" /> भड़ली नवमी आज अब नहीं बजेगी शहनाई!

भड़ली नवमी आज अब नहीं बजेगी शहनाई!

योग निद्रा में जाएंगे भगवान विष्णु
प्रतिवर्ष आषाढ़ शुक्ल नवमी को भड़ली या भडल्या नवमी पर्व मनाया जाता है। नवमी तिथि होने से इस दिन गुप्त नवरात्रि का समापन भी होता है। इस वर्ष भड़ली नवमी का पर्व आज यानी १८ जुलाई को मनाया जाएगा। भड़नी नवमी के दिन व्रत भी रखा जाता है। सत्यनारायण पूजा की तरह ही इस तिथि पर भगवान लक्ष्मीनारायण का पूजन किया जाता है। एक चौकी पर केले के पत्तों से मंडप सजाकर उसमें लक्ष्मीनारायण की मूर्ति या तस्वीर रखकर षोडशोपचार पूजन संपन्न किया जाता है। जो लोग चातुर्मास में व्रत रखते हैं वे भी इसी दिन चातुर्मास करने का संकल्प भगवान विष्णु के समक्ष लेते हैं।
उत्तर भारत में आषाढ़ शुक्ल नवमी तिथि का बहुत महत्व है। वहां इस तिथि को विवाह बंधन के लिए अबूझ मुहूर्त का दिन माना जाता है। इस दिन के बाद चार महीनों तक कोई शहनाई नहीं बजती है इस संबंध में यह मान्यता है कि जिन लोगों के विवाह के लिए कोई मुहूर्त नहीं निकलता, उनका विवाह इस दिन किया जाए, तो उनका वैवाहिक जीवन हर तरह से संपन्न रहता है, उनके जीवन में किसी प्रकार का व्यवधान नहीं आता है।
हिंदुस्थान में देवशयनी एकादशी से चातुर्मास माना जाता है जिसका अर्थ होता है कि भड़ली नवमी के बाद ४ महीनों तक विवाह या अन्य शुभ कार्य नहीं किए जा सकते, क्योंकि इस दौरान देवी-देवता सो जाते हैं। इसके बाद सीधे देवउठनी एकादशी पर श्रीहरि विष्णुजी के जागने पर चातुर्मास समाप्त होता है तथा सभी तरह के शुभ कार्य शुरू किए जाते हैं। इस वर्ष देवशयनी एकादशी २० जुलाई के दिन है। इस दिन से भगवान विष्णु चार माह के लिए योग निद्रा में चले जाएंगे और चातुर्मास का प्रारंभ हो जाएगा, इस वजह से विवाह आदि मांगलिक कार्य नहीं होते हैं।
शुभ मुहूर्त
हिंदू पंचांग के अनुसार, आषाढ़ शुक्ल नवमी तिथि का आरंभ आज १८ जुलाई को तड़के ०२.४१ मिनट से हो रहा है और इसका समापन देर रात १२.२८ मिनट पर होगा। आज पूरे दिन रवि योग का खास संयोग बन रहा है, वहीं देर रात ०१.५७ मिनट तक साध्य योग भी रहेगा। शास्त्रों में साध्य योग को अधिकांश शुभ कार्यों के लिए अधिक श्रेष्ठ माना जाता है, इसलिए यह बहुत ही शुभ मुहूर्त माना जाता है।