मुख्यपृष्ठसमाचारछिंदवाड़ा में मनाया गया भुजलिया का लोकपर्व

छिंदवाड़ा में मनाया गया भुजलिया का लोकपर्व

  • कैसी होगी फसल का किया आकलन

इमरान खान / छिंदवाड़ा
सतपुड़ा की वादियों मे बसा और महाराष्ट्र सीमा से लगा मध्य प्रदेश का छिंदवाड़ा जिला अपनी सांस्कृतिक परंपराओं के लिए तो प्रसिद्ध है ही लेकिन यहां के सांप्रदायिक सद्भाव के चर्चे देशभर में होते हैं। शुक्रवार को यहां सभी वर्गों के लोगों ने मिलकर भुजलिया का लोकपर्व मनाया। वैसे तो भुजलिया बुंदेलखंड इलाके का त्योहार है जो रक्षाबंधन के दूसरे दिन मनाया जाता है। लेकिन छिंदवाड़ा का भुजलिया उत्सव अपने आप में बेहद खास है। परंपरा के अनुसार गेहूं के दानों को नागपंचमी के दिन पत्तल के दोने में बोया जाता है जो रक्षाबंधन तक अंकुरित होकर हरे होकर ज्वारे बन जाते हैं फिर किसान इनकी पूजा कर एक-दूसरे को सौहार्द भेंट के रूप में देते हैं।
आल्हा-ऊदल की वीरता का पर्व
जानकार बताते हैं कि पुराने दौर में ये आने वाली फसल वैâसी होगी उसका आकलन करने का अपना तरीका था। बुंदेलखंड के महोबा में लोकमहानायक आल्हा-ऊदल की वीरता भी इस पर्व से जुड़ी है। छिंदवाड़ा में भुजलियों का भव्य जुलूस निकला, जिसमें हिंदू-मुसलमान शामिल हुए। इस दौरान जब ये शोभायात्रा मुस्लिम बहुल इलाके आजाद चौक से गुजरी तो पारंपरिक रूप से समाज के लोगों ने एक-दूसरे को गले लगाकर स्वागत किया। हाजी नजीरुद्दीन का परिवार बड़ी संख्या में हर साल जुलूस का स्वागत करता है इसके बाद अखाड़े का प्रदर्शन किया गया जिसमे पंजाब से विशेष रूप ये आई गतका पार्टी ने अपने युद्ध कौशल का प्रदर्शन किया।

 

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