल रही है। इस संबंध में जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
-गोविंद बोडके, जिलाधिकारी पालघर

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