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दस्तावेज में दर्ज होगा मालिकाना हक! राज्य सरकार ने दिया ग्रामीणों को बड़ा तोहफा

 पालघर के ७७० गांवों का होगा सर्वे
 ४२४ गांवों का सर्वेक्षण हो चुका है पूरा
योगेंद्र सिंह ठाकुर / पालघर। पालघर जिले के ग्रामीणों को राज्य सरकार एक बड़ा तोहफा देने जा रही है। ये ग्रामीण कई पुश्तों से जिस जमीन पर रह रहे हैं, अब सरकार उन्हें उस जमीन का मालिकाना हक मुहैया कराने जा रही है।
बता दें कि राज्य सरकार के इस एक कदम से लोगों की दशकों पुरानी समस्या जल्द ही दूर होनेवाली है। राज्य सरकार के सहयोग से स्वामित्व योजना के तहत अब ग्रामीणों को जहां वे रह रहे हैं, उस स्थान का मालिकाना हक दिया जाएगा। इसके लिए जिले की ८ तहसील के ७७० गांवों में ड्रोन सर्वे किया जा रहा है। इनमें से ४२४ गांव में सर्वेक्षण का काम पूरा हो गया है। ड्रोन सर्वे के बाद आबादी क्षेत्र के गावठन प्लॉट की एंट्री की जा रही है। सर्वे सिर्फ गांव की आबादी भूमि में किया जा रहा है, जिसके डाटाबेस से पंचायत स्तर पर संपत्ति रजिस्टर भी तैयार किए जाएंगे। यह योजना ग्रामीण विकास विभाग, राज्य के भूमि अभिलेख विभाग और हिंदुस्थान के सर्वेक्षण विभाग की संयुक्त भागीदारी से बहुत तेजी से कार्यान्वित की जा रही है। ड्रोन द्वारा जारी गावठन सर्वेक्षण को पूरा करने के बाद गांव के हर घर की मैपिंग की जाएगी। गांव का हर घर, खुली जगह, सड़क, गलियों व नालियों को नगर सर्वेक्षण नंबर दिया जाएगा। साथ ही, महाराष्ट्र भू-राजस्व अधिनियम, १९६६ के प्रावधानों के अनुसार, गांव में प्रत्येक संपत्ति का प्रॉपर्टी कार्ड तैयार कर वितरित किया जाएगा।
ग्रामीणों को मिलेगा यह लाभ
गावठन (आबादी) क्षेत्र में जिस स्थान पर ग्रामीण रह रहे हैं, उन्हें उसी स्थान का स्वामित्व प्रमाण-पत्र मिलेगा। इससे उन्हें मकान-प्लॉट पर बैंक से लोन लेना आसान हो जाएगा। संपत्तियों के पारिवारिक हिस्सा-बांट, हस्तांतरण, नामांतरण, बंटवारे की प्रक्रिया आसान होगी और इससे संपत्ति को लेकर होनेवाले पारिवारिक विवाद भी कम होंगे। रिकॉर्ड बन जाने से ग्राम पंचायतों को संपत्ति कर मिलने में आसानी होगी, जो गांव के विकास में खर्च किया जाएगा। सर्वे करने के बाद आबादी सर्वे का ऑनलाइन डाटा अपडेट किया जाएगा।
योजना का मकसद संपत्ति संबंधी विवादों व कानूनी मामलों को कम करना है। अन्य गांवों में जल्द ही सर्वे किया जाएगा। भूमि अभिलेख के अधिकारी सुहास जाधव आदि मौके पर  मौजूद रहे।
क्या है गावठन (आबादी) भूूमि
गांवों में लोग पूर्वजों के जमाने से घर बनाकर रह रहे हैं। जहां वे रह रहे हैं, बहुत से ग्रामीणों के पास उस जमीन से जुड़ा कोई दस्तावेज नहीं है। एक ही सर्वे नंबर पर हजारों लोग बसे हैं। किसकी कितनी जमीन है? यह रिकॉर्ड में दर्ज नहीं है। गांव की ऐसी ही जमीन को गावठन या आबादी क्षेत्र कहते हैं। जहां अब स्वामित्व योजना के तहत मालिकाना हक दिया जाना है।
ड्रोन को देखने के लिए उमड़े ग्रामीण
एक तरफ जहां प्रशासन की टीम ड्रोन वैâमरे के जरिए गांव के गावठन क्षेत्र का सर्वे करने में जुटी हुई थी, तो दूसरी तरफ गांव में उड़ते ड्रोन को देखने के लिए मौके पर ग्रामीणों की भीड़ भी लग गई। गांव में उड़ रहे ड्रोन को लेकर ग्रामीणों से लेकर बच्चों में भी काफी उत्साह दिख रहा है।
गावठन क्षेत्र में रहनेवाले जिन लोगों के पास पहले से स्वामित्व का प्रमाण नहीं था, उन्हें सर्वेक्षण के बाद प्रमाण मिलेगा। प्रॉपर्टी कार्ड मिलने से लोगों को स्वामित्व का हक तो मिलेगा ही, साथ ही खरीद-बिक्री में होनेवाली समस्या खत्म होगी और ग्रामपंचायतों के राजस्व में भी वृद्धि होगी।
-महेश इंगले, (अधीक्षक) भूमि अभिलेख-पालघर
तालुका कुल गांव सर्वे हुए गांव
तलासरी २७ १४
डहाणू १२५ ७०
विक्रमगड ७३ ३७
जव्हार ८७ ६३
मोखाडा ५० ४५
वाडा १६२ ८१
पालघर २०१ ७२
वसई ४५ ४२
कुल ७७० ४२४

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