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अंतरिक्ष पर दांव! … सालभर तक रहेंगी निगाहें ‘आसमान’ पर! इसरो का दर्द; प्रसिद्धि लो, पर पैसा तो दो!

गगनयान, सूर्ययान और शुक्रयान की चर्चाओं के बाद अब ‘व्योममित्र’ की खबर

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन इसरो के अध्यक्ष एस. सोमनाथ के चंद्रयान-३ की सफलता वाले बयान पर गौर फरमाइए, उन्होंने कहा है कि इसरो चंद्रयान के बाद मंगल और शुक्र ग्रह की यात्रा की क्षमता रखता है, इसरो तैयार है… बस, हमें आत्मविश्वास बढ़ाने की जरूरत है। साथ ही अधिक निवेश की। आत्मविश्वास तो मोदी की सियासी ‘झप्पी’ से बढ़ भी जाएगा, लेकिन निवेश का क्या होगा? शायद सोमनाथ खुलकर नहीं बोल पाए। हो सकता है कि उनके भाव यही हों कि सरकार को प्रसिद्धि चाहिए तो खूब ले, पर संस्थान को पर्याप्त पैसा तो मुहैया कराए! आप लोगों को जानकर आश्चर्य होगा कि चंद्रयान- ३ की सफलता का ढोल पीटने वाली मोदी सरकार ने ‘इसरो’ के सालाना बजट में भारी कटौती की है। जबकि होना तो यह चाहिए था कि वह इसरो के बजट में बढ़ोतरी करती। क्äयोंकि आगामी कुछ माह के भीतर उसके कई महत्वपूर्ण यान अंतरिक्ष में जाने के लिए दशकों से समयबद्ध हैं। पैसों की कटौती से इन अभियानों के निर्धारित समय और संभावित सुरक्षा, दोनों के साथ समझौता करना पड़ सकता है। यदि किसी वजह से कोई अभियान असफल होता है तो उसकी असफलता का ठीकरा इसरो पर फूटना तय है। जबकि सफलता का श्रेय लेने के लिए सरकार तो तत्पर बैठी ही है। इसरो प्रमुख के बयान में शायद यही भाव छिपे हुए हैं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अंतरिक्ष विभाग को १२,५०० करोड़ रुपए आवंटित किए थे, जो पिछले साल से ८ फीसदी कम है। जब सरकार को वाह-वाही लूटने का कारण देने वाली संस्था के सालाना बजट में ८ फीसदी की भारी भरकम कटौती कर दी जाय तो संस्थान प्रमुख का विचलित होना स्वाभाविक ही है। इसरो के पूर्व प्रमुख के. सिवान ने भी कहा था कि इसरो के वैज्ञानिकों को मिलने वाली तनख्वाह विकसित देशों के वैज्ञानिकों के वेतन का पांचवा हिस्सा है। इसरो के पूर्व अंतरिक्ष विज्ञान कार्यक्रम कार्यालय के पी. श्रीकुमार ने ‘वीनस मिशन’ के बाबत कहा था कि हम औपचारिक अनुमोदन और धन की प्रतीक्षा करते हैं। यानी सबका दर्द एक जैसा ही है। वहीं जनता का दर्द यह है कि सरकार अब इसरो की सफलता को अपने खाते में भुना रही है जबकि आम आदमी से जुड़े जमीनी मुद्दों की सरकार को कोई सुध नहीं है।

मोदी सरकार के पिछले करीब साढ़े ९ वर्षों के कार्यकाल में देश में महंगाई और बेरोजगारी चरम पर पहुंच गई है। लेकिन इस गंभीर समस्या पर काम करने के बजाय सरकार अगले कम से कम एक साल तक देश की जनता का ध्यान भटकाने के लिए नई-नई योजनाएं बना रही है। खासकर चंद्रयान- ३ की चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सफल लैंडिंग के बाद सरकार यही प्रयास कर रही है कि जनता जमीन पर देखे ही नहीं। वह अंतरिक्ष में देश के वैज्ञानिकों की उपलब्धि में ही रमी रही। सरकार ने अंतरिक्ष अनुसंधान के लिए बजट को कम कर दिया है लेकिन गगनयान, सूर्ययान और शुक्रयान जैसे विभिन्न पुराने अभियानों का प्रचार जोर-शोर से कर रही है। दूसरी ओर चांद के दक्षिणी ध्रुव पर पहुंचकर अंतरिक्ष विज्ञान में सफलता की एक नई परिभाषा लिखने के बाद ‘इसरो’ सूर्य पर जाने की तैयारी कर रहा है। बताया जा रहा है कि इसरो २ सितंबर को अपना सन मिशन लॉन्च करने जा रहा है। इसे इसरो के बंगलुरु स्थित मुख्यालय से लॉन्च किया जाएगा। यह सूर्य की स्टडी के लिए यह पहला भारतीय मिशन होगा।
चंद्रयान-३ मिशन की सफलता के बाद इसरो अब अपने अगले मिशनों पर फोकस कर रहा है, जिसमें सूर्य मिशन आदित्य- एल१ और भारत का पहला मानव मिशन गगनयान शामिल है। केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री जितेंद्र सिंह ने एक कार्यक्रम में बताया कि अक्टूबर के पहले या दूसरे हफ्ते में गगनयान मिशन के तहत पहले एक स्पेसक्राफ्ट अंतरिक्ष में भेजा जाएगा। इसका मकसद यह तय करना है कि मानव मिशन के समय यह स्पेसक्राफ्ट उसी रूट से लौटे, जिससे गया है। फिर स्पेसक्राफ्ट की सफल टेस्टिंग के बाद एक महिला रोबोट ‘व्योममित्र’ को अंतरिक्ष में भेजा जाएगा। यह इंसान की तरह सारी एक्टिविटीज कर सकेगी। इसे भारत के पहले मानव मिशन के रिहर्सल के रूप में भेजा जा रहा है, यह वही रूट फॉलो करेगा, जो जिससे पहला मानव मिशन धरती की ओर लौटेगा।

प्रज्ञान गड्ढे से सकुशल बाहर निकला
चंद्रयान ३ के लैंडर की सफल लैंडिंग के बाद प्रज्ञान रोवर ने चंद्रमा की सतह पर पहली बाधा पार कर ली है। १०० एमएम गहरा क्रेटर (गड्ढा) चंद्रमा की सतह पर पहली बाधा थी। इस पहले क्रेटर को लेकर भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के वैज्ञानिक बेहद चिंतित थे लेकिन रोवर बाधा पार करने में सफल रहा और इसी के साथ चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के बारे में नई जानकारियां सामने आई हैं। ‘इसरो’ द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, लैंडर और रोवर में लगे पेलोड चंद्रमा के रहस्यों का पता लगाने में जुट गए हैं। लैंडर और रोवर में लगे पेलोड ने अब चांद के तापमान के बारे में बताया है। इसरो द्वारा जारी रिपोर्ट के मुताबिक, चांद की सतह पर तापमान ७० डिग्री सेल्सियस के आसपास है। वैज्ञानिक इस खुलासे से बेहद हैरान हैं। इससे पहले अनुमान लगाया गया था कि सतह पर तापमान २० डिग्री सेंटीग्रेड से ३० डिग्री सेंटीग्रेड के आस-पास हो सकता है, लेकिन यह ७० डिग्री सेंटीग्रेड है। इसे आश्चर्यजनक रूप से अपेक्षा से अधिक माना जा रहा है।’

क्या है मिशन गगनयान?
भारत के गगनयान मिशन का उद्देश्य मानव अंतरिक्ष उड़ान क्षमता का प्रदर्शन करना है। इस मिशन के तहत ३ स्पेस क्रू मेंबर को स्पेस में भेजने की है और उन्हें सुरक्षित भारतीय समुद्री जल क्षेत्र में उतारकर कर पृथ्वी पर लाने की है। इसे तीन दिनों के लिए लांच किया जाएगा। इसके तहत स्पेस क्रू स्पेस में ४०० किमी की ऑर्बिट तक जाएगा। गगनयान मिशन के तहत क्रू मेंबर को सुरक्षित रूप से अंतरिक्ष में ले जाने के लिए मानव रेटेड लांच व्हीकल सहित कई महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों को विकसित किया जा रहा है। स्पेस में क्रू मेंबर को पृथ्वी जैसा वातावरण प्रदान किया जाएगा। आपातकाल की स्थिति के लिए भी क्रू मेंबर को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। गगनयान मिशन को लांच करने के लिए, इसरो अपने पावरफुल राकेट उएथ्न्न् श्व् घ्घ्घ् का उपयोग करेगा।

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