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वैज्ञानिकों का बड़ा दावा : कोरोना के कारण बढ़ा सिजोफ्रेनिया का खतरा!

सामना संवाददाता / मुंबई
कोरोना महामारी एक बार फिर सभी को डराने लगी है। देशभर में कोरोना के नए वैरिएंट जेएन.१ के बढ़ते मामलों के बीच इस बीमारी से जुड़ी एक नई स्टडी सामने आई है, जिसमें कहा गया है कि कोविड-१९ आपके मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं कि नए जेएन. १ वैरिएंट के कारण भले ही गंभीर रोगों का खतरा कम देखा जा रहा है, पर संक्रमण के बढ़ते मामलों के कई दुष्प्रभाव हो सकते हैं। बढ़ते केस, नए वैरिएंट्स के जोखिमों को तो बढ़ा ही रहे, साथ ही कोरोना संक्रमण के कारण शरीर में कई और प्रकार की समस्याओं को लेकर भी अलर्ट किया जाता रहा है।
गौरतलब है कि महामारी की शुरुआत से कोरोना वायरस के कारण होने वाले दुष्प्रभावों को जानने के लिए किए गए अध्ययनों में पाया गया कि ये वायरस श्वसन समस्याओं के साथ फेफड़े-हृदय और मस्तिष्क से संबंधित विकारों को भी बढ़ा सकता है। इससे संबंधित एक हालिया अध्ययन में वैज्ञानिकों ने बताया कि वायरस का संक्रमण मस्तिष्क की कार्यक्षमता के लिए गंभीर समस्याकारक हो सकता है।
बिगड़ रहा मानसिक संतुलन
कोरोना के कारण होनेवाली समस्याओं के बारे में जानने के लिए किए गए एक नए अध्ययन में मस्तिष्क के संज्ञानात्मक कार्य पर इसके दुष्प्रभावों को लेकर लोगों को अलर्ट किया गया है। अध्ययन में पाया गया है कि जिन लोगों में संक्रमण के कारण मध्यम से गंभीर बीमारी देखी गई थी, उनमें सिजोप्रâेनिया स्पेक्ट्रम एंड साइकोटिक डिसऑर्डर (एसएसपीडी) जैसी बीमारियों का जोखिम काफी अधिक हो सकता है। ये स्थिति सोच और व्यवहार के तरीकों को प्रभावित करने वाली हो सकती है। अब तक ६५ साल से अधिक उम्र वाले लोगों में सिजोप्रâेनिया का खतरा अधिक देखा जाता रहा है।

अध्ययन में क्या पता चला?
शोधकर्ताओं की टीम ने कोविड-१९ के कारण होनेवाली समस्याओं को जानने के लिए १.९३ करोड़ से अधिक लोगों के डेटा का विश्लेषण किया। अध्ययन के निष्कर्ष में टीम ने बताया कि आश्चर्यजनक रूप से हमारे डेटा से संकेत मिलता है कि युवा व्यक्तियों में भी कोविड-१९ से संक्रमित होने के बाद एसएसपीडी का खतरा बढ़ जाता है। कम उम्र में होने वाली इस तरह की समस्या का क्वालिटी ऑफ लाइफ पर नकारात्मक असर हो सकता है। हम पहले भी कोरोना के कारण मानसिक स्वास्थ्य विकारों, अवसाद के बढ़े हुए मामले देख रहे हैं, पर सिजोप्रâेनिया जैसा मानसिक विकार बड़ा खतरा हो सकता है।

क्या है सिजोफ्रेनिया?
सिजोफ्रेनिया एक गंभीर मस्तिष्क विकार है, जिसके कारण सोच में विकृति के साथ कई प्रकार की भावनात्मक समस्याएं हो सकती हैं। ये बीमारी व्यक्ति के सोचने, चीजों को महसूस करने और व्यवहार करने के तरीके को भी प्रभावित करती है। सिजोफ्रेनिया से पीड़ित लोगों को ऐसा लग सकता है कि जैसे उनका वास्तविकता से संपर्क टूट गया है, जो कुछ उनके साथ हो रहा है वो वास्तविक नहीं है। इससे प्रभावित लोगों को लग सकता है कि उन्हें कोई नियंत्रित कर रहा है।

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