मुख्यपृष्ठनए समाचारभुजबल के बयान से महागठबंधन में भूचाल! ...गिरीश महाजन मनाने पहुंचे

भुजबल के बयान से महागठबंधन में भूचाल! …गिरीश महाजन मनाने पहुंचे

डेढ़ घंटे तक चली बंद कमरे में बात
सामना संवाददाता / मुंबई
बीजेपी के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने नासिक सीट के लिए उनका नाम सुझाया था, लेकिन करीब एक महीने तक महागठबंधन की ओर से कोई कार्रवाई नहीं हुई। अंत तक उनके नाम की घोषणा नहीं की गई। जैसा कि ओबीसी नेता छगन भुजबल ने हाल ही में मीडिया को दिए एक साक्षात्कार में कहा कि वह अंतत: उम्मीदवारी की दौड़ से हट गए हैं, क्योंकि यह उनका अपमान था। भुजबल के उक्त बयान से महागठबंधन में लड़ाई एक बार फिर चौखट पर आ गई है। यानी महागठबंधन में भूचाल आ गया है।
नासिक लोकसभा क्षेत्र में सोमवार को मतदान हो रहा है। इस बात पर प्रकाश डाला गया है कि इस सीट पर तीन दलों के बीच विवाद के कारण उपजा संघर्ष प्रचार के आखिरी चरण में भी जारी रहा। नासिक सीट पर शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) पक्ष के राजाभाऊ वाजे और शिंदे गुट के हेमंत गोडसे के बीच मुकाबला है। अंदरूनी कलह के कारण एक माह तक महागठबंधन उम्मीदवार की घोषणा नहीं हो सकी थी। आवेदन पत्र भरने में दो दिन शेष रहने पर आखिरकार यह सीट शिंदे गुट को मिली, लेकिन बाद में सहयोगी दलों की नाराजगी दूर करते-करते शिंदे गुट थक गया। अंत में मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को खुद ही अभियान की कमान संभालनी पड़ी। बीजेपी के एक प्रत्याशी की नाराजगी दूर करने के लिए उन्हें रात एक बजे संबंधित घर जाना पड़ा। शिंदे गुट ने जहां इस सीट को लेकर प्रतिष्ठा बना दिया है, वहीं राष्ट्रवादी अजीत पवार गुट के वरिष्ठ नेता छगन भुजबल के बयान ने ऐसी छवि बना दी है कि महागठबंधन में कुछ भी सही नहीं है।

अधिकारियों को धमकी दे रही भाजपा
रोहित पवार ने किया हमला
राकांपा (शरदचंद्र पवार) पार्टी के विधायक रोहित पवार ने बीड लोकसभा क्षेत्र में फर्जी वोटिंग का गंभीर आरोप लगाया है। रोहित पवार ने इस संबंध में सोशल मीडिया पर एक पोस्ट किया है। इस पोस्ट में रोहित पवार ने दो वीडियो शेयर किए हैं। बीड लोकसभा क्षेत्र में खासकर परली तालुका में भाजपा ने फर्जी वोटिंग और अधिकारियों को धमकाकर मतदान केंद्रों पर कब्जा करने जैसे अनियमितताएं की हैं। रोहित पवार ने ट्वीट में कहा है कि बबनभाऊ गीता जैसी कई सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सत्ताधारियों के इस दमनशाही को रोकने की साहस दिखाया है। क्या चुनाव आयोग इन मामलों की निष्पक्ष जांच कर रहा है या सिर्फ विपक्ष के खिलाफ आचार संहिता उल्लंघन का मामला दर्ज कर खुश है?

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